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BPSC TRE 4.0
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बिहार में कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र की संरचना, प्रमुख फसल प्रणालियों तथा पशुधन विकास योजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बिहार की कृषि मुख्य रूप से मानसूनी वर्षा पर निर्भर है, जहाँ राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग आधे से अधिक भाग शुद्ध बोया गया क्षेत्र (Net Sown Area) के अंतर्गत आता है, और यहाँ धान और गेहूँ प्रमुख फसलें हैं।
  2. 2. 'बिहार कृषि रोड मैप' (Agricultural Roadmap) के तहत राज्य में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए मक्का, मखाना, और सब्जियों के उत्पादन पर विशेष बल दिया गया है, तथा मखाना उत्पादन के लिए भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त जिलों में कोसी और सीमांचल क्षेत्र प्रमुख हैं।
  3. 3. राज्य में श्वेत क्रांति (Operation Flood) और पशुधन विकास को गति देने के लिए 'मुख्यमंत्री तीव्र कृत्रिम गर्भाधान योजना' और 'गव्य विकास योजना' का क्रियान्वयन किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वदेशी नस्ल की गायों और भैंसों के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना है।
  4. 4. बिहार के दक्षिण-पूर्वी जिलों (जैसे बांका, जमुई और नवादा) में सिंचाई सुविधाओं की कमी के कारण कृषि मानसून पर अत्यधिक निर्भर है, और यहाँ पारंपरिक रूप से 'अहर' और 'पायन' प्रणाली का उपयोग वर्षा जल संचयन तथा सिंचाई के लिए किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन बिहार में कृषि एवं पशुपालन के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन रीढ़ की हड्डी के समान हैं। राज्य में कृषि रोड मैप के जरिए खाद्य सुरक्षा, मखाना और बागवानी फसलों को बढ़ावा दिया गया है, जबकि दक्षिण बिहार में पारंपरिक 'अहर-पायन' सिंचाई प्रणाली आज भी प्रासंगिक है। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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