त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
16 views
19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों/संस्थाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा वर्ष 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का विरोध करना तथा एकेश्वरवाद एवं वेदों के उपदेशों का प्रचार करना था, किंतु ब्रह्म समाज ने कभी भी पाश्चात्य शिक्षा या ईसाई धर्म के नैतिक सिद्धांतों का समर्थन नहीं किया।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और शुद्धि आंदोलन की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य उन हिंदुओं को पुनः हिंदू धर्म में वापस लाना था जिन्होंने किन्हीं कारणों से अन्य धर्म अपना लिया था।
- 3. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व और सामाजिक असमानता से मुक्ति दिलाना था, तथा उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' में इस व्यवस्था की कड़ी आलोचना की।
- 4. ईश्वर चंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के कारण ब्रिटिश सरकार ने वर्ष 1856 में 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया, जिससे समाज में विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी वैधता प्राप्त हुई, और इस कार्य में उन्हें अपनी पत्रिका 'सोमप्रकाश' का भी व्यापक समर्थन मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि राजा राममोहन राय और ब्रह्म समाज ने पाश्चात्य आधुनिक शिक्षा, विज्ञान तथा ईसाई धर्म के नैतिक व मानवीय सिद्धांतों का खुले तौर पर स्वागत और समर्थन किया था, न कि उसका विरोध। कथन 2 सत्य है; स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की, वेदों की अपौरुषेयता पर जोर दिया और 'शुद्धि आंदोलन' चलाया। कथन 3 सत्य है; ज्योतिराव फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की और 'गुलामगिरी' के माध्यम से ब्राह्मणवादी वर्चस्व का विरोध किया। कथन 4 आंशिक रूप से भ्रामक है क्योंकि 'सोमप्रकाश' साप्ताहिक समाचार पत्र ईश्वर चंद्र विद्यासागर द्वारा ही निकाला जाता था, किंतु विधवा पुनर्विवाह अधिनियम के संदर्भ में मुख्य रूप से उनके सामाजिक संघर्ष और याचिका 1856 अधिनियम का आधार बनी। अतः सही विकल्प (b) है। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
भारतीय संविधान के आपात उपबंधों (भाग XVIII, अनुच्छेद 352-360) और संविधान संशोधन प्रक्रिया (भाग XX, अनुच्छेद 368) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा के समय संविधान का अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित हो जाता है, जबकि अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है।
2. वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी तिथि से दो माह के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, तथा इसे एक बार अनुमोदित होने के उपरांत अनिश्चित काल तक बिना किसी पुनः अनुमोदन के तब तक जारी रखा जा सकता है जब तक कि इसे वापस न लिया जाए।
3. संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पुनः स्थापित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Recommendation) लेना अनिवार्य है, और इस प्रक्रिया में राज्यों की विधानसभाओं के पास संविधान संशोधन विधेयक को अस्वीकार करने का अधिकार होता है।
4. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद को संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते वह संशोधन संविधान के 'मूल ढाँचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे, जिसे केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ की न्यायपालिका (उच्चतम न्यायालय) और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत नियुक्त भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को उनके पद से केवल उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है।
2. उच्चतम न्यायालय के प्रारंभिक क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) के अंतर्गत केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच या दो या अधिक राज्यों के बीच के कानूनी विवाद आते हैं, बशर्ते यह विवाद किसी ऐसे समझौते या संधि से उत्पन्न हुआ हो जो संविधान लागू होने से पहले की गई हो और अब भी लागू हो।
3. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) केंद्र सरकार के लेखाओं से संबंधित अपनी वार्षिक लेखा परीक्षा रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखवाया जाता है, तथा CAG सार्वजनिक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के मार्गदर्शक, मित्र और दार्शनिक के रूप में कार्य करते हैं।
4. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से की जाती है, और संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह विधि या तथ्य के किसी व्यापक सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय से परामर्श ले सकता है, जिसके द्वारा दिया गया परामर्श राष्ट्रपति पर पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
ध्वनि तरंगों के संचरण और तरंग गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ध्वनि तरंगे अनुदैर्ध्य (Longitudinal) यांत्रिक तरंगें होती हैं, जिनमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समानांतर कंपन करते हैं, और यही कारण है कि ये तरंगे ठोस, द्रव और गैस तीनों माध्यमों में संचरित हो सकती हैं।
2. किसी माध्यम में ध्वनि की चाल माध्यम के प्रत्यास्थता (Elasticity) और घनत्व (Density) पर निर्भर करती है, जिसके अनुसार माध्यम की प्रत्यास्थता जितनी अधिक होगी और घनत्व जितना कम होगा, उस माध्यम में ध्वनि की चाल उतनी ही अधिक होगी।
3. हवा में ध्वनि का वेग तापमान पर निर्भर करता है, और तापमान में वृद्धि होने पर ध्वनि की चाल घट जाती है, जबकि आर्द्रता (Humidity) बढ़ने से हवा का घनत्व कम हो जाता है जिससे ध्वनि की चाल बढ़ जाती है।
4. निर्वात में ध्वनि तरंगों का संचरण संभव नहीं है क्योंकि यांत्रिक तरंगों को आगे बढ़ने के लिए किसी न किसी भौतिक माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
भारत का पहला ऑर्गेनिक मत्स्य पालन क्लस्टर किस राज्य में शुरू किया गया है?
→
‘मिशन मौसम’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से गलत हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.