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BPSC TRE 4.0
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1857 के महान विद्रोह से पूर्व ब्रिटिश शासन की नीतियों के विरुद्ध भारत के विभिन्न क्षेत्रों में हुए अन्य जन आंदोलनों एवं जनजातीय विद्रोहों (1757-1857) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बंगाल में फकीर और संन्यासी विद्रोह (लगभग 1763-1800) का मुख्य कारण ब्रिटिश शासन द्वारा धार्मिक यात्राओं और तीर्थयात्रियों पर कर लगाना तथा पारंपरिक आजीविका के साधनों पर प्रतिबंध लगाना था, जिसका उल्लेख बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में मिलता है।
- 2. असम में अहोम विद्रोह (1828), गोमधर कुंवर के नेतृत्व में हुआ था, क्योंकि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के पश्चात अहोम साम्राज्य से किए गए वादों को पूरा करने के बजाय उस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया था।
- 3. छोटा नागपुर क्षेत्र में कोल विद्रोह (1831-32) का नेतृत्व बुद्ध भगत ने किया था, जो बाहरी लोगों (दिकुओं) द्वारा आदिम जनजातियों की भूमि पर अधिकार करने, भारी लगान वसूलने और न्यायिक व्यवस्था में बाहरी हस्तक्षेप के विरुद्ध एक सशस्त्र प्रतिकार था।
- 4. रामोसी विद्रोह (1822-29), जो पश्चिमी घाट के क्षेत्र में चित्तूर सिंह के नेतृत्व में हुआ था, का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और प्रशासनिक परिवर्तनों के कारण बेरोजगार हुए पारंपरिक सैनिकों (रामोसियों) की आजीविका की रक्षा करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन 1857 के विद्रोह से पूर्व भारत में हुए अन्य जन आंदोलनों और जनजातीय विद्रोहों के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। ब्रिटिश औपनिवेशिक आर्थिक, सामाजिक और न्यायिक नीतियों ने भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों—जैसे संन्यासी, फकीर, अहोम शासक, कोल और रामोसी—को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप इन सशक्त आंदोलनों का उदय हुआ। ऐसी महत्वपूर्ण और परीक्षा-उपयोगी अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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कौन सा राज्य कृषि अवसंरचना कोष (AIF) योजना के क्रियान्वयन में प्रथम स्थान पर रहा?
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आनुवंशिकी और विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रेगर जॉन Mendel (ग्रेगर मेंडल) ने मटर के पौधे (पाइसम सैटिवम) पर अपने संकरण प्रयोगों के आधार पर वंशागति کے 'प्रभाविता के नियम', 'पृथक्करण के नियम' और 'स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम' प्रतिपादित किए।
2. चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक चयन द्वारा विकास (Evolution by Natural Selection) का सिद्धांत 'ऑन द ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़' पुस्तक में प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार जीवों में अत्यधिक प्रजनन क्षमता और सीमित संसाधनों के कारण संघर्ष होता है।
3. 'हार्डी-वेनबर्ग नियम' (Hardy-Weinberg Principle) यह बताता है कि एक बड़े यादृच्छिक रूप से संगमित आबादी (Randomly Mating Population) में जीन आवृत्तियाँ (Gene Frequencies) और एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों तक स्थिर रहती हैं, बशर्ते उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन और आनुवंशिक अपवाह का प्रभाव न हो।
4. लैमार्कवाद (Lamarckism) के अनुसार उपार्जित लक्षणों की वंशागति (Inheritance of Acquired Characters) होती है, अर्थात जीवों द्वारा अपने जीवनकाल में अर्जित किए गए शारीरिक लक्षण अगली पीढ़ी में स्थानांतरित नहीं होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के प्रमुख किसान आंदोलनों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा कृषकों पर किए जा रहे अन्यायों के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ना और बेदखली के अधिकारों का विरोध करना था।
2. वर्ष 1919-20 के दौरान मधुबनी और दरभंगा क्षेत्र में स्वामी विद्यानंद के नेतृत्व में किसानों ने जमींदारों के अवैध उत्पीड़न, बेगार प्रथा और गो-चर भूमि पर कब्ज़े के खिलाफ एक शक्तिशाली आंदोलन चलाया था।
3. बकाश्त भूमि की वापसी के लिए चलाए गए संघर्ष के दौरान कार्यानंद शर्मा ने मुंगेर के बड़हिया टाल क्षेत्र में एक शक्तिशाली किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसमें किसानों ने 'न लगान देंगे, न बेगार करेंगे' का नारा दिया था।
4. वर्ष 1934 में पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में आयोजित एक बैठक के दौरान 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' के बैनर तले स्वामी सहजानंद सरस्वती की अध्यक्षता में 'अखिल भारतीय किसान समिति' की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा का गठन हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सुभाषचंद्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सुभाषचंद्र बोस ने वर्ष 1939 के त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन में पट्टाभि सीतारमैया को पराजित करके कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जीता था, किंतु गांधीजी के साथ वैचारिक मतभेदों और कार्यकारिणी गठन में असहयोग के कारण उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया और वर्ष 1939 में ही 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की।
2. वर्ष 1943 में सिंगापुर में सुभाषचंद्र बोस ने 'आजाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) के गठन की घोषणा की, और इस सरकार को जापान, जर्मनी, इटली, और मंचूरिया सहित कुल नौ देशों ने कूटनीतिक मान्यता प्रदान की थी।
3. आज़ाद हिंद फौज की प्रसिद्ध महिला रेजिमेंट 'झांसी की रानी रेजिमेंट' का गठन सिंगापुर में किया गया था, जिसका नेतृत्व डॉ. लक्ष्मी सहगल (कैप्टन लक्ष्मी) ने किया था।
4. वर्ष 1945 के लाल किले के ऐतिहासिक मुकदमे (INA Trials) के दौरान आज़ाद हिंद फौज के अधिकारियों के बचाव पक्ष के मुख्य वकील के रूप में भूलाभाई देसाई ने नेतृत्व किया था, और इस बचाव समिति में जवाहरलाल नेहरू और तेज बहादुर सप्रू जैसे दिग्गज वकील भी शामिल थे।
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