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BPSC TRE 4.0
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भारतीय राजव्यवस्था के अंतर्गत विभिन्न संवैधानिक पदों, संस्थाओं और उनकी कार्यप्रणाली के विविध आयामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत नियुक्त भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया और आधार ठीक उसी प्रकार निर्धारित हैं जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के होते हैं, और वे अपने पद से सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद के पात्र नहीं होते हैं।
- 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के अनुसार राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, और उसे राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, किंतु उसे मतदान का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
- 3. अनुच्छेद 315 के तहत गठित संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, तथा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन के लिए पात्र नहीं होते हैं, सिवाय इसके कि वे UPSC या राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष पद पर नियुक्त हो सकें।
- 4. संविधान के भाग XIV के अंतर्गत अधिकरणों (Tribunals) के संबंध में अनुच्छेद 323A संसद को प्रशासनिक अधिकरणों की स्थापना करने की शक्ति देता है, जो केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों से संबंधित विवादों का निपटारा कर सकते हैं, जबकि राज्य लोक सेवा के मामलों के लिए अधिकरण स्थापित करने की शक्ति केवल संबंधित राज्य विधानसभाओं के पास होती है, संसद के पास नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) को अनुच्छेद 148 के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया (दुराचार या असमर्थता) से हटाया जाता है और वे सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी पद के अयोग्य होते हैं। अनुच्छेद 165 के तहत राज्य के महाधिवक्ता को विधानमंडल में बोलने का अधिकार है पर मतदान का नहीं। अनुच्छेद 315 के अनुसार UPSC के सदस्य आगे अन्य सरकारी नियोजन के पात्र नहीं होते सिવાય UPSC/SPSC अध्यक्ष बनने के। कथन 4 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 323A के तहत संसद केंद्र और राज्य दोनों के प्रशासनिक मामलों के लिए अधिकरण स्थापित कर सकती है। अधिक जानकारी और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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निम्नलिखित में से कौन सा बिंदुसार का ज्ञात नाम नहीं है?
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पादप आकारिकी (Plant Morphology) और पौधों में जनन (Plant Reproduction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पुष्प एक रूपांतरित प्ररोह (Modified Shoot) है, जिसमें संघनन के कारण अंतरपर्व (Internodes) छोटे हो जाते हैं और पर्वसंधियों (Nodes) पर विभिन्न पुष्पीय अंग (जैसे बाह्यदल, दल, पुंकेसर और स्त्रीकेसर) चक्रीय रूप से व्यवस्थित होते हैं।
2. आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों में दोहरा निषेचन (Double Fertilization) पाया जाता है, जिसकी खोज एस.जी. नवास्चिन ने की थी; इसमें एक नर युग्मक अंडे की कोशिका से मिलकर युग्मकोद्भिद (Zygote) बनाता है, जबकि दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केंद्रक से संलयन कर त्रिगुणित (Triploid) प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक का निर्माण करता है।
3. आलू, अदरक और अरबी जैसे रूपांतरित तने (Modified Stems) वानस्पतिक जनन (Vegetative Propagation) के प्रमुख माध्यम हैं, जिनमें क्रमशः आँख (Eyes), प्रकंद (Rhizome) और घनकंद (Corm) पाए जाते हैं।
4. अयुग्मजनन (Apomixis) एक प्रकार का अलैंगिक जनन है जो लैंगिक जनन की नकल करता है, जिसमें बीज का निर्माण बिना निषेचन और बिना अर्धसूत्री विभाजन के होता है, और यह आनुवंशिक रूप से मातृ पौधे के समान संतति उत्पन्न करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सूची-I (मंडल) को सूची-II (मुख्यालय) से सुमेलित कीजिए?
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अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry) के अंतर्गत संक्रमण धातुओं (Transition Metals), उनके परिसरों (Complex Compounds) और समन्वय रसायन (Coordination Chemistry) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्नर के उपसहसंयोजन सिद्धांत (Werner's Coordination Theory) के अनुसार, संक्रमण धातु आयनों में दो प्रकार की संयोजकताएँ पाई जाती हैं - प्राथमिक संयोजकता (जो आयननीय होती है और ऑक्सीकरण संख्या को दर्शाती है) तथा द्वितीयक संयोजकता (जो अनआयननीय होती है और समन्वय संख्या को निर्धारित करती है)।
2. क्रिस्टल फील्ड सिद्धांत (Crystal Field Theory - CFT) के अनुसार, जब लिगेंड धातु आयन के संपर्क में आते हैं, तो धातु की 'd' कक्षकों का अपभ्रंश (Degeneracy) समाप्त हो जाता है और वे ऊर्जा के आधार पर विभाजित (Split) हो जाते हैं, जिसमें ऑक्टाहेड्रल (अष्टफलकीय) क्षेत्र में $t_{2g}$ कक्षक उच्च ऊर्जा स्तर पर और $e_g$ कक्षक निम्न ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं।
3. 'प्रभावी परमाणु क्रमांक' (Effective Atomic Number - EAN) नियम के अनुसार, कई समन्वय यौगिकों में धातु आयन और लिगेंडों द्वारा साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या निकटतम अक्रिय गैस (Noble Gas) के परमाणु क्रमांक के बराबर होने पर यौगिक अत्यधिक स्थायी हो जाता है।
4. काइरैलिटी (Chirality) और ऑप्टिकल आइसोमेरिज्म (प्रकाशिक समावयवता) मुख्य रूप से उन अष्टफलकीय परिसरों में देखी जाती है जो सममित (Symmetrical) प्रकृति के होते हैं और जिनमें समतल (Plane of symmetry) या केंद्र (Center of symmetry) विद्यमान होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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