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BPSC TRE 4.0
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पादप आकारिकी (Plant Morphology) और पौधों में जनन (Plant Reproduction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मूसला जड़ (Taproot) तंत्र के रूपांतरण के कारण शलजम (Turnip), चुकंदर (Beetroot) और गाजर (Carrot) भोजन संग्रह करने के लिए मांसल और फूल जाती हैं, जबकि आलू, अदरक और अरबी कंद, प्रकंद व घनकंद के रूप में तने के रूपांतरण के विशिष्ट उदाहरण हैं।
- 2. आवृतबीजी (Angiosperms) पौधों के पुष्प में नर जनन अंग को पुंकेसर (Stamen) तथा मादा जनन अंग को जायांग (Pistil या Carpel) कहा जाता है, जिसमें परागकणों का परागकोष से वर्तिकाग्र (Stigma) तक स्थानांतरण परागण (Pollination) कहलाता है, और यह केवल कीटों व हवा के माध्यम से ही संभव है।
- 3. आवृतबीजी पौधों में 'दोहरा निषेचन' (Double Fertilization) एक अद्वितीय विशेषता है, जिसमें एक नर युग्म अंडे की कोशिका से संलयित होकर द्विगुणित युग्मकोद्भिद (Zygote) का निर्माण करता है और दूसरा नर युग्म द्विगुणित द्वितीयक केंद्रक से संलयित होकर त्रिगुणित भ्रूणपोष (Triploid Endosperm) बनाता है।
- 4. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) और टेरिडोफाइट्स (Pteridophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians) कहा जाता है, क्योंकि इन पौधों को अपने लैंगिक जनन चक्र को सफलतापूर्वक पूरा करने और निषेचन के समय जल माध्यम की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि शलजम, चुकंदर और गाजर मूसला जड़ों के रूपांतरण हैं जो खाद्य संचय करती हैं, जबकि आलू (कंद) और अदरक (प्रकंद) भूमिगत तनों के रूपांतरण हैं। कथन 2 असत्य है क्योंकि परागण केवल कीटों और हवा द्वारा ही नहीं, बल्कि जल, पक्षियों, चमगादड़ों और अन्य जंतुओं (जीवित कारकों) द्वारा भी होता है। कथन 3 सत्य है, आवृतबीजी पौधों में दोहरा निषेचन (Syngamy और Triple Fusion) पाया जाता है जिससे त्रिगुणित भ्रूणपोष बनता है। कथन 4 सत्य है क्योंकि ब्रायोफाइट्स और टेरिडोफाइट्स को जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है। परीक्षा की संपूर्ण तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के संदर्भ में, गांधी-इरविन समझौता (दिल्ली पैक्ट, 1931) और प्रथम व द्वितीय गोलमेज सम्मेलनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार ने उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की थी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था और जिन्होंने जेलों में रहते हुए सरकारी दमन का सामना किया था।
2. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, जिसकी अध्यक्षता ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने की थी और इसमें जिन्ना, तेज बहादुर सप्रू तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी भाग लिया था।
3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर गतिरोध उत्पन्न होने के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, तथा इसी वर्ष ब्रिटिश प्रधानमंत्री द्वारा 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) की घोषणा की गई थी जिसके विरोध में गांधीजी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मतदान अनिवार्य करने वाला भारत का पहला राज्य कौन सा है?
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कौन सा बर्तन जल्दी ठंडा होगा?
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जयप्रकाश नारायण (जेपी) और 1974 के 'छात्र आंदोलन' (बिहार आंदोलन) के वैचारिक परिदृश्य, इसके उद्देश्यों तथा राजनीतिक परिणामों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस आंदोलन की शुरुआत मार्च 1974 में छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा प्रणाली में सुधार और भ्रष्टाचार के विरोध में की गई थी, जिसे बाद में जयप्रकाश नारायण ने 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) के व्यापक वैचारिक आयाम में बदल दिया, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, वैचारिक और नैतिक परिवर्तन शामिल थे।
2. जयप्रकाश नारायण ने 'पार्टी-लेस डेमोक्रैसी' (दलविहीन लोकतंत्र) और 'कम्यूनिटी डेमोक्रैसी' (समुदाय आधारित लोकतंत्र) के गांधीवादी तथा सर्वोदयी विचारों से प्रेरित होकर सत्ता के विकेंद्रीकरण पर बल दिया, किंतु इस आंदोलन के दौरान उन्होंने कभी भी संसदीय राजनीति या तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के त्यागपत्र की प्रत्यक्ष मांग नहीं उठाई थी।
3. 'संपूर्ण क्रांति' के आह्वान के बाद जेपी ने सम्पूर्ण देश में युवाओं और छात्रों को संगठित करने के लिए 'संघर्ष समितियों' (Sangharsh Samitis) का गठन किया, और इस आंदोलन का एक प्रमुख लोकतांत्रिक उद्देश्य तानाशाही प्रवृत्तियों को रोकना और राज्य विधानमंडल तथा केंद्र सरकार की जवाबदेही तय करना था।
4. इस आंदोलन के परिणामस्वूप बिहार में कांग्रेस सरकार के विरुद्ध राजनीतिक गोलबंदी इतनी तीव्र हो गई कि इसने आगे चलकर आपातकाल (Emergency) की पृष्ठभूमि तैयार की, और अंततः 1977 के आम चुनावों में जनता पार्टी की सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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पौधों एवं पशु कोशिकाओं में अंतर निम्न में किस संरचना से स्पष्ट होता है?
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