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BPSC TRE 4.0
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सुभाषचंद्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA / आज़ाद हिंद फौज) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सुभाषचंद्र बोस ने वर्ष 1942 में जर्मनी में 'फ्री इंडिया सेंटर' (Free India Center) की स्थापना की थी और यहीं से सबसे पहले उनके द्वारा 'जय हिंद' का नारा दिया गया तथा जर्मनी के हिटलर के साथ मिलकर 'आज़ाद हिंद रेडियो' की शुरुआत की गई थी।
- 2. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा वर्ष 1943 में 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की अनंतिम सरकार की स्थापना की गई थी, और इसी वर्ष सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर पहुँचकर इस सेना का सर्वोच्च नेतृत्व संभाला था।
- 3. आज़ाद हिंद फौज (INA) के सैनिकों द्वारा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर अधिकार करने के बाद उनका नाम बदलकर क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' रखा गया था।
- 4. वर्ष 1945 में जब आज़ाद हिंद फौज के अधिकारियों पर लाल किले (Red Fort Trials) में मुकदमा चलाया गया, तो उनके बचाव के लिए गठित कांग्रेस के कानूनी बचाव दल के प्रमुख वकील भूलाभाई देसाई थे, जिसमें तेज बहादुर सप्रू, के. एल. काटजू और जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि 'जय हिंद' का नारा आबद हसन सफरानी द्वारा गढ़ा गया था, और आज़ाद हिंद रेडियो की शुरुआत जर्मनी में सुभाषचंद्र बोस के प्रयासों से जरूर हुई थी, किंतु 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना भी बोस ने ही की थी। हालांकि, 'जय हिंद' नारे को लोकप्रिय बनाने और व्यापक रूप से उपयोग करने का श्रेय सुभाषचंद्र बोस को जाता है। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना सिंगापुर में रास बिहारी बोस के द्वारा की गई थी और बाद में कमान सुभाषचंद्र बोस को सौंपी गई। अंडमान-निकोबार का नाम शहीद और स्वराज रखा गया तथा 1945 के लाल किला मुकदमों में भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में बचाव पक्ष ने ऐतिहासिक पैरवी की थी। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आधुनिक भारतीय इतिहास के इस अध्याय का गहन अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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न्यूटन के द्वितीय नियम का व्यंजक?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के संदर्भ में, गांधी-इरविन समझौता (दिल्ली पैक्ट, 1931) और प्रथम व द्वितीय गोलमेज सम्मेलनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार ने उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की थी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था और जिन्होंने जेलों में रहते हुए सरकारी दमन का सामना किया था।
2. प्रथम गोलमेज सम्मेलन (नवंबर 1930 - जनवरी 1931) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से भाग लिया था, जिसकी अध्यक्षता ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने की थी और इसमें जिन्ना, तेज बहादुर सप्रू तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भी भाग लिया था।
3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, किंतु सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर गतिरोध उत्पन्न होने के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
4. वर्ष 1932 में लंदन में आयोजित तृतीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, तथा इसी वर्ष ब्रिटिश प्रधानमंत्री द्वारा 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) की घोषणा की गई थी जिसके विरोध में गांधीजी ने यरवदा जेल में आमरण अनशन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के भौगोलिक परिदृश्य में वन आवरण, मृदा के प्रकार और उनके वितरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार में कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 7.84% हिस्सा वन आवरण के अंतर्गत आता है, जिसमें सर्वाधिक वन क्षेत्रफल वाला जिला कैमूर है, जबकि प्रतिशत के दृष्टिकोण से भी कैमूर शीर्ष स्थान पर है।
2. बिहार के उत्तर-पश्चिमी भाग (विशेषकर पश्चिमी चंपारण के सोमेश्वर और दून पहाड़ियों के क्षेत्र) में पर्णपाती प्रकार के वन पाए जाते हैं, जहाँ साल (सखुआ) के वृक्षों की प्रधानता होती है।
3. राज्य में पाई जाने वाली 'टैरल मृदा' (Terai Soil) हिमालय की तराई क्षेत्र में उत्तर-पश्चिमी पट्टी में पाई जाती है, जो अम्लीय प्रकृति की होती है और गन्ने तथा धान की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है।
4. दक्षिण बिहार के पठारी और टल क्षेत्र में मिलने वाली 'लाल-पीली मृदा' और 'बलसुन्दरी मृदा' में नाइट्रोजन, ह्यूमस और फास्फोरस की प्रचुरता होती है, जिसके कारण इस क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों की बिल्कुल आवश्यकता नहीं पड़ती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत बल आघूर्ण (Torque), जड़त्व आघूर्ण (Moment of Inertia) तथा कोणीय संवेग (Angular Momentum) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी पिंड पर कार्य करने वाला बाह्य बल आघूर्ण (Torque) उस पिंड के कोणीय संवेग (Angular Momentum) में परिवर्तन की दर के बराबर होता है, जो न्यूटन के गति के द्वितीय नियम का घूर्णीय समरूप (Rotational Analogue) है।
2. यदि किसी घूर्णी गति करती हुई वस्तु पर आरोपित बाह्य बल आघूर्ण का मान शून्य (τ = 0) हो, तो उस वस्तु का कुल कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, जिसे कोणीय संवेग संरक्षण का सिद्धांत कहा जाता है और इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण अपने अक्ष पर घूमती हुई बैले नर्तकी द्वारा अपनी बाहों को सिकोड़कर अपनी घूमने की गति को बढ़ाना है।
3. किसी समांग ठोस गोले (Solid Sphere) का उसके व्यास के परितः जड़त्व आघूर्ण का मान उसी द्रव्यमान और त्रिज्या वाले खोखले गोले (Hollow Sphere) के जड़त्व आघूर्ण से अधिक होता है।
4. जड़त्व आघूर्ण एक अदिश राशि है जिसका एसआई मात्रक किग्रा-मीटर² (kg·m²) होता है, और यह इस बात पर निर्भर करता है कि वस्तु का द्रव्यमान उसके घूर्णन अक्ष से किस प्रकार वितरित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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