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BPSC TRE 4.0
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बिहार के औद्योगिक और व्यापारिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (Bihar Industrial Investment Promotion Policy) के तहत राज्य सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing), वस्त्र एवं चमड़ा उद्योग (Textile and Leather) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) को विशेष प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के रूप मेंि चिह्नित किया है।
- 2. बिहार के बेगूसराय जिले में स्थित बरौनी रिफाइनरी के विस्तार के साथ-साथ मुजफ्फरपुर और गोराौल में प्लास्टिक पार्क तथा मेगा फूड पार्क की स्थापना से राज्य में औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) के विकास को गति मिली है।
- 3. राज्य में मक्का उत्पादन की प्रचुरता को देखते हुए बिहार को 'इथेनॉल उत्पादन हब' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत निवेशकों को आकर्षित करने के लिए इथेनॉल संवर्धन नीति लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बन गया है।
- 4. नेपाल और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए फारबिसगंज (अररिया) और जोगबनी क्षेत्र में एक एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) का निर्माण किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक व्यापार को हतोत्साहित कर केवल आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। बिहार सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 'बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति' के तहत खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल और लेदर सेक्टर को विशेष रियायतें और सब्सिडी दे रही है। बरौनी रिफाइनरी और मुजफ्फरपुर में मेगा फूड व प्लास्टिक पार्क स्थापित किए गए हैं। मक्का और टूटे चावल से इथेनॉल उत्पादन की नीति लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य है। कथन 4 असत्य है क्योंकि फारबिसगंज-जोगबनी एकीकृत चेक पोस्ट (ICP) का उद्देश्य भारत-नेपाल द्विपक्षीय व्यापार और पारगमन को सुगम बनाना है, न कि आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना। अधिक अभ्यास और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों, अधीनस्थ न्यायालयों और संघ राज्य क्षेत्रों (केंद्र शासित प्रदेशों) की प्रशासनिक एवं न्यायिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 233 के अनुसार किसी राज्य के जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और प्रमोशन राज्यपाल द्वारा राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के बाद ही की जाती है, जबकि अन्य न्यायिक सेवा के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है।
2. संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा किसी संघ राज्य क्षेत्र के लिए एक उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है या किसी उच्च न्यायालय की अधिकारिता को किसी संघ राज्य क्षेत्र तक बढ़ा सकती है अथवा वहाँ से घटा सकती है, जैसा कि दिल्ली उच्च न्यायालय की स्थापना वर्ष 1966 में की गई थी।
3. अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट अधिकारिता की तुलना में अधिक व्यापक है, क्योंकि उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के साथ-साथ किसी अन्य विधिक अधिकार (Legal Right) के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं।
4. किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही होती है, और जब किसी उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश को भारत के मुख्य न्यायमूर्ति के अनुरोध पर अस्थायी रूप से पुनः नियुक्त किया जाता है, तो उसे उस पद पर कार्य करने के दौरान राज्य सरकार द्वारा निर्धारित भत्ते और वेतन प्राप्त होते हैं।
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भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास और औपनिवेशिक शिक्षा नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चार्ल्स वुड का शिक्षा पर प्रेषित घोषणा-पत्र (Wood's Despatch, 1854), जिसे 'भारतीय शिक्षा का मैग्ना कार्टा' कहा जाता है, ने जन-साधारण की शिक्षा के उत्तरदायित्व को कंपनी सरकार का मुख्य कर्तव्य माना और प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा तथा उच्च शिक्षा के स्तर पर अंग्रेजी माध्यम के प्रयोग की सिफारिश की थी।
2. लॉर्ड मैकाले के मिनट (1835) और आंग्ल-प्राच्य विवाद (Anglican-Orientalist Controversy) के पश्चात विलियम बेंटिंक की सरकार ने अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम पारित किया, जिसका मुख्य उद्देश्य यूरोपीय साहित्य और विज्ञान का प्रसार करना तथा पाश्चात्य शिक्षा के माध्यम से प्रशासन के लिए सस्ते लिपिक तैयार करना था।
3. हंटर शिक्षा आयोग (1882) का मुख्य गठन प्राथमिक शिक्षा की प्रगति की समीक्षा करना था, और इस आयोग ने प्राथमिक शिक्षा का नियंत्रण नवनिर्मित जिला बोर्डों और नगरपालिका बोर्डों (स्थानीय निकायों) को सौंपने की जोरदार वकालत की थी।
4. सैडलर विश्वविद्यालय आयोग (1917-19) ने कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं की जांच के साथ-साथ स्कूली शिक्षा की अवधि 12 वर्ष करने की सिफारिश की थी, और साथ ही यह भी सुझाव दिया था कि विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के भूगर्भीय संरचना और मृदा तंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार का दक्षिण-छोटा नागपुर पठार और उससे लगा सीमावर्ती क्षेत्र प्राचीनतम आर्कियन युग की ग्रेनाइट और नीस चट्टानों से निर्मित है, जबकि उत्तरी बिहार का मैदान पूरी तरह से नवीन जलोढ़ (New Alluvium) निक्षेपों से बना है।
2. बिहार में पाई जाने वाली 'बालसुंदरी' मृदा मुख्य रूप से पूर्णिया, सहरसा, दरभंगा और मुजफ्फरपुर के क्षेत्रों में पाई जाती है, जिसमें चूने की मात्रा अधिक होती है और यह हल्के पीले रंग की उपजाऊ दोमट मिट्टी होती है।
3. टाल (Tal) क्षेत्र की मिट्टी जो पटना से मोकामा तक गंगा के दक्षिणी तट पर विस्तृत है, अत्यधिक उपजाऊ और भारी चिकनी (Heavy Clay) प्रकृति की होती है, जहाँ जलभराव के कारण रबी की फसलें मुख्य रूप से कटी हुई अवस्था में या पानी सूखने के बाद उगाई जाती हैं।
4. दक्षिण बिहार के पठारी और सीमावर्ती जिलों (जैसे गया, औरंगाबाद, नवादा और जमुई) में पाई जाने वाली 'लाल-पीली मृदा' और 'टैलाल' मिट्टी में लौह ऑक्साइड की प्रचुरता होती है, जिससे इस क्षेत्र में धान की फसल के लिए अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता नहीं पड़ती।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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पार्थिव और जोवियन ग्रहों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं?
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मौर्य एवं मौर्योत्तर काल (Mauryan and Post-Mauryan Period) की प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य प्रशासन में 'समान्हर्त्ता' (Samahartri) का मुख्य कार्य राज्य में करों का निर्धारण और आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना यानी राजस्व संग्रह विभाग का प्रमुख होना था, जबकि 'संनिधाता' (Sanidhata) राजकीय कोषागार और भण्डारगृह का मुख्य अधिकारी होता था।
2. सातवाहन वंश (मौर्योत्तर काल) के शासकों ने शीशे के सिक्के जारी करने की परंपरा को बढ़ावा दिया और उन्होंने ब्राह्मणों तथा बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा का बड़े पैमाने पर विस्तार किया।
3. कुषाण काल (मौर्योत्तर काल) के दौरान विकसित 'गांधार कला शैली' पूरी तरह से स्वदेशी लाल बलुआ पत्थर पर आधारित थी और इसमें बौद्ध विषयों का अंकन भारतीय परंपरा के अनुसार किया गया था, जबकि 'मथुरा कला शैली' पर ग्रीक-रोमन (हेलेनिस्टिक) प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता था।
4. मौर्योत्तर काल में अर्थशास्त्र और राजनीति से संबंधित प्रसिद्ध ग्रंथों में पतंजलि द्वारा रचित 'महाभाष्य' और मनु द्वारा रचित 'मनुस्मृति' की रचना हुई, जिनसे उस काल की सामाजिक व्यवस्था और वर्ण-व्यवस्था के कठोर होने की जानकारी मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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