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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों तथा सहकारी समितियों से जुड़े 97वें संशोधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 73वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया जिसके तहत पंचायतों को स्वशासन की संस्था के रूप में मान्यता दी गई, तथा इसके अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत ग्यारहवीं अनुसूची में कुल 29 कार्यकारी विषयों का उल्लेख किया गया है जिन पर पंचायतों को विधि बनाने की शक्ति दी गई है।
  2. 2. 74वें संविधान संशोधन द्वारा भाग IX-A जोड़ा गया, जिसके तहत नगरपालिकाओं के तीन प्रकार (नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम) का प्रावधान किया गया है, तथा महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) का गठन अनुच्छेद 243-ZE के अंतर्गत किया जाता है जिसमें कम से कम दो-तिहाई सदस्य नगरपालिकाओं और जिला पंचायतों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं।
  3. 3. वर्ष 2011 के 97वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान के भाग IX-B के माध्यम से सहकारी समितियों के गठन को मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(c)) का दर्जा दिया गया तथा राज्य की नीति के निर्देशक तत्वों में नया अनुच्छेद 43-B जोड़ा गया, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक ऐतिहासिक निर्णय में राज्यों की सहमति के अभाव के कारण पूरी तरह असंवैधानिक घोषित कर दिया।
  4. 4. पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं के चुनावों को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से संपन्न कराने के लिए प्रत्येक राज्य में राज्यपाल द्वारा एक 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) का गठन किया जाता है जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 और 2 पूर्णतः सत्य हैं। 73वें संशोधन द्वारा पंचायतों को और 74वें संशोधन द्वारा नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया। महानगर योजना समिति (अनुच्छेद 243-ZE) में कम से कम दो-तिहाई सदस्य नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्यों से होते हैं। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने 97वें संशोधन के उस भाग को असंवैधानिक ठहराया था जो बहु-राज्य सहकारी समितियों से संबंधित था, लेकिन सहकारी समितियों के गठन को मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(c)) और नीति निर्देशक तत्व (अनुच्छेद 43-B) वाला हिस्सा वैध बना रहा। कथन 4 गलत है क्योंकि चुनावों के संचालन के लिए 'राज्य निर्वाचन आयोग' होता है, जबकि वित्त मामलों के लिए 'राज्य वित्त आयोग' (अनुच्छेद 243-I) होता है। परीक्षा की संपूर्ण तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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