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BPSC TRE 4.0
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन (1930-31) और उसके पश्चात हुए गांधी-इरविन समझौते (1931) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1930 में लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन का उद्घाटन ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम द्वारा किया गया था, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में आधिकारिक रूप से भाग लिया था।
  2. 2. 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित 'गांधी-इरविन समझौता' (जिसे दिल्ली पैक्ट भी कहा जाता है) के तहत वायसराय लॉर्ड इरविन ने कांग्रेस पर से प्रतिबंध हटाने तथा राजनीतिक कैदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने पर सहमति व्यक्त की थी, जबकि गांधीजी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करना स्वीकार किया था।
  3. 3. गांधी-इरविन समझौते के तुरंत बाद आयोजित कराची कांग्रेस अधिवेशन (1931) में इस समझौते का पूर्ण समर्थन किया गया, तथा इसी अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया था।
  4. 4. प्रथम गोलमेज सम्मेलन में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने दलित वर्गों के लिए एक पृथक् निर्वाचन मंडल (Separate Electorate) की मांग पुरजोर तरीके से उठाई थी, जिसे सम्मेलन में उपस्थित सभी ब्रिटिश और भारतीय नेताओं द्वारा एकमत से तुरंत स्वीकार कर लिया गया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने वर्ष 1930 में आयोजित **प्रथम गोलमेज सम्मेलन** का पूर्ण बहिष्कार किया था, क्योंकि उस समय कांग्रेस के अधिकांश नेता सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण जेल में थे। कांग्रेस ने केवल दूसरे गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लिया था। कथन 4 असत्य है क्योंकि डॉ. आंबेडकर द्वारा उठाई गई दलितों के पृथक् निर्वाचन मंडल की मांग को प्रथम गोलमेज सम्मेलन में तत्काल स्वीकार नहीं किया गया था, बल्कि इस पर आगे के सम्मेलनों और कम्युनल अवार्ड (1932) में विवाद की स्थिति बनी थी। कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। गांधी-इरविन समझौते (5 मार्च 1931) के तहत राजनीतिक कैदियों की रिहाई और आंदोलन स्थगन पर सहमति बनी तथा कराची अधिवेशन में इसे मंजूरी मिली। अधिक जानकारी और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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