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BPSC TRE 4.0
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बिहार के कृषि और पशुपालन क्षेत्र के समसामयिक परिदृश्य तथा राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बिहार सरकार द्वारा लागू 'चौथा कृषि रोड मैप' (2023-2028) के अंतर्गत जलवायु अनुकूल कृषि, फसल अवशेष प्रबंधन और गंगा बेसिन के दोनों किनारों पर जैविक कॉरिडोर योजना को प्राथमिकता दी गई है।
- 2. राज्य में श्वेत क्रांति को गति देने और दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए 'बिहार राज्य दुग्ध सहकारिता महासंघ' (COMFED / सुधा डेयरी) द्वारा किसानों को उच्च नस्ल के मवेशियों के कृत्रिम गर्भाधान और पशु स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधा प्रदान की जा रही है।
- 3. 'मुख्यमंत्री तीव्र आर्दश पशुपालन योजना' के तहत मवेशी पालकों को व्यावसायिक डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय अनुदान दिया जाता है, और इसके अंतर्गत केवल देशी गोवंश (जैसे लाल सिंधी और साहीवाल) की खरीद पर ही शत-प्रतिशत अनुदान देय है, संकर नस्लों पर नहीं।
- 4. बिहार में कृषि यंत्रीकरण योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों की खरीद पर सब्सिडी दी जाती है, जिसमें पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और रोटavator जैसे फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों को विशेष रूप से शामिल किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। चौथा कृषि रोड मैप (2023-2028) जलवायु अनुकूल कृषि, जैविक कॉरिडोर और फसल अवशेष प्रबंधन पर केंद्रित है। COMFED राज्य में डेयरी विकास को बढ़ावा दे रहा है, और कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत पराली प्रबंधन यंत्रों पर सब्सिडी दी जाती है। कथन 3 असत्य है क्योंकि 'मुख्यमंत्री तीव्र आर्दश पशुपालन योजना' या अन्य डेयरी योजनाओं में अनुदान का प्रावधान विशिष्ट नियमों के तहत होता है और यह केवल देशी गोवंश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उच्च दुग्ध उत्पादन वाली संकर नस्लों पर भी विभिन्न श्रेणियों में सहायता दी जाती है। इस प्रकार की उच्च स्तरीय तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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पादप आकारिकी (Plant Morphology) और पौधों में जनन (Plant Reproduction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूसला जड़ (Taproot) प्रणाली में प्राथमिक जड़ सीधे मूलांकुर (Radicle) के विकास से बनती है, जो गाजर, शलजम और शकरकंद जैसे पौधों में भोजन संग्रह के कारण क्रमशः शंक्वाकार, कुम्भी रूप और तर्कु रूप में रूपांतरित हो जाती है।
2. पुष्प के जनन अंगों में पुंकेसर (Stamen) नर जनन अंग है, जिसमें परागकोष और पूततंतु शामिल होते हैं, जबकि स्त्रीकेसर (Pistil/Carpel) मादा जनन अंग है, जिसके तीन प्रमुख भाग वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय होते हैं।
3. आवृत्तबीजी (Angiosperms) पौधों में दोहरा निषेचन (Double Fertilization) एक विशिष्ट घटना है, जिसमें एक नर युग्मक अंड कोशिका से संलयन कर युग्मकोद्भिद (Zygot) बनाता है, जबकि दूसरा नर युग्मक द्वितीयक केंद्रक से संलयन कर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (PEN) का निर्माण करता है।
4. कायिक प्रवर्धन (Vegetative Propagation) के अंतर्गत ब्रायोफाइलम (अजूबा) की पत्तियों के किनारों पर उपस्थित अपस्थानिक कलिकाएँ नए पौधों को जन्म देती हैं, जो प्राकृतिक कायिक जनन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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अक्षांश और देशान्तर रेखाओं के भौगोलिक एवं खगोलीय संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विषुवत वृत्त (Equator) से उत्तर या दक्षिण की ओर किसी भी बिंदु की कोणीय दूरी को अक्षांश कहा जाता है, तथा भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर पृथ्वी के चपटे आकार के कारण अक्षांश रेखाओं के बीच की भौतिक दूरी में थोड़ी वृद्धि हो जाती है, जिससे 0° से 90° की ओर बढ़ने पर प्रत्येक एक डिग्री अक्षांश की लंबाई लगातार बढ़ती जाती है।
2. देशान्तर रेखाएँ ध्रुवों को मिलाने वाली अर्ध-वृत्ताकार रेखाएँ होती हैं जो प्राइम मेरिडियन (ग्रीनविच रेखा) के पूर्व और पश्चिम दोनों दिशाओं में 180° तक फैली होती हैं, और दो क्रमागत देशान्तर रेखाओं के बीच की अधिकतम दूरी भूमध्य रेखा पर लगभग 111.3 किमी होती है, जो ध्रुवों की ओर जाने पर शून्य हो जाती है।
3. अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा (International Date Line) पूरी तरह से 180° देशान्तर रेखा का अनुसरण करती है और प्रशांत महासागर से गुजरते समय स्थल खंडों को बचाने के लिए इसमें कोई विचलन नहीं किया गया है, ताकि वैश्विक स्तर पर समय का एकरूप निर्धारण किया जा सके।
4. पृथ्वी के अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूर्णन करने के कारण, प्रत्येक 1° देशान्तर पार करने में स्थानीय समय में 4 मिनट का अंतर आता है, और ग्रीनविच रेखा से पूर्व की ओर जाने पर समय आगे (Ahead) रहता है जबकि पश्चिम की ओर जाने पर समय पीछे (Behind) रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशों तथा भारत में पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन रिपोर्टों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के अंतर्गत गठित 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण' (NDMA) का पदेन अध्यक्ष देश का प्रधानमंत्री होता है, और यह संस्था आपदाओं के प्रति भारत को 'प्रतिक्रियात्मक' (Reactive) से 'सक्रिय और रोकथाम आधारित' (Proactive and Prevention-oriented) दृष्टिकोण की ओर स्थानांतरित करने का कार्य करती है।
2. पर्यावरण और वन मंत्रालय तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा जारी नवीनतम पर्यावरण रिपोर्टों के अनुसार, भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव स्वरूप चरम मौसमी घटनाओं (Extreme Weather Events) की आवृत्ति में लगातार वृद्धि हुई है, जिसके लिए 'राज्य आपदा मोचन निधि' (SDRF) का 80% तक हिस्सा केवल राहत और पुनर्वास पर ही खर्च किया जा सकता है, रोकथाम पर नहीं।
3. भारत के आपदा प्रबंधन ढांचे में 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण' (DRR - Disaster Risk Reduction) को बढ़ावा देने के लिए 'सेंडाई फ्रेमवर्क' (Sendai Framework) के लक्ष्यों के अनुरूप राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक आपदा से होने वाले बुनियादी ढांचे के नुकसान और मानव मृत्यु दर में भारी कमी लाना है।
4. पर्यावरण रिपोर्टों में उल्लिखित 'पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता क्षेत्र' (Eco-Sensitive Zones - ESZs) की नीति के तहत किसी भी संरक्षित क्षेत्र के चारों ओर 10 किलोमीटर तक के दायरे में वाणिज्यिक खनन, बड़े बांधों के निर्माण और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर पूर्ण प्रतिबंध होता है, जिसका निर्धारण पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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किस क्षेत्र में राहुल सांकृत्यायन 1920 के असहयोग आंदोलन में सक्रिय थे?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, महाजनपद काल और मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगनार (अंगुत्तर निकाय) और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में षोडश महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें 'अंग' महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो आधुनिक भागलपुर और मुंगेर के क्षेत्र में विस्तृत थी।
2. मौर्य सम्राट अशोक के अभिलेखों को सर्वप्रथम पढ़ने में सफलता वर्ष 1837 में जेम्स प्रिंसेप को मिली थी, और इन अभिलेखों में ब्राह्मी, खरोष्ठी, ग्रीक तथा अरमाइक लिपियों का प्रयोग किया गया है, जिसमें अधिकांशतः प्राकृत भाषा का उपयोग हुआ है।
3. मेगास्थनीज द्वारा रचित 'इंडिका' ग्रंथ अपनी मूल रूप में आज भी पूर्ण सुरक्षित उपलब्ध है, और इसमें पाटलिपुत्र नगर प्रशासन का वर्णन करते हुए यह उल्लेख किया गया है कि नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा चलाया जाता था जिसमें प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे।
4. संगम काल के दौरान दक्षिण भारत में चेर, चोल और पाण्ड्य राजवंशों का शासन था, तथा इस काल के साहित्य (संगम साहित्य) से तत्कालीन सामाजिक, आर्थिक और व्यापारिक स्थितियों की विस्तृत जानकारी मिलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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