त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
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नाभिकीय भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी रेडियोधर्मी पदार्थ का क्षय नियतांक (Decay constant) उस पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है, और यह बाह्य भौतिक कारकों जैसे तापमान, दाब तथा रासायनिक संयोजनों से पूर्णतः स्वतंत्र होता है।
- 2. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया में जब एक मंद न्यूट्रॉन यूरेनियम-235 ($^{235}_{92}U$) के नाभिक पर प्रहार करता है, तो यह अत्यधिक ऊर्जा मुक्त करते हुए बेरियम और क्रिप्टन जैसे हल्के नाभिकों में टूट जाता है तथा साथ ही तीन नए न्यूट्रॉन उत्पन्न होते हैं।
- 3. सूर्य और तारों के भीतर ऊर्जा का मुख्य स्रोत 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यंत उच्च तापमान और उच्च दाब की परिस्थितियों में हाइड्रोजन के चार हल्के नाभिक मिलकर एक हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं, और इस प्रक्रिया में द्रव्यमान क्षति (Mass defect) आइंस्टीन के समीकरण के अनुसार ऊर्जा में परिवर्तित होती है।
- 4. बीटा-ऋण ($-eta$) क्षय के दौरान परमाणु के नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन में रूपांतरित होता है, जिसके फलस्वरूप एक इलेक्ट्रॉन और एक एंटीन्यूट्रिनो (${ar{ u}}_e$) का उत्सर्जन होता है, जिससे परमाणु की द्रव्यमान संख्या में तो परिवर्तन होता है किंतु उसकी परमाणु संख्या अपरिवर्तित रहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के विश्लेषण के अनुसार, कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। कथन 1 सही है क्योंकि रेडियोधर्मी क्षय एक नाभिकीय घटना है जो बाहरी भौतिक और रासायनिक कारकों से अप्रभावित रहती है। कथन 2 सही है क्योंकि यूरेनियम-235 पर न्यूट्रॉन की बमबारी से नियंत्रित या अनियंत्रित विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया होती है। कथन 3 सही है कि तारों और सूर्य में ऊर्जा का स्रोत नाभिकीय संलयन है। कथन 4 असत्य है क्योंकि बीटा-ऋण क्षय के दौरान न्यूट्रॉन के प्रोटॉन में बदलने से परमाणु संख्या (Atomic Number) में 1 की वृद्धि होती है, जबकि द्रव्यमान संख्या (Mass Number) अपरिवर्तित रहती है। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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अर्धचालक भौतिकੀ और डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शुद्ध अर्धचालकों (जैसे सिलिकॉन या जर्मेनियम) में ताप बढ़ाने पर उनकी विद्युत चालकता में वृद्धि होती है क्योंकि ऊष्मीय ऊर्जा के कारण सहसंयोजक बंध टूट जाते हैं और अधिक संख्या में इलेक्ट्रॉन-होल युग्म (Electron-Hole Pairs) उत्पन्न होते हैं, जो उनके ऋणात्मक तापमान गुणांक को दर्शाता है।
2. 'एन-टाइप' (N-type) अर्धचालक बनाने के लिए चतुर्जीदी (Tetravalent) सिलिकॉन या जर्मेनियम में त्रिजीदी (Trivalent) अशुद्धि जैसे बोरॉन या एल्युमिनियम को अपमिश्रित (Dope) किया जाता है, जिससे मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है।
3. 'पी-एन जंक्शन डायोड' (P-N Junction Diode) का प्रमुख गुण यह है कि यह अग्र अभिनति (Forward Bias) में बहुत कम प्रतिरोध और पश्च अभिनति (Reverse Bias) में बहुत अधिक प्रतिरोध प्रस्तुत करता है, जिसके कारण इसका उपयोग मुख्य रूप से प्रत्यावर्ती धारा (AC) को दिष्ट धारा (DC) में बदलने (Rectification) के लिए किया जाता है।
4. लॉजिक गेट्स (Logic Gates) के अंतर्गत 'नैंड' (NAND) और 'नॉर' (NOR) गेट्स को 'सार्वभौमिक गेट्स' (Universal Gates) कहा जाता है क्योंकि केवल इन्हीं लॉजिक गेट्स का उपयोग करके किसी भी अन्य मूल लॉजिक गेट (जैसे AND, OR, NOT) या जटिल अंकीय परिपथ का निर्माण किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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रसायन विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों, तत्वों के गुणों और उनकी व्यावहारिक उपयोगिताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गै Lussac का आयतन संबंधी नियम' के अनुसार जब गैसें परस्पर रासायनिक संयोग करती हैं, तो उनके आयतनों में एक सरल अनुपात होता है, बशर्ते सभी गैसें तापमान और दाब की समान दशाओं में हों।
2. भारी जल (ड्यूटरियम ऑक्साइड - $D_2O$) का उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों में 'मंदक' (Moderator) के रूप में किया जाता है, जिसका मुख्य कार्य न्यूट्रॉनों की गति को तीव्र करना होता है ताकि श्रृंखला अभिक्रिया आसानी से हो सके।
3. 'सिल्वर आयोडाइड' (AgI) का उपयोग कृत्रिम वर्षा (Cloud Seeding) करवाने के लिए किया जाता है, जबकि 'सिल्वर ब्रोमाइड' (AgBr) का उपयोग फोटोग्राफी में प्रकाश-संवेदनशील इमल्शन के रूप में किया जाता है।
4. सोडियम कार्बोनेट ($Na_2CO_3 \cdot 10H_2O$) को धोने का सोडा (Washing Soda) कहा जाता है, जो जल की स्थायी और अस्थायी दोनों प्रकार की कठोरता को दूर करने में प्रभावी होता है, जबकि बेकिंग सोडा सोडियम बाइकार्बोनेट ($NaHCO_3$) है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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