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BPSC TRE 4.0
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भौतिकी में विविध परिघटनाओं, मापन यंत्रों और उनके अनुप्रयोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'रमन प्रभाव' (Raman Effect) के अनुसार जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम ( ठोस, द्रव या गैस) से गुजरता है, तो प्रकीर्णित प्रकाश के वर्णक्रम में मूल आपतित आवृत्ति के अतिरिक्त भिन्न आवृत्तियों वाली स्पेक्ट्रमी रेखाएँ भी दिखाई देती हैं, जो अणुओं द्वारा प्रकाश के अप्रत्यास्थ प्रकीर्णन (Inelastic Scattering) को दर्शाती हैं।
- 2. 'पाइरोमीटर' (Pyrometer) एक ऐसा उच्च-ताप मापी यंत्र है जो स्टीफन के विकिरण नियम पर आधारित होता है, और इसके द्वारा अत्यधिक उच्च तापमान (जैसे सूर्य या भट्ठियों का तापमान) को बिना संपर्क में आए मापा जा सकता है।
- 3. 'अतिचालकता' (Superconductivity) की स्थिति में किसी पदार्थ की विद्युत प्रतिरोधकता शून्य हो जाती है और उसके भीतर का चुम्बकीय क्षेत्र भी पूर्णतः समाप्त हो जाता है, जिसे 'मेज़नर प्रभाव' (Meissner Effect) कहा जाता है।
- 4. प्रकाश तंतु (Optical Fibre) पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के सिद्धांत पर कार्य करता है, जिसमें सिग्नल के संचरण के दौरान प्रकाश ऊर्जा का क्षय अधिकतम होता है और यह केवल कम दूरी के संचार के लिए ही उपयोगी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 4 असत्य है क्योंकि प्रकाश तंतु (Optical Fibre) में पूर्ण आंतरिक परावर्तन के कारण प्रकाश ऊर्जा का क्षय नगण्य होता है और इसका उपयोग लंबी दूरी के उच्च-गति डेटा संचार में किया जाता है। भौतिकी के ऐसे महत्वपूर्ण और विश्लेषणात्मक प्रश्नों का अभ्यास करके बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफलता प्राप्त करें।
Related Questions
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अर्धचालकों (Semiconductors) और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शुद्ध अर्धचालक (नैज अर्धचालक या Intrinsic Semiconductor) जैसे कि सिलिकॉन या जर्मेनियम में कमरे के तापमान पर सहसंयोजक बंध टूटने के कारण कुछ मुक्त इलेक्ट्रॉन और कोटर (Holes) उत्पन्न होते हैं, जिससे इनकी विद्युत चालकता बहुत कम होती है।
2. नैज अर्धचालक की चालकता को बढ़ाने के लिए उसमें उपयुक्त अशुद्धियों को मिलाने की प्रक्रिया को 'अपोदक' या 'डोपिंग' (Doping) कहा जाता है; पेंटावेलेंट (पंचसंयोजी) अशुद्धियाँ मिलाने से 'n-प्रकार' का अर्धचालक बनता है जिसमें धारा का मुख्य प्रवाह मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा होता है।
3. 'p-n जंक्शन डायोड' का मुख्य उपयोग दृष्टिकरण (Rectification) में किया जाता है, जो प्रत्यावर्ती धारा (AC) को दिष्ट धारा (DC) में परिवर्तित करता है, क्योंकि यह जंक्शन अग्र अभिनति (Forward Bias) में उच्च प्रतिरोध और उत्क्रम अभिनति (Reverse Bias) में निम्न प्रतिरोध प्रदान करता है।
4. ट्रांजिस्टर (Transistor) एक तीन-टर्मिनल अर्धचालक युक्ति है जिसमें उत्सर्जक (Emitter), आधार (Base) और संग्रही (Collector) होते हैं, और इसका उपयोग प्रवर्धक (Amplifier) तथा इलेक्ट्रॉनिक स्विच के रूप में सिग्नल नियंत्रण के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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हाल ही में बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में किसने शपथ ली?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' की राजनीतिक और भौगोलिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंग महाजनपद की राजधानी चंपा थी, जो व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था, और यह महाजनपद वर्तमान बिहार के भागलपुर और बांका जिलों के क्षेत्र में स्थित था।
2. वज्जि संघ (Vajjian Confederacy) आठ कुलों का एक संघ था, जिसमें लिच्छवि सर्वाधिक शक्तिशाली कुल था, और इसकी राजधानी वैशाली (विश्व का पहला गणतंत्र माना जाता है) थी।
3. मगध महाजनपद की प्रारंभिक राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) थी, जो पांच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण एक सामरिक रूप से अत्यंत सुरक्षित और दुर्जेय स्थान था।
4. वत्स महाजनपद की राजधानी कौशंबी थी, जो यमुना नदी के तट पर स्थित थी, और इसके प्रसिद्ध शासक चंड प्रद्योत थे जो बुद्ध के समकालीन थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के भूगर्भीय संरचना और मृदा तंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार का दक्षिण-पूर्वी पठारी क्षेत्र (विशेषकर बांका, जमुई और नवादा के कुछ हिस्से) प्राचीनकालीन धारवाड़ और आर्कियन युगीन चट्टानों से निर्मित है, जो प्रायद्वीपीय पठार का उत्तरपूर्वी विस्तार है।
2. उत्तर बिहार के मैदान में पाई जाने वाली नवीन जलोढ़ मृदा को स्थानीय भाषा में 'खादर' या 'कँहारी' कहा जाता है, जो प्रत्येक वर्ष बाढ़ के दौरान नए तलछटों के जमा होने से अत्यधिक उपजाऊ बनी रहती है।
3. टाल (Tal) क्षेत्र, जो मोकामा से बाढ़ और बड़हिया तक गंगा के दक्षिण में फैला हुआ है, एक ऐसा जलमग्न गर्त क्षेत्र है जहाँ भारी मटियार मृदा पाई जाती है, और यह क्षेत्र दलदली स्वभाव का होने के कारण रबी फसलों (विशेषकर चना) के उत्पादन के लिए विश्वप्रसिद्ध है।
4. बिहार के उत्तर-पश्चिमी भाग (पश्चिम चंपारण के सोमेश्वर और दून घाटी क्षेत्र) में टर्पियरी (Tertiary) युगीन अवसादी चट्टानें पाई जाती हैं, जिन पर पर्वतीय एवं कंकरीली 'भाभर' मृदा का विकास हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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अभिकथन (A): पहाड़ी ढलानों पर फसलें पाले के प्रति कम संवेदनशील होती हैं। कारण (R): रात में गर्म हवा नीचे आकर घाटियों में जमा हो जाती है।
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