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BPSC TRE 4.0
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मौर्य कालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और मौयोत्तर काल की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मौर्य काल में 'समान्हर्त्ता' (Samahartri) का मुख्य कार्य राज्य में करों का निर्धारण और आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना (राजस्व संग्रह विभाग का प्रमुख) था, जबकि 'संनिधाता' (Sanidhata) राजकीय कोषागार और भण्डारगृह का मुख्य अधिकारी होता था।
  2. 2. सातवाहन वंश (मौयोत्तर काल) के शासकों ने सबसे पहले शीशे के सिक्के जारी किए थे, तथा उन्होंने भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा की शुरुआत की थी, जो मुख्य रूप से बौद्ध भिक्षुओं और ब्राह्मणों को धार्मिक और प्रशासनिक छूट के साथ दिए जाते थे।
  3. 3. मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर-भारत में स्थापित शुंग वंश के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग ने बौद्ध धर्म का पूर्णतः उन्मूलन कर दिया था और सभी बौद्ध स्तूपों को नष्ट कर दिया था, जिसके कारण बौद्ध साहित्यों में उन्हें क्रूर शासक के रूप में चित्रित किया गया है।
  4. 4. कुषाण काल (मौयोत्तर काल) के दौरान गांधार कला शैली पर ग्रीक-रोमन (हेलेनिस्टिक) प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिसमें बुद्ध की मूर्तियों को यथार्थवादी रूप में काले स्लेटी रंग के पाषाण से नीले-धूसर पत्थरों पर उकेरा गया था, जबकि मथुरा कला शैली पूरी तरह से स्वदेशी लाल बलुआ पत्थर पर आधारित थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि मौर्य प्रशासनिक व्यवस्था में समान्हर्त्ता राजस्व संग्रह का मुख्य अधिकारी था और संनिधाता कोषागार का प्रभारी था। कथन 2 सत्य है कि सातवाहन वंश ने शीशे के सिक्के (सीस/पोटिन) चलाए और बड़े पैमाने पर ब्राह्मणों व बौद्धों को भूमि अनुदान देने की शुरुआत की। कथन 3 असत्य है क्योंकि पुष्यमित्र शुंग के काल में भरहुत और सांची के स्तूपों का जीर्णोद्धार एवं विस्तार हुआ था; बौद्ध ग्रंथों में उसे भले ही कुछ स्थानों पर उत्पीड़क कहा गया हो, लेकिन उसने सभी बौद्ध स्तूपों का पूर्णतः उन्मूलन नहीं किया था। कथन 4 सत्य है, गांधार कला पर ग्रीक-रोमन प्रभाव था और इसमें स्लेटी पत्थरों का प्रयोग हुआ था। ऐसी ही उत्कृष्ट और परीक्षा-उन्मुख सामग्री के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
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