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BPSC TRE 4.0
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बिहार के जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1855-56 के 'संथाल हूल' (विद्रोह) के दौरान संथाल विद्रोहियों ने ब्रिटिश शासन, साहूकारों (दीकू) और जमींदारों के शोषण के विरुद्ध पारंपरिक हथियारों के साथ सशस्त्र संघर्ष का आह्वान किया था, जिसके परिणामस्वरूप बाद में 'संथाल परगना टेनेंसी एक्ट' (SPTA) पारित किया गया था।
  2. 2. बिरसा मुंडा के नेतृत्व में वर्ष 1899-1900 में हुए 'उलगुलान' (महान हलचल) का मुख्य उद्देश्य 'मुंडा राज' की स्थापना करना था, जिसमें अंधविश्वासों, पशुबलि और शराबखोरी का कड़ा विरोध करते हुए एक नैतिक समाज के निर्माण पर बल दिया गया था।
  3. 3. जतरा भगत के नेतृत्व में वर्ष 1914 में प्रारंभ हुआ 'ताना भगत आंदोलन' उरांव जनजाति का एक अहिंसक और सुधारवादी आंदोलन था, जिन्होंने अंग्रेजों को भू-राजस्व देने से इंकार कर दिया था और बाद में असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के साथ सक्रिय रूप से जुड़े थे।
  4. 4. पहाड़िया विद्रोह, जो राजमहल की पहाड़ियों के क्षेत्र में महतो और पहाड़िया सरदारों द्वारा ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों के खिलाफ किया गया था, एक पूर्णतः स्थायी और सफल सुधारवादी आंदोलन साबित हुआ था जिसने ब्रिटिश साम्राज्य को अपनी नीतियां हमेशा के लिए समाप्त करने पर मजबूर कर दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। संथाल विद्रोह (1855-56) ने संथाल परगना के निर्माण और SPTA एक्ट का मार्ग प्रशस्त किया। बिरसा मुंडा का 'उलगुलान' मुंडा समाज में सुधार और मुंडा राज स्थापित करने से जुड़ा था। जतरा भगत का 'ताना भगत आंदोलन' उरांव जनजाति का अहिंसक और राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ा प्रमुख सुधारवादी आंदोलन था। कथन 4 असत्य है क्योंकि पहाड़िया विद्रोह अंग्रेजों के विरुद्ध एक कड़ा और हिंसक संघर्ष था, जिसे अंग्रेजों ने क्रूरता से दबा दिया था, न कि यह कोई स्थायी सफल सुधारवादी आंदोलन था। अधिक अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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