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BPSC TRE 4.0
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पादप जगत (Plant Kingdom) और जन्तु जगत (Animal Kingdom) के वर्गीकरण तथा उनके जैविक लक्षणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ब्रायोफाइटा (Bryophyta) को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians) कहा जाता है क्योंकि इस वर्ग के पौधे मिट्टी में तो उगते हैं, किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें वास्तविक संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) का पूर्ण अभाव होता है।
- 2. जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms) के पौधों में बीज नग्न (Naked seeds) होते हैं क्योंकि इनमें अंडाशय (Ovary) अनुपस्थित होता है, जिससे फल का निर्माण नहीं होता है, तथा इनके संवहनी तंत्र में 'वाहिकाएं' (Vessels) और सहोष कोशिकाएं नहीं पाई जाती हैं।
- 3. पोरिफेरा (Porifera) संघ के जंतुओं में शरीर की सतह पर 'ऑस्टिया' (Ostia) नामक सूक्ष्म छिद्र पाए जाते हैं, जिनके माध्यम से जल शरीर के स्पंजोसील गुहा में प्रवेश करता है, और यह संघ पूरी तरह से स्थलीय आवासों में पाया जाता है।
- 4. ऐनेलिडा (Annelida) संघ के जंतुओं में शरीर खंडीय (Metameric segmentation) होता है, और इनमें गति के लिए काइटिनयुक्त 'पैरापोडिया' या 'सीिटी' (Setae) पाए जाते हैं, तथा इनका परिसंचरण तंत्र बंद प्रकार (Closed circulatory system) का होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। ब्रायोफाइटा को पादप जगत का उभयचर कहा जाता है क्योंकि ये स्थल पर जीवित रह सकते हैं लेकिन निषेचन के लिए जल आवश्यक होता है और इनमें संवहनी ऊतक नहीं होते। जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी) में बीज नग्न होते हैं क्योंकि अंडाशय नहीं होता और फल नहीं बनते। ऐनेलिडा संघ के जीवों में शरीर खंडयुक्त होता है और बंद परिसंचरण तंत्र पाया जाता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि पोरिफेरा संघ के जीव मुख्य रूप से जलीय (अधिकांशतः समुद्री) होते हैं, न कि स्थलीय। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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जंग से बचाने के लिए लोहे के पाइपों पर जस्ते की परत चढ़ाने को क्या कहते हैं?
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मौर्य एवं मौर्योत्तर काल (Mauryan and Post-Mauryan Period) के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, भूमि अनुदान और मुद्रा प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्य प्रशासन में 'समान्हर्त्ता' (Samahartri) का मुख्य कार्य राज्य में करों का निर्धारण और आय-व्यय का लेखा-जोखा रखना यानी राजस्व संग्रह विभाग का प्रमुख होना था, जबकि 'संनिधाता' (Sanidhata) राजकीय कोषागार और भण्डारगृह का मुख्य अधिकारी होता था।
2. सातवाहन वंश (मौर्योत्तर काल) के शासकों ने शीशे, प्रोटीन, तांबे और कांसे के सिक्के जारी किए, तथा उन्होंने ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा का बड़े पैमाने पर विस्तार किया, जिससे सामंती प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिला।
3. कुषाण काल (मौर्योत्तर काल) के दौरान सोने के सिक्कों का बड़े पैमाने पर प्रचलन हुआ, और कुषाणों के स्वर्ण सिक्के रोमन साम्राज्य के सिक्कों की तुलना में कम शुद्धता वाले थे, जबकि गुप्त काल ने इस मामले में इन्हें पीछे छोड़ दिया।
4. मौर्योत्तर काल में अर्थव्यवस्था में नगरीकरण का ह्रास देखा गया, जिसके कारण बड़े व्यापारिक निगमों या श्रेणियों (Guilds) का पतन हो गया और आंतरिक तथा बाह्य व्यापार पूरी तरह से समाप्त हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के खनिज वितरण, ऊर्जा संसाधनों और उनसे संबंधित भौगोलिक अवस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार के रोहतास जिले के बंजारी और अमझौर क्षेत्र में पाइराइट्स (Pyrites) के विशाल भंडार पाए जाते हैं, और देश में पाइराइट्स के उत्पादन के मामले में बिहार का एकाधिकार (लगभग 95% से अधिक) है।
2. भागलपुर जिले के कहलगांव में स्थित 'कहलगांव सुपर थर्मल पावर स्टेशन' (NTPC Kahalgaon) एक कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र है, जिसे कोयले की आपूर्ति मुख्य रूप से झारखण्ड के राजमहल कोयला क्षेत्रों से की जाती है।
3. बिहार के गया और नवादा जिलों के कुछ क्षेत्रों में अभ्रक (Mica) के भंडार पाए जाते हैं, जो कोडरमा (झारखण्ड) मेखला का ही उत्तर-पूर्वी विस्तार है।
4. बरौनी रिफाइनरी (Barauni Refinery) बिहार की एकमात्र तेल शोधनशाला है, जिसे प्रारम्भ में असम के डिगबोई तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल की आपूर्ति की जाती थी, किंतु वर्तमान में इसे हल्दिया-बरौनी पाइपलाइन के माध्यम से आयातित कच्चे तेल की आपूर्ति की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सूची-I (ज्वालामुखी) को सूची-II (देश) से सुमेलित कीजिए?
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बिहार सरकार द्वारा डिजिटल शासन, पारदर्शी प्रशासन और नागरिकों को घर बैठे सरकारी सेवाएँ प्रदान करने के लिए विभिन्न पोर्टलों और डिजिटल पहलों की शुरुआत की गई है। इस संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार में भूमि विवादों के त्वरित निष्पादन और जमीनी नक्शों व अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए 'बिहार भूमि पोर्टल' पर 'डिजिटल भू-मानचित्र' (Digital Cadastral Map) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से किसान ऑनलाइन अपनी जमीन का रसीद और म्यूटेशन की स्थिति देख सकते हैं।
2. शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए बिहार सरकार द्वारा 'ई-शिक्षाकोष' (E-Shikshakosh) पोर्टल और मोबाइल ऐप शुरू किया गया है, जिसके जरिए राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों, विद्यार्थियों की दैनिक उपस्थिति और शैक्षणिक गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी की जाती है।
3. राज्य में श्रम और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए 'बिहार कौशल विकास मिशन' (BSDM) के अंतर्गत 'कुशल युवा कार्यक्रम' (KYP) संचालित किया जाता है, जिसके तहत युवाओं के पंजीकरण और प्रशिक्षण की मॉनिटरिंग के लिए 'मेधा साफ्ट' (Medha Soft) पोर्टल का उपयोग किया जाता है।
4. पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण की पहलों को डिजिटल रूप से ट्रैक करने के लिए 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान के तहत 'बिहार हरियाली मिशन' पोर्टल पर सभी जिलों द्वारा लगाए जाने वाले पौधों की जियो-टैगिग (Geo-tagging) अनिवार्य की गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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