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BPSC TRE 4.0
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार और पड़ोसी क्षेत्रों में हुए संघर्षों तथा उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पटना में 23 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पीर अली खान नामक एक पुस्तक विक्रेता ने किया था, जिन्हें ब्रिटिश शासन के विरुद्ध षड्यंत्र रचने के आरोप में सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
- 2. छोटा नागपुर क्षेत्र (झारखंड) में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व रामगढ़ बटालियन के सैनिकों के साथ मिलकर डोरंडा के सूबेदार जय मंगल सिंह और माधो सिंह ने किया था, जिन्होंने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया था।
- 3. भागलपुर और संथाल परगना क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व स्थानीय राजा अमर सिंह ने किया था, जिन्होंने ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर को पराजित कर इस पूरे क्षेत्र पर अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिया था।
- 4. दानापुर छावनी के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के विद्रोही सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार करके बाबू कुür सिंह की सेना से जा मिले थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। पटना में 23 जुलाई 1857 को पीर अली खान के नेतृत्व में विद्रोह हुआ था, जिसमें एक अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था और बाद में पीर अली को फांसी दी गई थी। छोटा नागपुर में डोरंडा के सूबेदार जय मंगल सिंह और माधो सिंह ने रामगढ़ बटालियन का नेतृत्व किया था। 25 जुलाई 1857 को दानापुर छावनी की तीन रेजिमेंटों ने विद्रोह किया और आरा पहुंचकर बाबू कुंवर सिंह के साथ हो लिए। कथन 3 असत्य है क्योंकि भागलपुर और संथाल परगना क्षेत्र में विद्रोह का नेतृत्व मुख्य रूप से औरंगाबाद और राजमहल की पहाड़ियों के अन्य स्थानीय नेताओं द्वारा किया गया था, जबकि अमर सिंह बाबू कुंवर सिंह के छोटे भाई थे जिन्होंने शाहबाद और आसपास के क्षेत्रों में कमान संभाली थी। ऐसी ही बेहतरीन और परीक्षा-उन्मुख अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद (लोकसभा एवं राज्य सभा) की विधाई प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे अपने कर्तव्यों के पालन के दौरान भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, परंतु उसे किसी भी परिस्थिति में मतदान (Vote) करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. अनुच्छेद 88 के अनुसार, महान्यायवादी को संसद के किसी भी सदन की बैठकों में या उसकी समितियों में (यदि उसे सदस्य के रूप में नामित किया गया हो) बोलने की स्वतंत्रता और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, और वह एक सांसद की तरह ही संसदीय विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का हकदार होता है।
3. राज्य सभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता, और इसके सदस्यों का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा राज्य की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है, तथा इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं।
4. लोकसभा में बिहार राज्य से कुल 40 सीटें आवंटित हैं, जबकि राज्य सभा में बिहार के लिए 16 सीटें निर्धारित हैं, और लोकसभा के विघटन के साथ ही राज्य सभा भी स्वतः विघटित हो जाती है क्योंकि यह उच्च सदन के रूप में संसद का अभिन्न अंग है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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