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BPSC TRE 4.0
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, महाजनपदों तथा प्रारंभिक मौर्य काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अंगारा और समुद्रगुप्त के 'प्रयाग प्रशस्ति' अभिलेख में सीमावर्ती राज्यों और आटविक राज्यों (वन राज्यों) की नीतियों का उल्लेख मिलता है, जिसे हरिषेण द्वारा संस्कृत की चंपू शैली में उत्कीर्ण कराया गया था।
  2. 2. छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों में से 'अश्मक' एकमात्र ऐसा महाजनपद था जो गोदावरी नदी के तट पर दक्षिण भारत में स्थित था, जिसकी राजधानी पोटली या पोतन थी।
  3. 3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार मौर्य प्रशासन में नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था, और प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे जो व्यापार, उद्योग, विदेशी नागरिकों की देखरेख और कर संग्रह जैसे कार्य संभालते थे।
  4. 4. जैन ग्रंथों के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में भद्रबाहु से जैन धर्म की दीक्षा ली थी और कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में संलेखना पद्धति द्वारा अपने प्राण त्यागे थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 'प्रयाग प्रशस्ति' समुद्रगुप्त का अभिलेख है, जिसे उसके महासंधिविग्रहक हरिषेण ने लिखा था, किंतु इसमें 'अंगारा' का संबंध नहीं है बल्कि यह गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त की विजयों का वर्णन करता है। कथन 2 सत्य है; अश्मक महाजनपद गोदावरी घाटी (दक्षिण भारत) में स्थित एकमात्र महाजनपद था। कथन 3 असत्य है क्योंकि मेगास्थनीज के अनुसार नगर प्रशासन की छह समितियाँ थीं, किंतु प्रत्येक समिति में **पाँच नहीं बल्कि छह** सदस्य होते थे (कुल 30 सदस्य)। कथन 4 सत्य है; जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य ने भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोला जाकर संलेखना (संतारा) द्वारा शरीर त्यागा था। इस प्रकार केवल कथन 2 और 4 सही हैं। परीक्षा की विस्तृत तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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