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बिहार के भूगर्भिक इतिहास और चट्टानी तंत्र (Rock Systems) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. धारवाड़ शैलतंत्र (Dharwar Rock System) बिहार के दक्षिण-पूर्वी भाग (विशेषकर मुंगेर, जमुई, नवादा और राजगीर की पहाड़ियों) में पाया जाता है, जो अत्यधिक प्राचीन और रूपांतरित चट्टानों से निर्मित है तथा इसमें क्वार्ट्जाइट, शिस्ट और स्लेट चट्टानें प्रमुख हैं।
  2. 2. विंध्यन शैलतंत्र (Vindhyan Rock System) कैमूर और रोहतास जिलों में सोन नदी के उत्तर में विस्तृत है, जो प्राचीन अवसादी (Sedimentary) चट्टानों का भाग है और यहाँ चूना पत्थर (Limestone), बलुआ पत्थर (Sandstone) तथा सीमेंट ग्रेड के डोलोमाइट के प्रचुर भंडार पाए जाते हैं।
  3. 3. टर्शरी शैलतंत्र (Tertiary Rock System) बिहार के उत्तर-पश्चिमी भाग में हिमालय के उत्थान के परिणामस्वरूप शिवालिक श्रेणी के तटीय क्षेत्रों (विशेषकर पश्चिम चंपारण के सोमेश्वर और दून घाटी क्षेत्र) में विकसित हुआ है।
  4. 4. क्वाटरनरी शैलतंत्र (Quaternary Rock System) अत्यंत प्राचीन आग्नेय चट्टानों से बना है जो दक्षिण बिहार के पठारी इलाकों में लावा के शीतलन से निर्मित हुआ है और इसमें किसी भी प्रकार के जलोढ़ निक्षेप नहीं पाए जाते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

बिहार के भूगर्भिक संरचना के अनुसार, कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। धारवाड़ शैलतंत्र दक्षिण-पूर्वी बिहार में पाया जाता है जो अत्यधिक रूपांतरित चट्टानों से निर्मित है। विंध्यन शैलतंत्र कैमूर और रोहतास में सोन नदी के उत्तर (वास्तव में सोन घाटी के दक्षिण/सोन नदी के किनारे) स्थित है जहाँ चूना पत्थर और बलुआ पत्थर मिलते हैं। टर्शरी शैलतंत्र उत्तर-पश्चिम में पश्चिम चंपारण की सोमेश्वर पहाड़ियों में पाया जाता है। वहीं, कथन 4 असत्य है क्योंकि क्वाटरनरी (चतुष्कल्पीय) शैलतंत्र प्राचीन आग्неय चट्टानों से नहीं, बल्कि गंगा के मैदान के जलोढ़ (Alluvial) निक्षेपों से निर्मित है। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की विस्तृत तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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