BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

BPSC TRE 4.0
19 views

बिहार में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था, नगरपालिकाओं और सहकारी समितियों के संवैधानिक प्रावधानों तथा उनके कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत संविधान में जोड़े गए भाग IX के अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत ग्राम पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा उनके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके लिए ग्यारहवीं अनुसूची में कुल 29 विषयों का उल्लेख किया गया है।
  2. 2. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा शहरी स्थानीय निकायों के लिए जोड़े गए भाग IX-A के तहत नगरपालिकाओं के तीन प्रकार — नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम — का प्रावधान किया गया है, तथा प्रत्येक स्तर पर महिलाओं के लिए न्यूनतम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटों का आरक्षण अनिवार्य किया गया है।
  3. 3. 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा सहकारी समितियों के गठन को एक मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19(1)(c)) बना दिया गया तथा संविधान में भाग IX-B जोड़कर सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, लोकतांत्रिक कामकाज और पेशेवर प्रबंधन को सुनिश्चित किया गया है।
  4. 4. बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2006 के तहत बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने पंचायती राज संस्थाओं और ग्राम पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत (आधा) आरक्षण प्रदान किया, साथ ही त्रिस्तरीय निकायों में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अत्यंत पिछड़ी जातियों (EBC) के लिए भी आबादी के अनुपात में आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायतों को (11वीं अनुसूची में 29 विषय) तथा 74वें संशोधन द्वारा नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया। 97वें संविधान संशोधन (2011) के माध्यम से सहकारी समितियों के गठन के अधिकार को अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत मौलिक अधिकार बनाया गया और भाग IX-B जोड़ा गया। इसके अतिरिक्त, बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2006 के तहत स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाला बिहार देश का अग्रणी राज्य बना। परीक्षा की उत्कृष्ट तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

→ राज्यसभा में सीटों का आवंटन संविधान की किस अनुसूची में है? → बिहार में ब्रिटिश काल के दौरान हुए 'किसान विद्रोह एवं आंदोलन' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्वामी सहजानंद सरस्वती ने वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को जमींदारों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न और बेगारी प्रथा के खिलाफ संगठित करना था। 2. वर्ष 1936 में लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के प्रथम सम्मेलन के अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती चुने गए थे, जबकि इसके महासचिव एन.जी. रंगा को बनाया गया था। 3. बकाश्त आंदोलन (Bakasht Land Movement), जो मुख्य रूप से मुंगेर और गया जैसे जिलों में चलाया गया था, उसका संबंध उन जमीनों से था जिन्हें जमींदारों ने किसानों द्वारा लगान न चुका पाने के कारण बेदखल कर दिया था, और किसान इन जमीनों पर अपनी मालिकाना हक की मांग कर रहे थे। 4. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर महात्मा गांधी बिहार आए थे, और इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य 'तीनकठिया पद्धति' के अंतर्गत किसानों से जबरन नील की खेती कराने और अवैध वसूली के विरुद्ध संघर्ष करना था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किसानों के लिए बिना किसी संपाश्विक (collateral) के दिए जाने वाले ऋण की संशोधित सीमा क्या है? → भारतीय मुद्रा, बैंकिंग प्रणाली तथा केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों (Fiscal Federalism) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अधिनियम, 1934 की धारा 45ZA के तहत केंद्र सरकार द्वारा भारत के केंद्रीय बैंक को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति लक्ष्य को निर्धारित करने की वैधानिक शक्ति दी गई है, जिसे प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार पुनरीक्षित किया जाता है, तथा वर्तमान में लक्ष्य 4% (+/- 2%) निर्धारित है। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत गठित वित्त आयोग (Finance Commission) एक अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के शुद्ध आगमों के वितरण तथा राज्यों को दी जाने वाली सहायता अनुदान (Grants-in-aid) के सिद्धांतों की अनुशंसा करता है, किंतु इसकी अनुशंसाएँ राष्ट्रपति और संसद के लिए केवल संस्तुति प्रकृति की होती हैं, यानी वे बाध्यकारी नहीं होती हैं। 3. 'नकद आरक्षित अनुपात' (CRR) और 'वैधानिक तरलता अनुपात' (SLR) मौद्रिक नीति के मात्रात्मक (Quantitative) उपकरण हैं; जहाँ CRR के अंतर्गत वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल मांग और समय देयताओं (NDTL) का एक निश्चित प्रतिशत भारतीय रिजर्व बैंक के पास नकद रूप में रखना अनिवार्य होता है, वहीं SLR के तहत बैंकों को अपनी NDTL का एक अंश तरल संपत्तियों (जैसे स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों) के रूप में स्वयं अपने पास रखना पड़ता है। 4. केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों के अंतर्गत संविधान के अनुच्छेद 268 से 281 तक प्रावधान किए गए हैं, जिसमें 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (GST) को शामिल करने के लिए अनुच्छेद 246A, 269A और 279A जोड़े गए, जिसके तहत 'वस्तु एवं सेवा कर परिषद' (GST Council) के अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होते हैं और इसके निर्णयों में केंद्र का मतभार (Voting Share) 1/3 तथा सभी राज्यों का कुल मतभार 2/3 होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → चौरी-चौरा की घटना कब घटित हुई?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.