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BPSC TRE 4.0
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बिहार में 20वीं शताब्दी के दौरान हुए प्रमुख किसान आंदोलनों और उनके विशिष्ट संदर्भों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. स्वामी विद्यानंद के नेतृत्व में दरभंगा राज की जातियों के शोषण और बकाश्त जमीन पर अवैध दखल के विरुद्ध 'दरभंगा किसान आंदोलन' चलाया गया था, जिसमें किसानों ने स्थानीय अधिकारियों के दमन के बावजूद अपनी रैयती और बकाश्त भूमि पर अधिकारों की मांग को मुखर किया था।
  2. 2. वर्ष 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान बिहार के सारण, चंपारण, गया और पटना जैसे जिलों में किसानों ने औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध 'चौकीदार कर' (Chaukidari Tax) अदायगी का व्यापक बहिष्कार किया था, जिससे यह राष्ट्रीय आंदोलन ग्रामीण अंचल के किसान संघर्षों के साथ गहराई से जुड़ गया था।
  3. 3. राहुल सांकृत्यायन ने 1940 के दशक के उत्तरार्ध में छपरा (सारण) क्षेत्र के 'अमेठिया किसानों' के संघर्ष का नेतृत्व किया था, तथा उन्होंने अखिल भारतीय किसान सभा के मंच से अलग होकर किसानों की एक सशस्त्र वामपंथी शाखा 'किसान लाल सेना' के गठन में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
  4. 4. वर्ष 1937 में बिहार में श्री कृष्ण सिंह के नेतृत्व में गठित पहली प्रांतीय कांग्रेस सरकार ने किसानों को राहत पहुँचाने के लिए 'बिहार टेनेंसी अमेंडमेंट एक्ट' (Bihar Tenancy Amendment Act) पारित किया, जिसके माध्यम से अवैध बेदखली पर रोक लगाई गई और बकाश्त भूमि पर किसानों के अधिकारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन बिहार के किसान आंदोलनों और राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के ग्रामीण आयामों के संदर्भ में ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सत्य हैं। स्वामी विद्यानंद ने दरभंगा राज में किसानों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी; सविनय अवज्ञा के दौरान चौकीदार कर का बहिष्कार बिहार में व्यापक था; राहुल सांकृत्यायन ने सारण क्षेत्र में अमेठिया किसानों का नेतृत्व किया और किसान लाल सेना से जुड़े रहे; तथा 1937 में श्री कृष्ण सिंह की सरकार द्वारा बिहार टेनेंसी एक्ट में संशोधन कर किसानों को बकाश्त भूमि के मामलों में बड़ी राहत दी गई। परीक्षा से जुड़े अधिक महत्वपूर्ण प्रश्नों और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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