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BPSC TRE 4.0
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बिहार के भूगर्भिक इतिहास और शैलतंत्र (Rock Systems) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बिहार के दक्षिण-पश्चिमी भाग (विशेषकर कैमूर और रोहतास जिलों) में पाई जाने वाली चट्टानें 'विंध्यन क्रम' (Vindhyan System) की हैं, जो मुख्य रूप से परतदार बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और शैले से निर्मित हैं और सीमेंट उद्योग का प्रमुख आधार हैं।
  2. 2. मुंगेर, जमुई, नवादा और गया के दक्षिणी हिस्सों में मिलने वाली प्राचीनतम चट्टानें 'आर्कियन क्रम' (Archaean System) या धारवाड़ क्रम से संबंधित हैं, जो ग्रेनाइट और नीस चट्टानों के रूप में रूपांतरित हो चुकी हैं।
  3. 3. बिहार का उत्तर और उत्तर-पश्चिमी मैदानी भाग मुख्य रूप से नवीनतम 'क्वाटर्नरी' (Quaternary) या जलोढ़ (Alluvial) निक्षेपों से बना है, जिसका निर्माण हिमालय से आने वाली नदियों द्वारा लाई गई गाद के निरंतर जमा होने से हुआ है।
  4. 4. राजमहल की पहाड़ियों (झारखण्ड की सीमा से लगे क्षेत्र) में पाई जाने वाली बेसाल्टिक चट्टानें 'धारवाड़ क्रम' का हिस्सा हैं, जिनका निर्माण ज्वालामुखी के दरारी उद्गार से लावा के बहने और उसके शीतलन के कारण हुआ है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

बिहार के भूगर्भिक इतिहास के अनुसार, कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। बिहार के दक्षिण-पश्चिम में कैमूर और रोहतास में विंध्यन क्रम की चट्टानें पाई जाती हैं जो चूना पत्थर और बलुआ पत्थर के लिए प्रसिद्ध हैं। दक्षिण-पूर्वी और मध्य दक्षिणी जिलों में आर्कियन तथा धारवाड़ क्रम की प्राचीन चट्टानें मिलती हैं। गंगा का मैदानी भाग क्वाटर्नरी (नवीन जलोढ़) निक्षेपों से बना है। हालांकि, कथन 4 असत्य है क्योंकि राजमहल की पहाड़ियों में पाई जाने वाली बेसाल्टिक 'राजमहल ट्रैप' (Rajmahal Trap) चट्टानें जुरासिक/मेसोज़ोइक काल की हैं, न कि धारवाड़ क्रम की। इस तरह के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नों और संपूर्ण तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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