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BPSC TRE 4.0
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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सुभाषचंद्र बोस और आजाद हिंद फौज (INA) की गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सिंगापुर में कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित 'इंडियन नेशनल आर्मी' (INA) के पुनर्गठन के बाद, सुभाषचंद्र बोस ने जुलाई 1943 में सिंगापुर में ही 'अस्थाई स्वतंत्र भारत सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की थी, जिसे धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) द्वारा औपचारिक मान्यता प्रदान की गई थी।
  2. 2. आजाद हिंद फौज की प्रथम ब्रिगेड का नामकरण रानी लक्ष्मीबाई रेजिमेंट के नाम पर किया गया था, जो विश्व की किसी भी आधुनिक सेना में पहली महिला लड़ाकू रेजिमेंटों में से एक थी, तथा इसका नेतृत्व डॉ. लक्ष्मी स्वामीनाथन (लक्ष्मी सहगल) ने किया था।
  3. 3. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर जापान द्वारा अधिकार किए जाने के पश्चात, सुभाषचंद्र बोस के अनुरोध पर इन द्वीपों को 'आजाद हिंद सरकार' को सौंप दिया गया था, जिनका क्रमशः 'शहीद द्वीप' (अंडमान) और 'स्वराज द्वीप' (निकोबार) नामकरण किया गया था।
  4. 4. वर्ष 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात ब्रिटिश सरकार द्वारा लाल किले (Red Fort) में आजाद हिंद फौज के गिरफ्तार अधिकारियों (शाह नवाज खान, गुरदयाल सिंह ढिल्लों और प्रेम सहगल) के खिलाफ मुकदमा चलाया गया, जिसमें कांग्रेस की ओर से गठित बचाव पक्ष के वकीलों के पैनल के मुख्य वकील भूलाभाई देसाई थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। सुभाषचंद्र बोस ने जुलाई 1943 में सिंगापुर पहुँचकर रास बिहारी बोस से INA की बागडोर संभाली थी और 21 अक्टूबर 1943 को 'आर हुकूमत-ए-आजाद हिंद' की घोषणा की थी। महिलाओं की टुकड़ी 'रानी झांसी रेजिमेंट' थी जिसकी कमान डॉ. लक्ष्मी सहगल के हाथ में थी। जापान ने अंडमान और निकोबार द्वीप सुभाष बोस को सौंपे थे जिन्हें क्रमशः शहीद और स्वराज द्वीप नाम दिया गया। लाल किले के ऐतिहासिक मुकदमे में बचाव पक्ष के मुख्य वकील भूलाभाई देसाई थे। इस तरह की उच्च स्तरीय तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पाठ्यक्रम का गहराई से अध्ययन करें।
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