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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त 'मूल अधिकार', 'राज्य के नीतिनिदेशक तत्व' (DPSP) और 'मूल कर्त्तव्य' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मूल अधिकार न्यायोचित (Justiciable) हैं और इनका उल्लंघन होने पर अनुच्छेद 32 एवं अनुच्छेद 226 के तहत क्रमशः उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की शरण ली जा सकती है, जबकि नीतिनिदेशक तत्व न्यायोचित नहीं हैं, किंतु देश के शासन में ये मूलभूत हैं और कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
  2. 2. स्वर्ण सिंह समिति (1976) की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान के भाग IV-A में अनुच्छेद 51A जोड़कर मूल कर्तव्यों को शामिल किया गया था, जिनमें प्रारंभ में 10 मूल कर्तव्य थे, और वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा इसमें 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करने से संबंधित 11वां मूल कर्तव्य जोड़ा गया।
  3. 3. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार में 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, किंतु नीतिनिदेशक तत्वों के अंतर्गत आने वाले 'समान नागरिक संहिता' (UCC - अनुच्छेद 44) को अभी तक देश में पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है क्योंकि यह राज्य की नीति पर निर्भर करता है और इसके गैर-कार्यान्वयन के लिए न्यायालय द्वारा राज्य को बाध्य नहीं किया जा सकता है।
  4. 4. मूल कर्तव्यों का पालन करना प्रत्येक नागरिक के लिए विधिक रूप से बाध्यकारी है, और यदि कोई नागरिक किसी मूल कर्तव्य का उल्लंघन करता है, तो संसद द्वारा बनाए गए किसी विशेष कानून के तहत उसे सीधे संविधान के अनुच्छेद 51A के अंतर्गत दंडित करने का प्रावधान किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। मूल अधिकार न्यायोचित (Justiciable) हैं, जबकि नीतिनिदेशक तत्व न्यायोचित नहीं हैं, हालांकि देश के शासन में वे मौलिक हैं। 42वें संविधान संशोधन (1976) द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 10 मूल कर्तव्य जोड़े गए थे, और 86वें संशोधन (2002) द्वारा 11वां कर्तव्य जोड़ा गया। 'निजता का अधिकार' अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है और अनुच्छेद 44 (UCC) एक नीतिनिदेशक तत्व है। कथन 4 असत्य है क्योंकि मूल कर्तव्य प्रकृति से 'गैर-न्यायोचित' (Non-justiciable) हैं और संविधान में सीधे अनुच्छेद 51A के तहत इनके उल्लंघन पर किसी दंड का प्रावधान नहीं है, जब तक कि इसके लिए संसद द्वारा कोई अलग आपराधिक कानून न बनाया गया हो। अधिक तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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