त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
16 views
केप्लर के ग्रहों की गति के नियमों और गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. केप्लर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस बात का संकेत देता है कि सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करते हुए ग्रह का कोणीय संवेग (Angular Momentum) संरक्षित रहता है, क्योंकि केंद्रीय बलों के अधीन गति में क्षेत्रीय वेग ($dA/dt$) अचर होता है।
- 2. न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के सार्वत्रिक नियम के अनुसार, किन्हीं दो पिंडों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल माध्यम की प्रकृति पर निर्भर करता है, और यदि दोनों पिंडों को पानी के भीतर रख दिया जाए, तो उनके बीच का आकर्षण बल शून्य हो जाता है।
- 3. पृथ्वी की सतह से अनंत दूरी तक किसी पिंड को भेजने के लिए आवश्यक 'पलायन वेग' (Escape Velocity) उस पिंड के द्रव्यमान और प्रक्षेपण कोण पर निर्भर करता है, तथा अधिक द्रव्यमान वाले पिंड के लिए पलायन वेग का मान अधिक होता है।
- 4. यदि पृथ्वी अपने वर्तमान कोणीय वेग से 17 गुना अधिक वेग से घूमने लगे, तो भूमध्य रेखा (Equator) पर रखी वस्तुओं का आभासी भार शून्य हो जाएगा और वहाँ की वस्तुएँ भारहीनता का अनुभव करेंगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि केप्लर का द्वितीय नियम केंद्रीय बल (गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत कार्य करता है, जहाँ केंद्रीय बल के अधीन कोणीय संवेग हमेशा संरक्षित रहता है और क्षेत्रीय वेग ($dA/dt = L/2m$) अचर होता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण का नियम माध्यम पर निर्भर नहीं करता है; यह किन्हीं दो पिंडों के बीच उनके बीच के माध्यम से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि पलायन वेग ($v_e = \sqrt{2gR}$) का सूत्र पिंड के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता है, यह केवल ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करता है। कथन 4 सत्य है क्योंकि भूमध्य रेखा पर आभासी गुरुत्वीय त्वरण $g' = g - R\omega^2$ होता है, और जब कोणीय वेग $\omega$ का मान $\sqrt{g/R}$ के बराबर या उससे 17 गुना अधिक हो जाता है, तो $g'$ का मान शून्य हो जाता है, जिससे वस्तुएं भारहीनता महसूस करती हैं। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
रॉलेट एक्ट (1919), खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1919 में पारित रॉलेट एक्ट (अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम) के विरोध में महात्मा गांधी ने 'रॉलेट सत्याभास' की शुरुआत की और 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया, जिसे 'बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील' का कानून कहा गया।
2. वर्ष 1919 के अंत में अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में महात्मा गांधी को चुना गया था, क्योंकि वे खिलाफत के मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम एकता के एक स्वर्णिम अवसर के रूप में देख रहे थे।
3. 1 अगस्त 1920 को असहयोग आंदोलन की औपचारिक शुरुआत के दिन ही लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का निधन हो गया, और उनके स्मरणार्थ स्थापित 'तिलक स्वराज फंड' में मात्र कुछ महीनों में एक करोड़ से अधिक रुपये जमा किए गए।
4. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की हिंसा से आहत होकर महात्मा गांधी ने बारडोली में कांग्रेस की बैठक बुलाई और 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया, जिसके बाद मोतीलाल नेहरू और चित्तरंजन दास ने कांग्रेस के भीतर ही 'स्वराज पार्टी' का गठन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
आनुवंशिकी तथा विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रेगर जॉन मैंडेल ने मटर के पौधे (पाइसम सैटिवुम) पर अपने संकरण प्रयोगों के दौरान सात विपरीत लक्षणों का चयन किया था, और उनके द्वारा प्रतिपादित 'स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम' (Law of Independent Assortment) इस बात पर आधारित है कि जब दो या दो से अधिक विपरीत लक्षणों के जोड़ों को एक साथ क्रॉस कराया जाता है, तो एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण की वंशागति से पूरी तरह स्वतंत्र होती है।
2. हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था (Hardy-Weinberg Equilibrium) के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संगमित होने वाली आबादी में एलील (Allele) आवृत्तियाँ पीढ़ियों दर पीढ़ियों स्थिर बनी रहती हैं, बशर्ते कि उस आबादी पर उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवाह और आनुवंशिक विचलन (Genetic Drift) जैसी विकासीय शक्तियाँ प्रभावी न हों।
3. लामार्कवाद (Lamarckism) के 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' (Inheritance of Acquired Characters) के सिद्धांत का खंडन करने के लिए जर्मन जीववैज्ञानिक ऑगस्ट वीजमैन ने चूहों की पूंछ काटकर उन पर प्रयोग किया था, जिसके आधार पर उन्होंने 'जननद्रव्य की निरंतरता का सिद्धांत' (Theory of Germplasm) प्रतिपादित किया।
4. मिलर और उरे (Miller and Urey) के प्रसिद्ध प्रयोग ने ओपेरिन और हाल्डेन के रासायनिक विकास के सिद्धांत को प्रायोगिक रूप से सिद्ध किया, जिसके तहत उन्होंने अमोनिया, मीथेन, हाइड्रोजन और जलवाष्प के नियंत्रित मिश्रण पर विद्युत चिंगारी प्रवाहित करके प्रयोगशाला में जटिल न्यूक्लिक एसिड का प्रत्यक्ष रूप से निर्माण किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
महासागरीय गर्तों (Oceanic Trenches) और जलसंधियों (Straits) की भौगोलिक स्थिति तथा विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मरियाना गर्त (Mariana Trench), जो विश्व का सबसे गहरा महासागरीय गर्त है, प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग में फिलीपींस द्वीप समूह के पूर्व में स्थित है और इसमें पृथ्वी का सबसे गहरा बिंदु 'चैलेंजर डीप' (Challenger Deep) अवस्थित है।
2. सुंडा गर्त (Sunda Trench), जिसे जावा गर्त भी कहा जाता है, हिंद महासागर का एकमात्र प्रमुख गर्त है, जो सुमात्रा और जावा द्वीपों के दक्षिण-पश्चिम में इंडो-ऑस्ट्रेलियन प्लेट के सबडक्शन के कारण निर्मित हुआ है।
3. मलक्का जलसंधि (Strait of Malacca) मलय प्रायद्वीप और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बीच स्थित है, जो प्रशांत महासागर को हिंद महासागर (अंडमान सागर से दक्षिण चीन सागर) से जोड़ती है और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार की दृष्टि से अत्यधिक सामरिक महत्व रखती है।
4. बेरिंग जलसंधि (Bering Strait) उत्तरी अमेरिका महाद्वीप के अलास्का को एशिया के साइबेरिया से अलग करती है और यह प्रशांत महासागर के बेरिंग सागर को अटलांटिक महासागर के आर्कटिक महासागर (चुकची सागर) से जोड़ती है, तथा इसी जलसंधि से अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा गुजरती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान भारत में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण (सुधार आंदोलनों) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और 'ब्रह्म समाज' (1828) का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा का विरोध करना, एकेश्वरवाद का प्रचार करना और हिंदू समाज में व्याप्त कुप्रथाओं जैसे सती प्रथा का उन्मूलन करना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' (1875) ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और पाश्चात्य संस्कृति के पूर्ण अनुकरण पर बल देते हुए प्राचीन वैदिक अनुष्ठानों और मूर्तिपूजा की अनिवार्यता का समर्थन किया।
3. ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व से मुक्त कराना तथा उनके सामाजिक, शैक्षणिक और मानवाधिकारों की रक्षा करना था।
4. ईश्वरचंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष 1856 में लॉर्ड डलहौजी के शासनकाल में 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित किया गया, जिसने विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी वैधता प्रदान की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
→
बिहार के किस वकील ने असहयोग आंदोलन के समय अपनी लाभप्रद वकालत छोड़ दी थी?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.