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BPSC TRE 4.0
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, महाजनपद काल और मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अंगार निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध एवं जैन ग्रंथ प्राचीन भारत के 'षोडश महाजनपदों' की व्यवस्थित सूची प्रदान करते हैं, जिनमें मगध के अतिरिक्त वज्जि संघ को एक गणतंत्रात्मक व्यवस्था के रूप में उल्लेखित किया गया है।
- 2. मौर्यकाल में 'अध्यक्ष' नामक अधिकारी विभिन्न विभागों के प्रमुख होते थे, जैसे कि 'सुवर्णध्यक्ष' स्वर्ण और टकसाल का अधिकारी था, तथा 'पण्यध्यक्ष' वाणिज्य और व्यापार पर नियंत्रण रखता था।
- 3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार मौर्य प्रशासन में कृषि और भूमि माप के लिए 'नोमोनोई' (Nomonomoi) नामक अधिकारियों का उल्लेख मिलता है, जो सिंचाई व्यवस्था और भू-राजस्व संग्रह का कार्य करते थे।
- 4. संगम काल के प्राचीन तमिल साहित्य (जैसे एट्टुतोगै और पाट्टुपाट्टू) में उरैयूर और मुसिरी जैसे बंदरगाहों का उल्लेख मिलता है, जो रोमन साम्राज्य के साथ होने वाले अत्यधिक लाभदायक मलमल, मसाले और मोती के व्यापार के प्रमुख केंद्र थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपर्युक्त कथनों में कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं, जबकि कथन 3 आंशिक रूप से भ्रामक है। मेगास्थनीज की 'इंडिका' में नगर प्रशासन के अधिकारियों को 'एस्ट्रोनोमी' (Astynomoi) कहा गया है, जबकि कृषि और भूमि माप से जुड़े अधिकारियों को 'एग्रोनोमी' (Agronomoi) कहा गया है। बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में 16 महाजनपदों का स्पष्ट वर्णन मिलता है। मौर्यकाल में विभिन्न विभागों के अध्यक्षों का विवरण कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में मिलता है। संगम काल के साहित्य में व्यापार और बंदरगाहों (जैसे मुसिरी और उरैयूर) का विस्तृत उल्लेख है। अधिक अभ्यास के लिए हमारी बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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भगत सिंह ने असेंबली में बम कब फेंका था?
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मानव प्रजातियों (Human Races) के वर्गीकरण, उनके भौगोलिक वितरण तथा शारीरिक लक्षणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रिफ़िथ टेलर (Griffith Taylor) के 'प्रवास-कटीबंध सिद्धांत' (Migration-Zone Theory) के अनुसार, मानव प्रजातियों का उद्गम मध्य एशिया क्षेत्र में हुआ था, और जलवायु परिवर्तनों के कारण जो प्रजातियाँ सबसे पहले उत्पन्न हुईं, वे विस्थापन के कारण सबसे बाहरी और सीमांत क्षेत्रों (जैसे ऑस्ट्रेलिया के आदिवासियों या टसमानियाई लोगों) में धकेल दी गईं।
2. 'काकेशॉइड' (Caucasoid) प्रजाति के शारीरिक लक्षणों में आमतौर पर तीक्ष्ण और पतली नाक, सीधी या लहरदार बाल संरचना, और हल्के से मध्यम रंग की त्वचा शामिल होती है, तथा इस प्रजाति का प्राचीन विस्तार मुख्य रूप से यूरोप, मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका और भारतीय उपमहाद्वीप तक पाया जाता है।
3. 'मंगोलॉइड' (Mongoloid) प्रजाति के लोगों की एक प्रमुख शारीरिक पहचान उनकी आँखों पर 'एपिकैंथिक फोल्ड' (Epicanthic fold) का पाया जाना है, जिसके कारण उनकी आँखें तिरछी या मुड़ी हुई प्रतीत होती हैं, और यह विशेषता अत्यधिक ठंडी जलवायु और बर्फीले क्षेत्रों में सुरक्षात्मक अनुकूलन के रूप में विकसित हुई है।
4. मानव प्रजातियों के वैज्ञानिक वर्गीकरण में त्वचा का रंग (Skin Color) और बालों की बनावट को सबसे स्थिर और अपरिवर्तनीय आनुवंशिक आधार माना जाता है, क्योंकि ये पर्यावरणीय दशाओं या जलवायु से कभी भी प्रभावित नहीं होते हैं तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूर्णतः एकसमान बने रहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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ट्रिवार्था के अनुसार भारत की जलवायु किस प्रकार की है?
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निम्नलिखित में से कौन-सा जंगल/झाड़ी दावाग्नल भूमध्य सागरीय जलवायु के प्रकार का नहीं है?
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अभिकथन (A): भूमध्य रेखा के निकट उष्णकटिबंधीय चक्रवात विकसित नहीं होते। कारण (R): उष्णकटिबंधीय चक्रवात की ऊर्जा गुप्त ऊष्मा द्वारा संचालित होती है।
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