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BPSC TRE 4.0
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बिहार में 1970 के दशक के उत्तरार्ध में हुए ऐतिहासिक 'जेपी आंदोलन' (छात्र आंदोलन) और उसके वैचारिक व राजनीतिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस आंदोलन की शुरुआत मार्च 1974 में गुजरात के छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार के विरोध में हुई थी, जिसे बाद में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने बिहार तक विस्तारित किया और 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया।
- 2. जयप्रकाश नारायण द्वारा प्रतिपादित 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) के वैचारिक ढांचे में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और नैतिक — कुल सात क्रांतियाँ शामिल थीं, जिनका मुख्य उद्देश्य व्यवस्था परिवर्तन और जन-केन्द्रित लोकतंत्र की स्थापना करना था।
- 3. यह आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक और शांतिपूर्ण था, तथा इसके दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने तुरंत त्यागपत्र दे दिया था, जिसके परिणामस्वरुप आपातकाल की घोषणा कभी नहीं की गई।
- 4. जेपी आंदोलन के गर्भ से ही भारतीय राजनीति में समाजवादी और जनता पार्टी विचारधारा के अनेक प्रमुख युवा नेता उभरे, जिन्होंने आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति को दीर्घकालिक रूप से प्रभावित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बिहार में 1974 का छात्र आंदोलन और जेपी (जयप्रकाश नारायण) आंदोलन भारतीय राजनीति का एक टर्निंग पॉइंट था। इस आंदोलन की शुरुआत मूल रूप से मार्च 1974 में बिहार के छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के विरोध में हुई थी (न कि गुजरात से, हालांकि गुजरात का नवनिर्माण आंदोलन इसके समकालीन जरूर था)। जयप्रकाश नारायण ने इस छात्र आंदोलन का नेतृत्व इस शर्त पर स्वीकार किया था कि आंदोलन पूरी तरह अहिंसक रहेगा। 'संपूर्ण क्रांति' के तहत उन्होंने सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, वैचारिक, शैक्षिक और नैतिक — कुल सात क्रांतियों का आह्वान किया था। इस आंदोलन के भारी विरोध और दबाव के चलते ही तत्कालीन सरकार ने 25 जून 1975 को देश में राष्ट्रीय आपातकाल (Emergency) की घोषणा की थी, अतः कथन 3 गलत है। इस आंदोलन से लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी जैसे कई दिग्गज नेता उभरे। अधिक अभ्यास और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार के जनजातीय आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संथाल विद्रोह (1855-56), जिसे 'हुंड़ विद्रोह' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से दमनकारी जमींदारों, महाजनों और ब्रिटिश अधिकारियों के विरुद्ध भागलपुर से राजमहल तक के 'दामिन-ए-कोह' क्षेत्र में आयोजित किया गया था, जिसका नेतृत्व सिदो, कान्हू, चांद और भैरव ने किया था।
2. बिरसा मुंडा द्वारा संचालित 'उलगुलान' (महान हलचल) आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मुंडा राज की स्थापना करना और 'खुटकट्टी' (सामूहिक भूमि व्यवस्था) प्रथा को पुनःस्थापित करना था, तथा इस आंदोलन के दौरान सिंहबोंगा (सूर्य देवता) की आराधना पर बल दिया गया था।
3. ताना भगत आंदोलन (1914), जिसकी शुरुआत जत्रा भगत के नेतृत्व में छोटा नागपुर क्षेत्र में हुई थी, एक अहिंसक और सुधारवादी आंदोलन था, जिसमें आदिवासी किसानों ने ब्रिटिश सरकार को कर (लगान) देने से इनकार कर दिया था और वे आगे चलकर महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में भी शामिल हुए थे।
4. खरवार आंदोलन (1874), जिसका नेतृत्व भागीरथ मांझी ने किया था, मुख्य रूप से एक सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन था, जिसमें संन्यासियों के प्रभाव के कारण ब्रिटिश शासन के प्रति पूर्ण निष्ठा व्यक्त की गई थी और करों का भुगतान अनिवार्य रूप से करने की वकालत की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय प्रेस के इतिहास और स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान प्रकाशित समाचार पत्रों तथा पुस्तकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जेम्स अगस्टस हिक्की द्वारा वर्ष 1780 में प्रकाशित 'द बंगाल गजेट' (The Bengal Gazette) भारत का पहला समाचार पत्र था, जिसे ब्रिटिश सरकार की नीतियों की आलोचना करने के कारण अंततः जब्त कर लिया गया था।
2. राजा राममोहन राय ने फारसी भाषा में 'मिरात-उल-अखबार' और बंगाली भाषा में 'संवाद कौमुदी' का प्रकाशन किया था, जिसके माध्यम से उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनचेतना जागृत की और प्रेस की स्वतंत्रता की वकालत की।
3. बाल गंगाधर तिलक ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अपने राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार के लिए मराठा भाषा में 'केसरी' और अंग्रेजी भाषा में 'मराठा' समाचार पत्र का प्रकाशन और संपादन किया था।
4. महात्मा गांधी द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक 'हिंद स्वराज' (1909) का प्रकाशन सर्वप्रथम 'यंग इंडिया' पत्रिका में धारावाहिक रूप से किया गया था, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश संसदीय प्रणाली और आधुनिक सभ्यता की घोर निंदा की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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महासागरीय जलधाराओं और उनकी गतिकी को प्रभावित करने वाले कारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) की उत्पत्ति और उनकी दिशा मुख्य रूप से पृथ्वी के घूर्णन, कोरियोलिस बल, वायुदाब और पवन तंत्र (विशेषकर प्रचलित पवनें), महासागरीय जल के तापमान तथा लवणता में भिन्नता के कारण उत्पन्न घनत्व प्रवणता द्वारा निर्धारित होती है।
2. उत्तरी गोलार्ध में महासागरीय जलधाराएँ कोरियोलिस बल के प्रभाव से अपनी गति की दिशा के दाईं ओर (घड़ी की सुई की दिशा में या क्लॉकवाइज) तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर (घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में या एंटी-क्लॉकवाइज) विक्षेपित हो जाती हैं।
3. गल्फ स्ट्रीम (Gulf Stream) एक ठंडी जलधारा है जो उत्तरी अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होती है और फ्लोरिडा के तट से होते हुए यूरोप के पश्चिमी तट पर अत्यधिक ठंड और बर्फबारी का मुख्य कारण बनती है, जिससे वहाँ के बंदरगाह वर्षभर जमे रहते हैं।
4. पेरू या हम्बोल्ट जलधारा (Peru Current) प्रशांत महासागर की एक ठंडी जलधारा है, जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर दिशा में प्रवाहित होती है और इस धारा के प्रभाव से अटका मरुस्थल का निर्माण होता है, साथ ही यह 'अल नीनो' (El Nino) घटना के दौरान कमजोर या बाधित हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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कार्बनिक रसायन (Organic Chemistry) के अंतर्गत समावयवता (Isomerism) तथा क्रियात्मक समूहों की रासायनिक प्रतिक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समवयवी (Isomers) वे यौगिक होते हैं जिनके आणविक सूत्र (Molecular Formula) समान होते हैं, परंतु उनके भौतिक या रासायनिक गुण भिन्न होते हैं क्योंकि उनकी संरचनात्मक व्यवस्था या त्रिविम विन्यास (Spatial Arrangement) अलग-अलग होता है।
2. 'शृंखला समावयवता' (Chain Isomerism) उस स्थिति में उत्पन्न होती है जब यौगिकों के आणविक सूत्र समान होते हैं लेकिन कार्बन श्रृंखला की मुख्य शाखा या कंकाल (Carbon Skeleton) की संरचना भिन्न होती है, जैसे ब्यूटेन और आइसोब्यूटेन।
3. ज्यामितीय समावयवता (Geometrical Isomerism), जो कि त्रिविम समावयवता का एक प्रकार है, मुख्य रूप से कार्बन-कार्बन एकल बंध (Single Bond) वाले यौगिकों में पाई जाती है क्योंकि एकल बंध के परितः मुक्त घوران (Free Rotation) पूरी तरह से प्रतिबंधित होता है।
4. ऐल्कोहॉल और ईथर एक-दूसरे के 'क्रियात्मक समूह समावयवी' (Functional Group Isomers) का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, क्योंकि दोनों का सामान्य आणविक सूत्र समान हो सकता है लेकिन उनके क्रियात्मक समूह क्रमशः हाइड्रॉक्सिल (-OH) और ईथर (-O-) भिन्न होते हैं।
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मुस्लिम लीग की स्थापना और होमरोल लीग आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1906 में ढाका के नवाब सलीमुल्लाह के नेतृत्व में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना की गई थी, और इसके पहले नियमित अध्यक्ष आगा खान थे, जिन्होंने ब्रिटिश सरकार के समक्ष मुसलमानों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग का समर्थन किया था।
2. भारत में होमरोल लीग आंदोलन की शुरुआत बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 में की थी, जिसका कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र (बॉम्बे को छोड़कर), मध्य प्रांत, बरार और कर्नाटक तक सीमित था।
3. एनी बेसेंट ने सितंबर 1916 में मद्रास (अडyar) में अपनी होमरोल लीग की स्थापना की, जिसके मुख्य सचिव जॉर्ज अरुंडेल थे, और इस आंदोलन ने देश में 'स्वशासन' की मांग को एक जन आंदोलन का रूप दिया।
4. लखनऊ पैक्ट (1916) के तहत कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुए समझौते में कांग्रेस ने पहली बार मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडलों की मांग को सैद्धांतिक रूप से स्वीकार किया था, जिसकी कांग्रेस के भीतर कभी कोई आलोचना नहीं हुई थी।
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