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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के 73वें, 74वें और 97वें संविधान संशोधनों द्वारा स्थापित त्रि-स्तरीय स्थानीय स्वशासन (पंचायतों, नगरपालिकाओं और सहकारी समितियों) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के अनुच्छेद 243-H के अंतर्गत राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा पंचायतों को कुछ कर, शुल्क, टोल और फीस आरोपित करने, एकत्र करने तथा विनियमित करने की शक्ति प्रदान कर सकता है, साथ ही राज्य की संचित निधि से पंचायतों को अनुदान-सहायता दिए जाने का प्रावधान भी कर सकता है।
  2. 2. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य में जिला स्तर पर एक 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की योजनाओं को समेकित करके जिले के लिए विकास योजना का प्रारूप तैयार करती है।
  3. 3. 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत 'सहकारी समितियां बनाने का अधिकार' को एक मूल अधिकार का दर्जा दिया गया, तथा संविधान के भाग IX-B में अनुच्छेद 243-ZH के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया कि किसी भी सहकारी समिति के निदेशक बोर्ड में अधिकतम सदस्यों की संख्या 25 से अधिक नहीं होगी।
  4. 4. 73वें संविधान संशोधन के अनुसार पंचायतों के कार्यकाल (5 वर्ष) के पूर्व विघटन की स्थिति में यदि नए चुनाव कराए जाते हैं, तो नया निर्वाचित पंचायत निकाय शेष बची हुई पूरी 5 वर्ष की अवधि के लिए कार्य करेगा, बशर्ते विघटन के बाद शेष कार्यकाल छह महीने से कम का न हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सत्य है क्योंकि 73वें संविधान संशोधन के अनुच्छेद 243-H के अनुसार राज्य का विधानमंडल पंचायतों को कर, शुल्क आदि वसूलने की शक्ति दे सकता है और राज्य की संचित निधि से सहायता अनुदान दे सकता है। कथन 2 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 243-ZD के तहत प्रत्येक जिले में जिला योजना समिति का गठन किया जाता है जो पंचायत और नगरपालिकाओं की विकास योजनाओं को समेकित करती है। कथन 3 असत्य है क्योंकि 97वें संशोधन के तहत सहकारी समिति के निदेशक बोर्ड में अधिकतम सदस्यों की संख्या 21 (इक्कीस) निर्धारित की गई है, न कि 25। कथन 4 असत्य है क्योंकि मध्यावधि विघटन के बाद गठित नई पंचायत केवल 'शेष बचे हुए कार्यकाल' के लिए ही कार्य करती है, न कि पूरे 5 वर्ष के लिए; इसके अतिरिक्त यदि शेष कार्यकाल छह महीने से कम का हो, तो चुनाव कराना आवश्यक नहीं होता। इस प्रकार के उच्चस्तरीय प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल का नियमित अध्ययन करें।
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