त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने, प्रशासनिक पारदर्शिता लाने और सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक सुगमता से पहुँचाने के लिए विभिन्न डिजिटल पहलों और पोर्टलों की शुरुआत की गई है। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'बिहार भूमि' (Bihar Bhumi) पोर्टल के माध्यम से राज्य के नागरिक अपनी जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation), भू-लगान (Lagan) भुगतान और अपनी भूमि के रिकॉर्ड (RTC) ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं, जिसे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा संचालित किया जाता है।
- 2. 'ई-निश्चय' (e-Nischay) पोर्टल का मुख्य उद्देश्य राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में 'हर घर नल का जल' और 'गली-नाही पक्कीकरण' योजनाओं की निगरानी करना और उनके रख-रखाव की शिकायतों का त्वरित समाधान करना है।
- 3. शिक्षा विभाग के अंतर्गत लॉन्च किया गया 'ई-शिक्षाकोष' (e-Shikshakosh) पोर्टल राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की डिजिटल उपस्थिति दर्ज करने, उनके शैक्षणिक मूल्यांकन तथा विद्यालयों के सुचारू संचालन की मॉनिटरिंग के लिए उपयोग किया जाता है।
- 4. 'बिहारी पोर्टल' (Bihari Portal) को विशेष रूप से राज्य के सभी जिलों में आपदा प्रबंधन और बाढ़ के दौरान राहत शिविरों की वास्तविक समय (Real-time) स्थिति की निगरानी के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा विकसित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 3 पूरी तरह से सत्य हैं। बिहार सरकार ने प्रशासनिक सेवाओं को पारदर्शी और जनता के अनुकूल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पोर्टल शुरू किए हैं। 'बिहार भूमि' पोर्टल जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड और दाखिल-खारिज के लिए है, 'ई-निश्चय' पोर्टल सात निश्चय योजना की निगरानी करता है, तथा 'ई-शिक्षाकोष' पोर्टल शिक्षा प्रणाली की डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए है। वहीं, कथन 4 में वर्णित 'बिहारी पोर्टल' जैसी कोई आधिकारिक नोडल व्यवस्था इस नाम से आपदा प्रबंधन के लिए नहीं है, इसलिए कथन 4 असत्य है। इस प्रकार की उच्च-स्तरीय परीक्षाओं के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के तहत इस तरह के समसामयिक और डिजिटल प्रशासनिक सुधारों का गहराई से अध्ययन करना आवश्यक है।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ और उसके राज्यक्षेत्र (भाग-I, अनुच्छेद 1-4) तथा राज्यों के पुनर्गठन की संवैधानिक अवस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी भी राज्य के क्षेत्रफल में वृद्धि करने, घटाने, उसकी सीमा या नाम में परिवर्तन करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु इस प्रकार का कोई भी अध्यादेश या विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व संस्तुति के बाद ही संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है, और ऐसा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजे जाने पर राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त किया गया मत संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
2. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 2 संसद को विधि द्वारा 'संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना' करने की शक्ति प्रदान करता है, जो मुख्य रूप से उन क्षेत्रों पर लागू होती है जो भारतीय संघ के अंग नहीं हैं (अर्थात विदेशी क्षेत्रों का अधिग्रहण या प्रवेश)।
3. वर्ष 1960 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबारी यूनियन मामले' (Berubari Union case) में दिए गए परामर्श के अनुसार, भारतीय संघ द्वारा किसी भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने (Cession of territory to a foreign country) के लिए अनुच्छेद 3 के तहत साधारण बहुमत से केवल विधायी कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए संविधान संशोधन (आमतौर पर अनुच्छेद 368 के अंतर्गत) करना अनिवार्य है।
4. भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की संस्तुति करने के लिए गठित फज़ल अली आयोग (राज्य पुनर्गठन आयोग, 1953) ने अपनी रिपोर्ट में 'भाषा और संस्कृति की एकरूपता' को ही देश के प्रशासनिक पुनर्गठन का एकमात्र और सर्वोपरि आधार माना था, तथा बहु-राज्यीय प्रशासनिक इकाइयों के गठन की अवधारणा को पूरी तरह खारिज कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुए विभिन्न आंदोलनों, किसान सभाओं और प्रमुख नेताओं के योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा किसानों पर किए जा रहे अत्याचारों और बेगार प्रथा के खिलाफ आवाज उठाना था, तथा आगे चलकर इसी संगठन ने अखिल भारतीय स्तर पर किसानों को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. वर्ष 1920-22 के असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई थी, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपनी सेवाएँ दी थीं, और इसी काल में सदाकत आश्रम से 'द मदरलैंड' (The Motherland) नामक राष्ट्रवादी अखबार का प्रकाशन मजहरुल हक के संपादन में शुरू हुआ था।
3. वर्ष 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान बिहार के छपरा (सारण) जिले में कैदियों द्वारा विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने की मांग को लेकर 'नंगी हड़ताल' (Naked Strike) की गई थी, जो प्रशासनिक दमन के बावजूद काफी चर्चा में रही थी।
4. वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान जयप्रकाश नारायण हजारीबाग सेंट्रल जेल की दीवार फांदकर भागने में सफल रहे थे, जिसके बाद उन्होंने नेपाल की तराई में 'आज़ाद दस्ता' (Azad Dasta) का गठन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य भूमिगत रहकर ब्रिटिश सरकार के खिलाफ तोड़फोड़ और गुरिल्ला युद्ध की गतिविधियों को अंजाम देना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी) की संपूर्ण क्रांति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन की शुरुआत मूल रूप से छात्रों द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' के गठन के साथ हुई थी।
2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए दो मुख्य शर्तें रखी थीं—पहला यह कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और दूसरा यह कि इसका प्रभाव केवल बिहार राज्य तक ही सीमित रहेगा, राष्ट्रीय राजनीति में इसका कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
3. गांधी मैदान, पटना में 5 जून 1974 को ऐतिहासिक जनसभा के दौरान जयप्रकाश नारायण ने सत्ता परिवर्तन और व्यवस्था परिवर्तन के लिए 'सम्पूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का आह्वान किया था, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बदलाव शामिल थे।
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