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BPSC TRE 4.0
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, साहित्यिक कृतियों और पुरातात्विक साक्ष्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कौटिल्य का 'अर्थशास्त्र' केवल राजनीति और शासनकला पर आधारित एक ग्रंथ है, जिसमें मौर्यकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, गुप्तचर तंत्र और कर प्रणाली का विस्तृत विवरण मिलता है, किंतु इसमें आर्थिक और सामाजिक जीवन का कोई उल्लेख नहीं है।
  2. 2. विशाखदत्त द्वारा रचित 'मुद्राराक्षस' एक ऐतिहासिक नाटक है, जिससे नंद वंश के पतन और चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा चाणक्य की सहायता से मौर्य साम्राज्य की स्थापना के षड्यंत्रों की जानकारी प्राप्त होती है।
  3. 3. बानभट्ट की 'हर्षचरित' संस्कृत गद्य साहित्य का एक उत्कृष्ट ऐतिहासिक ग्रंथ है, जिसमें सम्राट हर्षवर्धन की वंशावली, उनकी विजयों और तत्कालीन सामाजिक-धार्मिक परिस्थितियों का सजीव चित्रण किया गया है।
  4. 4. संगम साहित्य (जो दक्षिण भारत के प्राचीन इतिहास का प्रमुख स्रोत है) मुख्य रूप से तमिल भाषा में रचित कविताओं का संकलन है, जो चोल, चेर और पांड्य राजवंशों के राजनीतिक इतिहास, व्यापार तथा समाज पर प्रकाश डालता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में केवल राजनीति और प्रशासन ही नहीं, बल्कि उस काल के सामाजिक जीवन, आर्थिक नियमों, कृषि, व्यापार, उद्योग और कानूनी व्यवस्था का भी अत्यंत विस्तृत विवरण मिलता है। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। विशाखदत्त का 'मुद्राराक्षस' नंद-मौर्य राजनीतिक परिवर्तन को दर्शाता है, बानभट्ट का 'हर्षचरित' हर्षवर्धन के काल का प्रामाणिक विवरण देता है, और संगम साहित्य दक्षिण भारत के प्राचीन चोल, चेर एवं पांड्य राजवंशों के इतिहास का मुख्य साहित्यिक स्रोत है। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा की तैयारी के लिए प्राचीन इतिहास के साहित्यिक और पुरातात्विक स्रोतों का अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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