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BPSC TRE 4.0
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भारतीय राजव्यवस्था और इसके विविध प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की आरंभिक (Original) अधिकारिता केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच अथवा दो या अधिक राज्यों के बीच के कानूनी विवादों के निपटारे से संबंधित है, जिसमें संसद द्वारा बनाए गए किसी अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम के तहत आने वाले जल विवाद भी शामिल होते हैं।
  2. 2. नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) का पद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के अंतर्गत सृजित किया गया है, और CAG द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले तीनों लेखा परीक्षण प्रतिवेदनों (विनियोग लेखा, वित्त लेखा और सार्वजनिक उपक्रमों से संबंधित प्रतिवेदन) की जांच संसद की 'लोक लेखा समिति' (Public Accounts Committee) द्वारा की जाती है।
  3. 3. अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के समय संविधान का अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित हो जाता है, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में निलंबित नहीं किया जा सकता है, तथा राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संसद राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बना सकती है।
  4. 4. भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) को संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त किया जाता है, जो देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, और उसे संसद के दोनों सदनों की बैठकों में भाग लेने, बोलने तथा उसकी कार्यवाहियों में संयुक्त बैठक के दौरान भी मतदान देने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता में अंतर-राज्यीय जल विवाद शामिल **नहीं** होते हैं; अनुच्छेद 262 के तहत संसद विधि द्वारा ऐसे जल विवादों के न्यायनिर्णयन के लिए अलग से अधिकरण (Tribunal) का गठन करती है, जो उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं। कथन 2 सत्य है क्योंकि CAG के प्रतिवेदनों की जांच लोक लेखा समिति करती है। कथन 3 सत्य है क्योंकि राष्ट्रीय आपातकाल के समय अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित हो जाता है तथा अनुच्छेद 20 और 21 कभी निलंबित नहीं होते। कथन 4 असत्य है क्योंकि महान्यायवादी को संसद की बैठकों में भाग लेने और बोलने का अधिकार तो है (अनुच्छेद 88), किंतु उसे संसद में **मतदान देने का कोई अधिकार नहीं** है। ऐसे महत्वपूर्ण और कठिन प्रश्नों के अभ्यास के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
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