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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के आपात उपबंधों और संविधान संशोधन प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा के समय अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित हो जाता है, किंतु सशस्त्र विद्रोह के आधार पर घोषित राष्ट्रीय आपातकाल के मामले में अनुच्छेद 19 का स्वतः निलंबन नहीं होता है, इसके लिए अलग से आदेश की आवश्यकता होती है।
- 2. वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा जारी रखने के लिए उद्घोषणा की तिथि से दो माह के भीतर साधारण बहुमत (Simple Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
- 3. अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, किंतु इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Permission) लेना अनिवार्य है तथा इस विधेयक पर संयुक्त बैठकों (Joint Sessions) के प्रावधान का प्रयोग किया जा सकता है।
- 4. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्धारित किया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है, बशर्ते वह संशोधन संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर घोषित आपातकाल में अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित नहीं होगा, यह केवल 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर ही स्वतः निलंबित होता है। कथन 2 सत्य है क्योंकि वित्तीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा 2 महीने के भीतर साधारण बहुमत से अनुमोदित किया जाना आवश्यक है। कथन 3 असत्य है क्योंकि संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है, और इस प्रकार के विधेयकों पर असहमति की स्थिति में अनुच्छेद 108 के तहत 'संयुक्त बैठक' (Joint Session) बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है। कथन 4 सत्य है क्योंकि केशवानंद भारती वाद में 'मूल ढांचे के सिद्धांत' का प्रतिपादन किया गया था। ऐसी महत्वपूर्ण तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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किस आंदोलन के दौरान बिहार विद्यापीठ की स्थापना की गई थी?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान दांडी मार्च के पश्चात महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार के समक्ष ग्यारह सूत्री मांगें रखी थीं, जिन्हें वायसराय लॉर्ड इरविन द्वारा पूर्ण रूप से स्वीकार किए जाने के बाद ही कांग्रेस ने प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने का निर्णय लिया था।
2. 5 मार्च 1931 को हस्ताक्षरित 'गांधी-इरविन समझौता' (Delhi Pact) के तहत सरकार द्वारा उन सभी राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की गई थी जिन पर हिंसा का आरोप था, तथा समुद्र तट के किनारे लोगों को अपने उपभोग के लिए नमक बनाने का अधिकार दिया गया था।
3. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितंबर-दिसंबर 1931) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया था, किंतु यह सम्मेलन अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व और सांप्रदायिक समस्या पर असहमति के कारण पूरी तरह विफल रहा था।
4. डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने तीनों (प्रथम, द्वितीय और तृतीय) गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था और उन्होंने दलितों (अछूतों) के लिए पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorates) की मांग उठाई थी, जिसे ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमसे मैकडोनाल्ड के 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) के माध्यम से स्वीकार कर लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के भौगोलिक परिदृश्य में वन आवरण, मृदा के प्रकार और उनके वितरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार में कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 7.84% हिस्सा वन आवरण के अंतर्गत आता है, जिसमें सर्वाधिक वन क्षेत्रफल वाला जिला कैमूर है, जबकि प्रतिशत के दृष्टिकोण से भी कैमूर शीर्ष स्थान पर है।
2. बिहार के उत्तर-पश्चिमी भाग (विशेषकर पश्चिमी चंपारण के सोमेश्वर और दून पहाड़ियों के क्षेत्र) में पर्णपाती प्रकार के वन पाए जाते हैं, जहाँ साल (सखुआ) के वृक्षों की प्रधानता होती है।
3. राज्य में पाई जाने वाली 'टैरल मृदा' (Terai Soil) हिमालय की तराई क्षेत्र में उत्तर-पश्चिमी पट्टी में पाई जाती है, जो अम्लीय प्रकृति की होती है और गन्ने तथा धान की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है।
4. दक्षिण बिहार के पठारी और टल क्षेत्र में मिलने वाली 'लाल-पीली मृदा' और 'बलसुन्दरी मृदा' में नाइट्रोजन, ह्यूमस और फास्फोरस की प्रचुरता होती है, जिसके कारण इस क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों की बिल्कुल आवश्यकता नहीं पड़ती है।
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महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) की गतिकी और उनके प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय जलधाराओं के निर्माण और दिशा निर्धारण में पृथ्वी का घूर्णन (कोरियोलिस बल), प्रचलित हवाएं, तापमान और लवणता में भिन्नता मुख्य रूप से उत्तरदायी होती हैं, जिसके कारण उत्तरी गोलार्ध में धाराएं अपनी दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में अपनी बाईं ओर मुड़ जाती हैं।
2. 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक ठंडी जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्पन्न होकर उत्तर की ओर बहती है और पश्चिमी यूरोप के तटों पर तापमान को अत्यधिक कम कर देती है, जिससे वहां सर्दी के मौसम में बंदरगाह जम जाते हैं।
3. 'लैब्राडोर जलधारा' (Labrador Current) आर्कटिक महासागर से बहने वाली एक ठंडी जलधारा है, जो उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती है और जब यह गर्म गल्फ स्ट्रीम से मिलती है, तो न्यूफाउंडलैंड के तट के पास दुनिया के सबसे समृद्ध मत्स्य क्षेत्रों (ग्रैंड बैंक) का निर्माण करती है।
4. हिन्द महासागर में मानसून के मौसम के प्रभाव के कारण महासागरीय जलधाराओं की दिशा में मौसमी परिवर्तन (Seasonal Reversal) देखा जाता है, जो ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन मानसून पवनों की दिशा के अनुसार बदलती है।
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क्लेपटोक्रेसी (Kleptocracy) का संबंध किस सामाजिक बुराई से है?
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