त्वरित लिंक्स
BPSC TRE 4.0
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केप्लर के ग्रहों की गति के नियमों और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. केप्लर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस बात का परिणाम है कि केंद्रीय बलों के अधीन गति में कोणीय संवेग (Angular Momentum) संरक्षित रहता है।
- 2. किसी ग्रह की कक्षीय चाल सूर्य से उसकी दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अर्थात् ग्रह जब सूर्य के सबसे निकट (उपसौर या Perihelion) होता है, तब उसकी चाल न्यूनतम होती है।
- 3. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक ($G$) का मान केवल द्रव्यमान की प्रकृति पर निर्भर करता है और यह ब्रह्मांड में किसी भी स्थान या माध्यम पर जाने से परिवर्तित हो जाता है।
- 4. यदि पृथ्वी और सूर्य के बीच की वर्तमान दूरी घटकर आधी रह जाए, तो वर्ष की अवधि (परिक्रमण काल) वर्तमान मान की एक-चौथाई रह जाएगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि केप्लर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) केन्द्रीय बल (गुरुत्वाकर्षण बल) के कारण कोणीय संवेग संरक्षण (Conservation of Angular Momentum) का सीधा परिणाम है। कथन 2 असत्य है क्योंकि उपसौर (Perihelion) पर ग्रह सूर्य के सबसे निकट होता है, जिससे उसकी कक्षीय चाल अधिकतम (अधिकतम गति) होती है, न कि न्यूनतम। कथन 3 असत्य है क्योंकि सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक ($G$) एक सार्वभौमिक नियतांक है जिसका मान ब्रह्मांड में सर्वत्र समान रहता है और यह माध्यम या स्थान पर निर्भर नहीं करता। कथन 4 असत्य है क्योंकि केप्लर के तृतीय नियम ($T^2 \propto R^3$) के अनुसार, यदि दूरी $R$ आधी हो जाए ($R/2$), तो नया आवर्तकाल $T' = (1/2)^{3/2} T$, अर्थात यह $\frac{1}{2\sqrt{2}}$ गुना हो जाएगा, न कि एक-चौथाई। अधिक तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार के किसान आंदोलनों और विद्रोहों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1929 में 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों के जमींदारों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न और बेदखली के विरुद्ध आवाज उठाना था।
2. बकाश्त भूमि (Bakasht Land) आंदोलन का मुख्य उद्देश्य उन जमींदारों के खिलाफ संघर्ष करना था जिन्होंने किसानों की ज़मीनें गैर-कानूनी तरीके से छीन ली थीं, और यह आंदोलन मुख्य रूप से किसानों के स्वत्व और अधिकार की रक्षा से जुड़ा था।
3. वर्ष 1936 में लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के प्रथम सम्मेलन के अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती चुने गए थे, जबकि इसके महासचिव एन.जी. रंगा को बनाया गया था।
4. मोकामा ताल क्षेत्र में कार्यानंद शर्मा के नेतृत्व में चलाए गए किसान आंदोलन का मुख्य उद्देश्य किसानों को लगान से पूरी तरह मुक्ति दिलाना और ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था, और इस आंदोलन का कोई आर्थिक या कृषि संबंधी आधार नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत के 23वें विधि आयोग के अध्यक्ष के रूप में किसे नियुक्त किया गया है?
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बिहार की बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और सिंचाई प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोन नदी घाटी परियोजना बिहार की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण नहर प्रणाली है, जिसके अंतर्गत डेहरी-ऑन-सोन से निकलने वाली पूर्वी और पश्चिमी नहरें मुख्य रूप से रोहतास, भोजपुर, औरंगाबाद और पटना जिलों के कृषि क्षेत्रों को सिंचित करती हैं।
2. गंडक परियोजना भारत और नेपाल की एक संयुक्त परियोजना है, जिसके तहत वाल्मीकिनगर (बिहार) के समीप एक बराज का निर्माण किया गया है, जिससे निकलने वाली तिरहुत नहर और सारण मुख्य नहर प्रणाली इस क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई धमनियां हैं।
3. कोसी परियोजना, जिसे 'बिहार का शोक' कही जाने वाली नदी पर बनाया गया है, के अंतर्गत हनुमाननगर (नेपाल) में एक बराज का निर्माण किया गया है, जिससे पूर्वी कोसी मुख्य नहर और पश्चिमी कोसी नहर प्रणाली के माध्यम से उत्तर-पूर्वी बिहार के विस्तृत भू-भाग को सिंचाई और बाढ़ सुरक्षा प्रदान की जाती है।
4. बड़ुआ और दुर्गावती जलाशय परियोजनाएं दक्षिण बिहार के पठारी और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों (जैसे कैमूर और बांका) में वर्षा जल के संचयन और स्थानीय स्तर पर कृषि के लिए सिंचाई की आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से निर्मित प्रमुख मध्यम सिंचाई परियोजनाएं हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सूरदास किसके शिष्य थे?
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ट्रांस-साइबेरियन रेलमार्ग निम्नलिखित में से किन दो शहरों को आपस में जोड़ता है?
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