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BPSC TRE 4.0
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1757 से 1857 के मध्य ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों और भू-राजस्व व्यवस्था के विरुद्ध भारत में हुए 'अन्य जन आंदोलनों' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1799 में विजयनगरम के राजा की मृत्यु के बाद ब्रिटिश कंपनी द्वारा वहाँ के राजा के उत्तराधिकारी पर अत्यधिक सेना व्यय का भार लादने और किले को नष्ट करने के आदेश के विरुद्ध वहाँ की जनता और पोलिगारों ने उमातुर के विद्रोह का नेतृत्व किया था, जिसे ब्रिटिश सेना ने कड़ाई से कुचल दिया।
  2. 2. केरल (मालाबार क्षेत्र) में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध 1800-1805 के दौरान 'पझस्सी राजा' (Kerala Varma Pazhassi Raja) के नेतृत्व में हुए कोर्लियोट (कटीरी) विद्रोह ने अंग्रेजों को भारी क्षति पहुंचाई थी, जिसमें स्थानीय नायरों और कुरिचिया जनजातियों ने गोरिल्ला युद्ध की रणनीति का उपयोग किया था।
  3. 3. वर्ष 1824 में असम में अहोम राजवंश के राजकुमार गोपिनाथ बरदलोई के नेतृत्व में हुए अहोम विद्रोह का मुख्य कारण ब्रिटिश कंपनी द्वारा प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध के पश्चात असम को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाने का वचन पूरा न करना और स्थानीय प्रशासन में भारी हस्तक्षेप करना था।
  4. 4. गंजाम (ओडिशा) के जमींदार धनंजय भंज (किंग्स ऑफ़ घुमसर) द्वारा 1835-1837 के दौरान ब्रिटिश कंपनी की नई भू-राजस्व नीतियों और प्रशासनिक नियंत्रण के विरुद्ध एक शक्तिशाली विद्रोह किया गया था, जिसे दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार को जॉर्ज रसेल के नेतृत्व में विशेष सेना भेजनी पड़ी थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 1799 में उमातुर का विद्रोह मैसूर के पतन के बाद ढोंडजी वाघ और उसके सहयोगियों से संबंधित था, जबकि विजयनगरम के राजा के विरुद्ध विद्रोह 1794 में हुआ था। कथन 3 असत्य है क्योंकि 1828 के अहोम विद्रोह का नेतृत्व गोपिनाथ बरदलोई ने नहीं, बल्कि 'गोमधर कुंवर' (Gomdhar Konwar) ने किया था। कथन 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं; पझस्सी राजा ने मालाबार में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध लड़ा था तथा गंजाम के राजा धनंजय भंज ने घुमसर विद्रोह का नेतृत्व किया था। ऐसी ही और बेहतरीन अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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1857 का विद्रोह किस कारण से सफल नहीं हो सका? वायुमंडल में वायुदाब पेटियों के खिसकाव (Shift), आर्द्रता के वितरण और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन होने के साथ-साथ सभी वायुदाब पेटियाँ और पवन प्रणालियाँ (जैसे अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र - ITCZ) ग्रीष्मकाल में उत्तर की ओर और शीतकाल में दक्षिण की ओर विस्थापित हो जाती हैं। 2. सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) किसी निश्चित तापमान पर वायु में मौजूद जलवाष्प की मात्रा और उसी तापमान पर वायु की जलवाष्प ग्रहण करने की अधिकतम क्षमता का प्रतिशत अनुपात होती है, और तापमान में वृद्धि होने पर सापेक्ष आर्द्रता कम हो जाती है यदि जलवाष्प की मात्रा स्थिर रहे। 3. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के विकास के लिए समुद्र की सतह का तापमान न्यूनतम 27°C होना आवश्यक है, और पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होने वाला कोरिऑलिस बल (Coriolis Force) भूमध्य रेखा पर शून्य होने के कारण भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर (0° से 5° अक्षांश के बीच) ये चक्रवात विकसित नहीं होते हैं। 4. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों की तुलना में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में स्पष्ट 'वातग्र्रह' (Fronts) प्रणालियाँ पाई जाती हैं, जिनमें उष्ण वातग्र और शीत वातग्र मिलकर चक्रवात को ऊर्जा प्रदान करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? जीव जगत के जैविक वर्गीकरण (Biological Classification) और मोनेरा जगत (Kingdom Monera) के विशिष्ट लक्षणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आर.एच. व्हिटेकर द्वारा प्रतिपादित पाँच जगत वर्गीकरण (Five-Kingdom Classification) में प्रोकैरियोटिक जीवों को यूकैरियोटिक जीवों से अलग करने के लिए मुख्य रूप से कोशिका भित्ति की रासायनिक संरचना और केंद्रक झिल्ली की अनुपस्थिति को आधार बनाया गया है, जिसके अंतर्गत सभी प्रोकैरियोट्स को मोनेरा जगत में रखा गया है। 2. मोनेरा जगत के अंतर्गत आने वाले अधिकांश बैक्टीरिया में पोषण की विधि मुख्य रूप से स्वपोषी (Autotrophic) होती है, और वे अपनी अधिकांश ऊर्जा रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से अकार्बनिक पदार्थों का ऑक्सीकरण करके (रसायनसंश्लेषी) प्राप्त करते हैं, जबकि प्रकाशसंश्लेषी बैक्टीरिया में क्लोरोप्लास्ट स्पष्ट रूप से पाया जाता है। 3. सायनोबैक्टेरिया (Cyanobacteria), जिन्हें नील-हरित शैवाल भी कहा जाता है, मोनेरा जगत के अंतर्गत आते हैं और इनमें विशिष्ट कोशिकाएँ जिन्हें 'हेटरोसिस्ट' (Heterocyst) कहा जाता है, वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण (Nitrogen fixation) का कार्य करती हैं। 4. माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma), जिन्हें पादप जगत का जोकर भी कहा जाता है, मोनेरा जगत के ऐसे सूक्ष्मजीव हैं जिनमें कोशिका भित्ति (Cell wall) पूरी तरह अनुपस्थित होती है और वे ऑक्सीजन के बिना भी जीवित रह सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? प्राचीन एवं आधुनिक भारतीय इतिहास तथा साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित पुस्तकों और उनके लेखकों की जोड़ियों पर विचार कीजिए: 1. 'अनहैप्पी इंडिया' (Unhappy India) - लाला लाजपत राय 2. 'इंडिया डिवाइडेड' (India Divided) - डॉ. राजेंद्र प्रसाद 3. 'द फिलासफी ऑफ द बॉम्ब' (The Philosophy of the Bomb) - भगवती चरण बोहरा 4. 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (Poverty and Un-British Rule in India) - सुरेंद्रनाथ बनर्जी उपर्युक्त जोड़ियों में से कौन-सी/से सही सुमेलित है/हैं? प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, महाजनपद काल और मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगार निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध एवं जैन ग्रंथ प्राचीन भारत के 'षोडश महाजनपदों' की व्यवस्थित सूची प्रदान करते हैं, जिनमें मगध के अतिरिक्त वज्जि संघ को एक गणतंत्रात्मक व्यवस्था के रूप में उल्लेखित किया गया है। 2. मौर्यकाल में 'अध्यक्ष' नामक अधिकारी विभिन्न विभागों के प्रमुख होते थे, जैसे कि 'सुवर्णध्यक्ष' स्वर्ण और टकसाल का अधिकारी था, तथा 'पण्यध्यक्ष' वाणिज्य और व्यापार पर नियंत्रण रखता था। 3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार मौर्य प्रशासन में कृषि और भूमि माप के लिए 'नोमोनोई' (Nomonomoi) नामक अधिकारियों का उल्लेख मिलता है, जो सिंचाई व्यवस्था और भू-राजस्व संग्रह का कार्य करते थे। 4. संगम काल के प्राचीन तमिल साहित्य (जैसे एट्टुतोगै और पाट्टुपाट्टू) में उरैयूर और मुसिरी जैसे बंदरगाहों का उल्लेख मिलता है, जो रोमन साम्राज्य के साथ होने वाले अत्यधिक लाभदायक मलमल, मसाले और मोती के व्यापार के प्रमुख केंद्र थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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