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भारतीय भूगर्भिक इतिहास और शैलतंत्र (Rock Systems) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. आर्कियन क्रम की चट्टानें (Archaean Rock System) भारत की सबसे प्राचीन चट्टानें हैं, जो अत्यधिक कायांतरित (Metamorphosed) होने के कारण जीवाश्म विहीन (Fossil-free) हैं, और इनका विस्तार प्रायद्वीपीय भारत के अलावा अरावली पर्वतमाला के क्षेत्रों में भी पाया जाता है।
  2. 2. धारवाड़ शैलतंत्र (Dharwar Rock System) का निर्माण आर्कियन चट्टानों के अपरदन और निक्षेपण से हुआ है, तथा यह आर्थिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण शैलतंत्र है क्योंकि भारत के अधिकांश धात्विक खनिज—जैसे लौह अयस्क, मैंगनीज, सोना और तांबा—इसी तंत्र में पाए जाते हैं।
  3. 3. विंध्यन शैलतंत्र (Vindhyan Rock System) का निर्माण जल निक्षेपों के कारण हुआ है, जिसमें बालू पत्थर, चूना पत्थर और बलुआ पत्थर प्रचुर मात्रा में मिलते हैं, और इसी क्रम की चट्टानों से प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतों—लाल किला और सांची के स्तूप—के निर्माण हेतु पत्थर प्राप्त किए गए हैं।
  4. 4. गोंडवाना शैलतंत्र (Gondwana Rock System) का निर्माण मुख्यतः नदी घाटियों में अवसादों के जमाव से हुआ है, और भारत का लगभग 98 प्रतिशत से अधिक कोयला भंडार इसी शैलतंत्र की धारियों में संचित है, जिसमें दामोदर, महानदी और गोदावरी घाटियाँ प्रमुख हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

भारतीय उपमहाद्वीप का भूगर्भिक इतिहास अत्यंत प्राचीन और विविधतापूर्ण है। दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। आर्कियन चट्टानें पृथ्वी के ठंडे होने पर सबसे पहले बनीं और ये जीवाश्म रहित हैं। धारवाड़ शैलतंत्र खनिज संपदा (विशेषकर धात्विक खनिजों) का भंडार है। विंध्यन क्रम की चट्टानें भवन निर्माण सामग्री (बलुआ पत्थर, चूना पत्थर) के लिए प्रसिद्ध हैं, जिनका उपयोग लाल किला और सांची स्तूप में हुआ है। गोंडवाना शैलतंत्र भारत में कोयले का मुख्य स्रोत है। इस तरह के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नों के अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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