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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के विभिन्न स्रोतों, अनुच्छेदों और अनुसूचियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारतीय संविधान में 'समवर्ती सूची' (Concurrent List) और 'व्यापार, वाणिज्य तथा समागम की स्वतंत्रता' के प्रावधान ऑस्ट्रेलिया के संविधान से लिए गए हैं, जबकि 'संसदीय विशेषाधिकार' और 'द्विसदनीयता' के विचार ब्रिटिश संविधान से प्रेरित हैं।
- 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति प्रदान की गई है, और इस अनुच्छेद के तहत संविधान संशोधन की प्रक्रिया को दक्षिण अफ्रीका के संविधान से तथा राज्यसभा के सदस्यों के निर्वाचन की पद्धति को आयरलैंड के संविधान से ग्रहण किया गया है।
- 3. भारतीय संविधान की तीसरी अनुसूची में विभिन्न संवैधानिक पदाधिकारियों (जैसे- राष्ट्रपति, राज्यपाल और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों) के लिए 'शपथ या प्रतिज्ञा' के प्रारूपों का उल्लेख किया गया है, जबकि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की शपथ के प्रारूप का विशिष्ट उल्लेख इस अनुसूची में नहीं बल्कि उनके संबंधित अनुच्छेदों में किया गया है।
- 4. भारतीय संविधान की बारहवीं अनुसूची को 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा जोड़ा गया था, जिसमें नगरपालिकाओं के अधिकार, प्राधिकार और उत्तरदायित्व से संबंधित कुल 18 कार्यकारी विषयों का उल्लेख किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि समवर्ती सूची और व्यापार की स्वतंत्रता ऑस्ट्रेलिया से तथा संसदीय विशेषाधिकार व द्विसदनीयता ब्रिटेन से लिए गए हैं। कथन 2 असत्य है क्योंकि राज्यसभा के सदस्यों के निर्वाचन की पद्धति दक्षिण अफ्रीका के संविधान से ली गई है, न कि आयरलैंड से (आयरलैंड से राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति और नीति निर्देशक तत्व लिए गए हैं)। कथन 3 सत्य है क्योंकि संविधान की तीसरी अनुसूची में राष्ट्रपति (अनुच्छेद 60), उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 69) और राज्यों के राज्यपालों (अनुच्छेद 159) की शपथ के प्रारूप शामिल नहीं हैं, उनके लिए अलग से अनुच्छेद निर्धारित हैं। कथन 4 सत्य है क्योंकि 74वें संशोधन द्वारा जोड़ी गई बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं के लिए 18 विषय दिए गए हैं। अधिक अभ्यास और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत पंचायती राज, नगरपालिका और सहकारी समितियों (73वें, 74वें तथा 97वें संविधान संशोधन) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया तथा अनुच्छेद 243 से 243-O तक पंचायतों का प्रावधान किया गया, जिसके तहत राज्यों के लिए त्रि-स्तरीय पंचायत प्रणाली अनिवार्य की गई है, किंतु 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों को मध्यवर्ती स्तर के गठन से छूट दी गई है।
2. 74वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए भाग IX-क के तहत नगरपालिकाओं (नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम) का गठन किया जाता है, तथा वार्ड समितियों का गठन उन नगरपालिकाओं के लिए अनिवार्य है जिनकी कुल जनसंख्या 3 लाख या उससे अधिक है।
3. 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 द्वारा सहकारी समितियों के गठन को अनुच्छेद 19(1)(c) के तहत एक मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया, तथा संविधान में नया 'भाग IX-ख' जोड़ा गया, किंतु सर्वोच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक निर्णय (2021) में इस संशोधन के उस हिस्से को असंवैधानिक घोषित कर दिया गया जो सहकारी समितियों के प्रबंधन से संबंधित राज्यों के स्वशासन में अत्यधिक हस्तक्षेप करता था।
4. पंचायती राज संस्थाओं, नगरपालिकाओं और सहकारी समितियों के सुचारू संचालन के लिए प्रत्येक राज्य में एक ही एकीकृत 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है, जो तीनों स्थानीय निकायों के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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रक्त का थक्का जमने में कौन सा विटामिन सहायक है?
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लोक सभा का सदस्य चुने जाने के लिए एक व्यक्ति को किस आयु से कम का नहीं होना चाहिए?
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अभिकथन (A): अल नीनो के कारण उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट पर तापमान में वृद्धि होती है। कारण (R): व्यापारिक पवनों के कमजोर पड़ने और अपवेलिंग के बाधित होने से।
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ और उसका राज्यक्षेत्र' (Articles 1-4) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को 'राज्यों का संघ' (Union of States) कहा गया है, न कि 'राज्यों का फेडरेशन' (Federation of States), क्योंकि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है।
2. अनुच्छेद 2 संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों को ठीक समझे, 'संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना' करने की शक्ति प्रदान करता है, जिसका प्रयोग करते हुए संसद ने सिक्किम को सह-राज्य (Associate State) से पूर्ण राज्य का दर्जा दिया था।
3. नए राज्यों के निर्माण, वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, तथा ऐसे विधेयक को राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार के लिए भेजना संवैधानिक रूप से अनिवार्य होता है, बशर्ते राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई सलाह को मानना संसद के लिए सर्वथा बाध्यकारी होता है।
4. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरुबारी यूनियन मामले' (1960) में दिए गए निर्णय के अनुसार, भारतीय भू-क्षेत्र के किसी हिस्से को किसी अन्य देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए संसद द्वारा साधारण बहुमत से अनुच्छेद 3 के तहत सामान्य कानून पारित करके ही ऐसा किया जा सकता है, इसके लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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