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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के भाग-I (संघ एवं उसके राज्यक्षेत्र) के अंतर्गत 'राज्य निर्माण और सीमा परिवर्तन' की विधायी प्रक्रिया के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी भी राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने, घटाने, उसके नाम या सीमा में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा (Recommendation) से ही संसद में कोई विधेयक प्रस्तुत किया जा सकता है।
- 2. राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी भी राज्य के पुनर्गठन से संबंधित विधेयक को उस राज्य के विधानमंडल के पास उसकी राय जानने के लिए भेजा जाता है, तथा राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर व्यक्त की गई राय या सिफारिश को मानना संसद के लिए सर्वथा बाध्यकारी (Mandatory) होता है।
- 3. अनुच्छेद 2 संसद को विधि द्वारा ऐसे निबंधनों और शर्तों को जो वह ठीक समझे, 'संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना' करने की शक्ति प्रदान करता है, जिसका ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए संसद ने 36वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के माध्यम से सिक्किम को भारतीय संघ का एक पूर्ण राज्य बनाया था।
- 4. सर्वोच्च न्यायालय के 'बेरुबारी यूनियन वाद (1960)' में दिए गए निर्णय के अनुसार, भारतीय भू-क्षेत्र के किसी हिस्से को किसी अन्य देश को सौंपने (Cession of territory) के लिए संसद द्वारा केवल साधारण बहुमत से अनुच्छेद 3 के तहत कानून पारित करके ऐसा किया जा सकता है, इसके लिए संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सत्य है क्योंकि अनुच्छेद 3 के तहत किसी नए राज्य के निर्माण, सीमा या नाम परिवर्तन से जुड़ा विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व अनुशंसा के बाद ही संसद में पेश किया जा सकता है। कथन 2 असत्य है क्योंकि राज्य विधानमंडल द्वारा दी गई राय या सिफारिश को मानना संसद के लिए बाध्यकारी (Mandatory) नहीं होता है, संसद उसे मानने के लिए स्वतंत्र है। कथन 3 सत्य है, अनुच्छेद 2 संघ में नए राज्यों के प्रवेश से संबंधित है तथा 36वें संविधान संशोधन 1975 द्वारा सिक्किम को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया था। कथन 4 असत्य है क्योंकि बेरुबारी वाद (1960) में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि भारत का कोई भू-भाग किसी अन्य देश को सौंपने के लिए संविधान संशोधन (आमतौर पर 9वाँ संविधान संशोधन) आवश्यक है, केवल साधारण बहुमत से अनुच्छेद 3 के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता। ऐसी और उत्कृष्ट अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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भारत के भौगोलिक विस्तार, अक्षांशीय व देशांतर रेखाओं तथा मानक समय रेखा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का मुख्य भूभाग 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर अक्षांश तथा 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व देशांतर के बीच फैला हुआ है, जिससे इसकी उत्तर से दक्षिण की वास्तविक लंबाई पूर्व से पश्चिम की चौड़ाई की तुलना में अधिक है।
2. भारत का मानक समय (IST) 82°30' पूर्वी देशांतर रेखा पर आधारित है, जो मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) से गुजरती है और यह ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे है, तथा यह देशांतर रेखा कुल 5 राज्यों (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश) से होकर गुजरती है।
3. कर्क रेखा (23°30' उत्तर) भारत के लगभग मध्य से होकर गुजरती है और यह देश के कुल 8 राज्यों (गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम) से गुजरती है, जिसमें त्रिपुरा की राजधानी अगरतला कर्क रेखा के सबसे निकट स्थित राजधानी शहर है।
4. भारत की कुल स्थलीय सीमा लगभग 15,200 किलोमीटर है, जो सात देशों (पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश) के साथ लगती है, जिसमें सर्वाधिक लंबी स्थलीय सीमा बांग्लादेश के साथ और न्यूनतम स्थलीय सीमा अफगानिस्तान के साथ साझा होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के प्रारंभिक वर्षों और उसके अधिवेशनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन (1885) की अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की थी, जिसमें कुल 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था और यह अधिवेशन मूल रूप से पुणे में आयोजित होना तय था, किंतु वहाँ प्लेग फैलने के कारण इसे बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में स्थानांतरित करना पड़ा था।
2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन की अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, जिसमें बंगाल विभाजन के विरोध में ब्रिटिश वस्तुओं और प्रशासन की नीतियों के खिलाफ स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का औपचारिक समर्थन किया गया था।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस 'नरम दल' और 'गरम दल' के वैचारिक मतभेदों के कारण दो स्पष्ट गुटों में विभाजित हो गई थी, जिसकी अध्यक्षता रास बिहारी घोष ने की थी, और इस विभाजन के बाद कांग्रेस पर नरमपंथियों का नियंत्रण पुनः स्थापित हो गया था।
4. वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिका चरण मजुमदार ने की थी, जिसमें न केवल नरम दल और गरम दल का ऐतिहासिक पुनर्मिलन हुआ, बल्कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच 'लखनऊ पैक्ट' भी संपन्न हुआ, जिसने भविष्य की सांप्रदायिक राजनीति की नींव को मजबूत करने का कार्य किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India) तथा संसद के दोनों सदनों (राज्य सभा और लोकसभा) की विधायी एवं विशेषाधिकार संबंधी शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे संसद के दोनों सदनों या उनकी किसी भी समिति की बैठकों में भाग लेने और बोलने का अधिकार प्राप्त है, किंतु उसे संसद की कार्यवाही में मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है।
2. अनुच्छेद 105 के अनुसार संसद के सदस्यों को मिलने वाले सभी संसदीय विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ महान्यायवादी को भी पूरी तरह से प्राप्त होती हैं, क्योंकि वह संसद के किसी सदन का निर्वाचित सदस्य होता है।
3. राज्य सभा एक स्थायी सदन है जिसे कभी भी भंग नहीं किया जा सकता, किंतु इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं, और राज्य सभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष निर्धारित किया गया है, जिसके चुनाव में राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं।
4. धन विधेयक (Money Bill) के संबंध में लोकसभा की स्थिति राज्य सभा की तुलना में पूर्णतः अनन्य और सर्वोपरि होती है, और राज्य सभा किसी भी धन विधेयक को अपने पास अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है, जिसके बाद यदि वह इसे वापस नहीं करती है, तो इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सुरक्षा प्रकोष्ठ (Ring Fence) की नीति किससे संबंधित है?
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