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BPSC TRE 4.0
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बिहार के कृषि और पशुपालन परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बिहार सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 'तीसरा कृषि रोडमैप' (2017-2022) के उपरांत वर्तमान में 'चौथा कृषि रोडमैप' (2023-2028) लागू किया गया है, जिसका मुख्य फोकस जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण और जैविक खेती को बढ़ावा देना है।
  2. 2. राज्य में श्वेत क्रांति (Operation Flood) और डेयरी विकास को गति देने के लिए 'बिहार राज्य दुग्ध सहकारिता महासंघ' (COMFED) द्वारा 'सुधा' ब्रांड के तहत दूध एवं दुग्ध उत्पादों का विपणन किया जाता है, जो आनंद पैटर्न (Amul Pattern) पर आधारित त्रि-स्तरीय सहकारी मॉडल पर कार्य करता है।
  3. 3. मखाना, लीची और आम के उत्पादन में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, तथा राज्य में मखाना बोर्ड के गठन के साथ ही दरभंगा, मधुबनी और पूर्णिया जिलों में मखाना प्रसंस्करण इकाइयों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है।
  4. 4. बिहार के दक्षिण-पठारी और शुष्क जिलों (जैसे रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद) में पशुधन विकास और नस्ल सुधार के लिए केवल विदेशी नस्ल की गायों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, और देशी गोवंश के संरक्षण के लिए 'गोवंश विकास योजना' संचालित की जा रही है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। बिहार में कृषि विकास के लिए चौथा कृषि रोडमैप (2023-2028) लागू किया गया है, COMFED 'सुधा' ब्रांड के माध्यम से सहकारिता को बढ़ावा देता है, और मखाना उत्पादन में बिहार देश में प्रथम स्थान पर है। कथन 4 असत्य है क्योंकि विदेशी नस्ल के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध जैसी कोई नीति नहीं है, बल्कि संकर नस्ल (Crossbreeding) और देशी नस्ल दोनों के संवर्धन पर ध्यान दिया जाता है। ऐसे ही महत्वपूर्ण प्रश्नों और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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