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बिहार के लोक नृत्यों, पारंपरिक कलाओं और मेलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'विदेशिया' नृत्य नाटक बिहार का एक अत्यंत प्रसिद्ध लोक नाट्य रूप है, जिसके प्रणेता भिखारी ठाकुर थे, जिन्हें 'भोजपुरी का शेक्सपियर' भी कहा जाता है, और इस नृत्य के माध्यम से मुख्य रूप से ग्रामीण समाज से पुरुषों के पलायन, महिलाओं के दर्द और सामाजिक विषमताओं को अत्यंत मर्मस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
  2. 2. मिथिला क्षेत्र में प्रसिद्ध 'सामा चकोवा' लोकनृत्य मुख्य रूप से भाई-बहन के पवित्र प्रेम और उनके अटूट रिश्ते को समर्पित एक सांस्कृतिक उत्सव है, जिसे कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी से पूर्णिमा तक महिलाओं द्वारा पारंपरिक गीतों और मिट्टी की रंगबिरंगी मूर्तियों के साथ मनाया जाता है।
  3. 3. सोनपुर मेला (हरिहर क्षेत्र मेला), जो एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है, कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर गंडक और गंगा नदी के संगम तट पर आयोजित होता है, और इसकी शुरुआत प्राचीन काल में चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल से मानी जाती है।
  4. 4. रोहतास और कैमूर की पहाड़ियों के बीच मुहर्रम और कर्मा पर्व के अतिरिक्त मुसहर एवं भुइयां जातियों द्वारा किया जाने वाला 'झिझिया' नृत्य अत्यधिक लोकप्रिय है, जिसमें महिलाएँ अपने सिर पर जलते हुए दीपों से भरा हुआ मिट्टी का घड़ा रखकर वर्षा के देवता इन्द्र को प्रसन्न करने के लिए नृत्य करती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 और 2 पूर्णतः सत्य हैं। भिखारी ठाकुर द्वारा रचित 'विदेशिया' लोक नाट्य सामाजिक मुद्दों और पलायन पर आधारित है, तथा 'सामा चकोवा' मिथिला क्षेत्र का भाई-बहन के प्रेम को समर्पित लोकपर्व है। कथन 3 असत्य है क्योंकि सोनपुर मेला गंडक और गंगा नदी के संगम पर तो लगता है, किंतु इसकी ऐतिहासिक शुरुआत चंद्रगुप्त मौर्य के बजाय राजा मानसिंह या मुगल काल से जुड़ी मानी जाती है। कथन 4 असत्य है क्योंकि 'झिझिया' नृत्य मिथिला और उत्तर बिहार के क्षेत्रों में सूखे के समय वर्षा लाने के लिए महिलाओं द्वारा किया जाता है, न कि रोहतास-कैमूर की मुसहर जातियों द्वारा कर्मा पर्व पर। अधिक अभ्यास और परीक्षा सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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