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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के अंतर्गत संघ की न्यायपालिका (उच्चतम न्यायालय) तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की संवैधानिक स्थिति, शक्तियों और स्वतंत्रता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया अत्यंत कठोर है, और संविधान के अनुच्छेद 124(4) के अनुसार उन्हें संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत द्वारा 'साबित कदाचार या असमर्थता' के आधार पर पारित प्रस्ताव के बाद ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है।
- 2. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को पदच्युत करने की वही प्रक्रिया और आधार हैं जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के होते हैं, तथा CAG अपने पद से सेवानिवृत्त होने के पश्चात भारत सरकार या किसी भी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय या पद के पात्र नहीं होते हैं।
- 3. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और CAG दोनों के वेतन, भत्ते और पेंशन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित (Charged) होते हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि इन पर संसद में मतदान नहीं हो सकता है, जिससे इनकी वित्तीय स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
- 4. CAG प्रत्यक्ष रूप से संसद की 'लोक लेखा समिति' (Public Accounts Committee) के मार्गदर्शक, मित्र और सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं, क्योंकि वे केंद्र और राज्यों के लेखा परीक्षण प्रतिवेदनों को राष्ट्रपति या राज्यपाल के माध्यम से संसद या राज्य विधानमंडल के पटल पर रखवाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और CAG दोनों के पद की गरिमा, निष्पक्षता और स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए संविधान में कड़े प्रावधान किए गए हैं। CAG की रिपोर्टों की जाँच संसद की लोक लेखा समिति द्वारा की जाती है, जिससे वह उनके मार्गदर्शक माने जाते हैं। अधिक अभ्यास और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पर विजिट करें।
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हथकरघा व हस्तकला के समूह किस राज्य में सर्वाधिक हैं?
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बिहार में कृषि, पशुपालन और समेकित ग्रामीण विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार सरकार द्वारा कार्यान्वित 'बिहार कृषि रोड मैप (2023-2028)' का मुख्य फोकस जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Resilient Agriculture), फसल विविधीकरण तथा कृषि पद्धतियों में डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना है।
2. राज्य में श्वेत क्रांति को गति देने के लिए 'बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ' (COMFED) द्वारा 'सुधा' ब्रांड के माध्यम से सहकारिता मॉडल को सुदृढ़ किया गया है, जिसके तहत महिला दुग्ध उत्पादक समितियों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाया जा रहा है।
3. मखाना (Fox Nut) उत्पादन के क्षेत्र में बिहार देश का अग्रणी राज्य है, जिसे हाल ही में भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्रदान किया गया है, तथा इसके मूल्य संवर्धन (Value Addition) के लिए दरभंगा और मधुबनी सहित मिथिलांचल क्षेत्र में मखाना क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
4. राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत बिहार में स्वदेशी नस्ल की गायों के संवर्धन और दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने के लिए पूर्णिया और बेगूसराय में अत्याधुनिक वीर्य केंद्र (Semen Station) और भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीकों का विकास किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के भू-आकृतिक प्रदेशों तथा चट्टान एवं मृदा तंत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण बिहार के पठारी एवं पहाड़ी क्षेत्रों (जैसे कैमूर और रोहतास) में मुख्य रूप से प्राचीन विंध्यन क्रम की चट्टानें पाई जाती हैं, जिनमें बलुआ पत्थर, चूना पत्थर और शेल चट्टानों की अधिकता होती है।
2. उत्तर-पश्चिम में स्थित सोमेश्वर श्रेणी की पहाड़ियों में टर्टियरी (Tertiary) काल की अवसादी चट्टानें मिलती हैं, जिनका निर्माण हिमालयी उत्थान के क्रम में हुआ है।
3. बिहार के गंगा के मैदान में पाई जाने वाली 'बांगर' मृदा प्राचीन जलोढ़ मृदा है, जो प्रतिवर्ष बाढ़ के नए निक्षेपों से नवीकृत होती है और इसकी प्रकृति अत्यधिक क्षारीय होती है।
4. टाल क्षेत्र (Tal Soil) मुख्य रूप से भारी मटियार (Heavy Clay) मिट्टी से युक्त एक निम्न भूमि का क्षेत्र है, जो दक्षिण बिहार में मोकामा से बड़हिया तक फैला हुआ है और रबी फसलों के उत्पादन के लिए अत्यंत उपजाऊ माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी में भारत आने वाली यूरोपीय वाणिज्यिक कंपनियों और उनके प्रारंभिक व्यापारिक केंद्रों (कारखानों) की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में सर्वप्रथम पुर्तगालियों ने अपनी पहली फैक्ट्री वर्ष 1503 में कोच्चि में स्थापित की थी, जबकि अंग्रेजों ने अपनी पहली अस्थायी फैक्ट्री वर्ष 1608 में मसूलीपट्टनम में और पहली स्थायी फैक्ट्री वर्ष 1613 में सूरत में स्थापित की थी।
2. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने वर्ष 1605 में मसूलीपट्टनम में अपनी पहली फैक्ट्री खोली थी, तथा उन्होंने बंगाल में हुगली के निकट चिनसुरह (Chinsura) को अपना मुख्य व्यापारिक केंद्र बनाया था।
3. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना फ्रांसीसी मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से वर्ष 1664 में हुई थी, और फ्रांसीसियों ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री वर्ष 1668 में फ्रेंको कैरो के नेतृत्व में सूरत में स्थापित की थी।
4. डेनिश (डेनमार्क के लोग) ईस्ट इंडिया कंपनी ने वर्ष 1620 में तंजावुर के तट पर त्राणबार (Tranquebar) में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित की थी, और बाद में उन्होंने बंगाल के सेरामपुर (Serampore) को अपना मुख्य मुख्यालय बनाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry) के अंतर्गत संक्रमण धातुओं (Transition Metals), उनके यौगिकों तथा उपसहसंयोजन यौगिकों (Coordination Compounds) के रासायनिक गुणों और बंधता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संक्रमण धातुएँ (d-ब्लॉक के तत्व) सामान्यतः परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करती हैं, जिसका प्रमुख कारण इनके (n-1)d और ns कक्षकों की ऊर्जा में अत्यधिक अंतर होना होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं।
2. वर्नर के उपसहसंयोजन सिद्धांत (Werner's Coordination Theory) के अनुसार, उपसहसंयोजन यौगिकों में केंद्रीय धातु परमाणु दो प्रकार की संयोजकताएँ—प्राथमिक संयोजकता (जो आयननीय होती है और ऑक्सीकरण संख्या को संतुष्ट करती है) तथा द्वितीयक संयोजकता (जो अनआयननीय होती है और समन्वय संख्या को संतुष्ट करती है)—प्रदर्शित करता है।
3. क्रिस्टल फील्ड सिद्धांत (Crystal Field Theory - CFT) के अनुसार, जब लिगैंड केंद्रीय धातु आयन के संपर्क में आते हैं, तो समभ्रंश (Degenerate) d-कक्षकों का ऊर्जा स्तर अ-समभ्रंश कक्षकों में विभाजित हो जाता है, और अष्टफलकीय संकुलों में $t_{2g}$ कक्षक उच्च ऊर्जा स्तर पर तथा $e_g$ कक्षक निम्न ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं।
4. सोडियम नाइट्रोप्रसाइड [$Na_2[Fe(CN)_5(NO)]$] का उपयोग सल्फर और सल्फाइड आयनों ($S^{2-}$) के गुणात्मक परीक्षण के लिए किया जाता है, जिसके साथ यह आयन क्रिया करके एक विशिष्ट बैंगनी या जामुनी रंग का उपसहसंयोजन यौगिक बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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