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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति के निर्वाचन, प्रधानमंत्री की नियुक्ति और मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए निर्वाचक मंडल में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य शामिल होते हैं, जबकि राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों को इसमें भाग लेने का कोई अधिकार नहीं होता है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है, तथा कोई भी व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, प्रधानमंत्री या मंत्री के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
- 3. मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है, जिसका संवैधानिक अर्थ यह है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर संपूर्ण मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है, और व्यक्तिगत रूप से सभी मंत्री राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्यों) से मिलकर बनने वाले निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत के द्वारा होता है। राज्यों की विधानसभाओं की इसमें कोई भूमिका नहीं होती (जबकि राष्ट्रपति के चुनाव में राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं)।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 75 के अनुसार प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है और अन्य मंत्री प्रधानमंत्री की सलाह पर नियुक्त किए जाते हैं। हालांकि, कोई ऐसा व्यक्ति जो संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, मंत्री (या प्रधानमंत्री) बन सकता है, बशर्ते उसे नियुक्ति की तारीख से 6 महीने के भीतर संसद के किसी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य हो।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। इसका तात्पर्य है कि मंत्रिमंडल एक इकाई के रूप में कार्य करता है और लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है। साथ ही, मंत्री व्यक्तिगत रूप से राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं।
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भारतीय संविधान सभा के गठन, उसकी समितियों और निर्माण प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के लिए जुलाई-अगस्ट 1946 में हुए चुनावों में कुल 296 सीटों में से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 208 सीटें जीती थीं, जबकि मुस्लिम लीग को 73 सीटें मिली थीं, और इन चुनावों में ब्रिटिश प्रांतों की सीटों के लिए मतदान प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया गया था, जिसमें प्रत्येक समुदाय (सामान्य, मुस्लिम, सिख) के प्रतिनिधियों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा हुआ था।
2. संविधान सभा की विभिन्न समितियों में प्रक्रियाओं के नियम समिति (Committee on the Rules of Procedure) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि संघ संविधान समिति (Union Constitution Commission) के अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू और मौलिक अधिकारों एवं अल्पसंख्यकों से संबंधित सलाहकार समिति के अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
3. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण के लिए विभिन्न विषयों पर कुल 22 मुख्य समितियों का गठन किया गया था, जिनमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय प्रारूप समिति (Drafting Committee) सबसे महत्वपूर्ण थी, जिसने संविधान का पहला प्रारूप फरवरी 1948 में प्रकाशित किया था जिस पर देश भर में जनता और प्रेस द्वारा विचार-विमर्श किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है, और यह सिद्धांत भारत के भीतर उन व्यक्तियों पर भी लागू होता है जो आपातकाल या युद्ध के समय विदेशी नागरिकों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करते हैं।
2. नागरिकता अधिनियम, 1955 (समय-समय पर संशोधित) के तहत 'देशीकरण द्वारा नागरिकता' (Citizenship by Naturalization) प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि आवेदक कम से कम पिछले चौदह वर्षों से भारत में निवास कर रहा हो या केंद्र सरकार की सेवा में रहा हो, तथा आवेदन करने से ठीक पहले के 12 महीनों की निरंतर अवधि के दौरान भी भारत में ही रहा हो।
3. वर्ष 2019 के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) द्वारा अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी की परिभाषा से छूट दी गई है, बशर्ते उन्होंने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश किया हो और उन्हें संविधान की छठी अनुसूची में शामिल असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों के साथ-साथ 'इनर लाइन परमिट' (ILP) वाले क्षेत्रों में भी पूर्णतः लागू किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संवैधानिक दायित्वों, विशेषाधिकारों और उनके कार्यालयों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी को भारत सरकार का प्रथम विधिक अधिकारी कहा गया है, और उसे अपने कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों की बैठकों में बोलने या भाग लेने का अधिकार तो है किंतु उसे संसद की किसी भी समिति का सदस्य बनने पर पूर्ण प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है।
2. भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) न केवल केंद्र और राज्य सरकारों के समेकित फंडों के खातों की लेखापरीक्षा करता है, बल्कि सार्वजनिक निगमों और ऐसी कंपनियों के खातों की भी ऑडिट करता है जिनमें केंद्र या राज्य सरकार की शेयर पूंजी कम से कम 51 प्रतिशत हो।
3. सीएजी की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में यह प्रावधान किया गया है कि वह अपने पद पर रहते हुए केंद्र या राज्य सरकार के अधीन किसी भी प्रकार के अन्य पद (Office of Profit) को ग्रहण नहीं कर सकता है, और सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद पर पुनः नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 और पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-G के अधीन राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा पंचायतों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जो उन्हें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाओं को तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के क्रियान्वयन के संबंध में उत्तरदायी बनाने के लिए आवश्यक हों, और यह शक्ति राज्य विधानमंडल के विवेक पर निर्भर करती है, अनिवार्य रूप से बाध्यकारी नहीं है।
2. अनुच्छेद 243-H के अनुसार किसी राज्य का विधानमंडल, विधि द्वारा किसी पंचायत को उसके द्वारा संग्रहित और विनियोजित किए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीसों के अधिरोपण और संग्रहण के लिए अधिकृत कर सकता है, तथा राज्य की संचित निधि से पंचायतों को सहायता-अनुदान (Grants-in-aid) दिए जाने के प्रावधान भी कर सकता है।
3. अनुच्छेद 243-I के अंतर्गत प्रत्येक राज्य के राज्यपाल द्वारा प्रत्येक पांच वर्ष की समाप्ति पर एक वित्त आयोग (Finance Commission) का गठन किया जाना अनिवार्य है, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगा और राज्यपाल को संस्तुतियां देगा, तथा इस राज्य वित्त आयोग की संरचना और सदस्यों की योग्यता के निर्धारण की अनन्य शक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल के पास होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX-क जोड़ा गया तथा अनुच्छेद 243-Q के तहत तीन प्रकार की नगरपालिकाओं—नगर पंचायत (संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए), नगर परिषद (लघु नगरीय क्षेत्र के लिए) और नगर निगम (वृहत नगरीय क्षेत्र के लिए)—के गठन का प्रावधान किया गया, बशर्ते राज्यपाल द्वारा किसी औद्योगिक नगरी के रूप में निर्दिष्ट क्षेत्र के लिए नगरपालिका का गठन करना अनिवार्य हो।
2. नगरपालिकाओं के सभी स्थानों के लिए निर्वाचन क्षेत्रों (वार्डों) से सीधे निर्वाचन द्वारा भरे जाएंगे, तथा वार्ड समितियों (Ward Committees) के गठन का प्रावधान केवल उन नगरपालिकाओं के लिए अनिवार्य है जिनकी जनसंख्या तीन लाख या उससे अधिक है।
3. प्रत्येक नगरपालिका में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण उनकी कुल जनसंख्या के अनुपात में प्रदान किया जाएगा, और महिलाओं के लिए सभी श्रेणियों की कुल सीटों (तथा प्रत्यक्ष निर्वाचन द्वारा भरी जाने वाली सीटों) में से कम से कम एक-तिहाई सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित की जाएंगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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