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Indian Polity
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भारतीय संविधान की अनुसूचियों, राजभाषा के प्रावधानों और राजनीतिक दलों से संबंधित संवैधानिक व विधिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ शामिल थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों के माध्यम से बढ़ाया गया, और वर्तमान में इस अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ मान्यता प्राप्त हैं, जिनमें अंग्रेजी और राजस्थानी भाषाएँ भी शामिल हैं।
- 2. दलबदल के आधार पर संसद और राज्य विधानमंडलों के सदस्यों की अयोग्यता से संबंधित उपबंध संविधान की दसवीं अनुसूची में अंतर्विष्ट हैं, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था, तथा इस अनुसूची के तहत अयोग्यता संबंधी विवाद का अंतिम निर्णय संबंधित सदन के पीठासीन अधिकारी द्वारा लिया जाता है, जिसके निर्णय को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती थी (हालाँकि 'कीजोहो होलोहन वाद' में इसे न्यायिक समीक्षा के अधीन माना गया)।
- 3. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत भारत निर्वाचन आयोग के पास राजनीतिक दलों के पंजीकरण का वैधानिक अधिकार है, किंतु निर्वाचन आयोग के पास किसी पंजीकृत राजनीतिक दल के पंजीकरण को रद्द करने (De-register) की कोई प्रत्यक्ष शक्ति मूल अधिनियम में प्रदत्त नहीं थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान की आठवीं अनुसूची में अंग्रेजी (English) और राजस्थानी (Rajasthani) भाषा को शामिल नहीं किया गया है। वर्तमान में इसमें 22 भाषाएँ हैं, जिनमें बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को 92वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। कथन 2 सही है; 52वें संविधान संशोधन 1985 द्वारा दसवीं अनुसूची जोड़ी गई और पीठासीन अधिकारी का निर्णय अंतिम होता है, लेकिन 'कीजोहो होलोहन वाद (1992)' में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि स्पीकर का निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है। कथन 3 सही है; लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के अंतर्गत चुनाव आयोग दलों का पंजीकरण तो करता है, किंतु धोखाधड़ी से पंजीकरण जैसी स्थितियों को छोड़कर सीधे तौर पर पंजीकरण रद्द करने की अंतर्निहित शक्ति आयोग के पास मूल रूप से नहीं है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति (अनुच्छेद 123) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति संसद की विधि बनाने की शक्ति के सह-विस्तृत (co-extensive) है, जिसका अर्थ है कि राष्ट्रपति केवल उन्हीं विषयों पर अध्यादेश प्रख्यापित कर सकता है जिन पर संसद कानून बनाने की शक्ति रखती है।
2. सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक 'डी.सी. वाधवा वाद (1987)' के निर्णय के अनुसार, राज्य या केंद्र स्तर पर अध्यादेशों का बार-बार पुनरप्रख्यापन (re-promulgation) संवैधानिक धोखाधड़ी और कार्यपालिका की तानाशाही माना गया है, क्योंकि यह विधायिका के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही को कमजोर करता है।
3. राष्ट्रपति द्वारा जारी किया गया प्रत्येक अध्यादेश संसद के पुनः समवेत होने के ठीक छह सप्ताह की अवधि के भीतर या उससे पूर्व ही दोनों सदनों द्वारा अस्वीकार किए जाने वाले संकल्प के पारित होने पर स्वतः निष्प्रभावी हो जाता है, किंतु यदि दोनों सदन अलग-अलग तारीखों पर पुनः समवेत होते हैं, तो छह सप्ताह की यह गणना उस तिथि से की जाएगी जिस तारीख को बाद वाला सदन सत्र में आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के कुल सदस्यों में से ब्रिटिश प्रांतों के 293 प्रतिनिधि और देशी रियासतें के 93 प्रतिनिधि शामिल थे, तथा प्रत्येक प्रांत की सीटों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में तीन प्रमुख समुदायों- मुस्लिम, सिख और सामान्य (Muslim, Sikh and General) में विभाजित किया गया था।
2. संविधान के निर्माण के लिए संविधान सभा द्वारा कई समितियों का गठन किया गया था, जिनमें संघ संविधान समिति और प्रांतीय संविधान समिति दोनों के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे।
3. प्रारूप समिति (Drafting Committee), जिसे संविधान का प्रारूप तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया था, में अध्यक्ष सहित कुल 7 सदस्य थे और इसका गठन 29 अगस्त 1947 को किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत का राष्ट्रपति त्यागपत्र किसे देता है?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य किसी सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से केवल साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय की संस्तुति के पश्चात ही हटाया जा सकता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने की शक्ति भी केवल राष्ट्रपति के पास ही होती है, राज्यपाल के पास नहीं।
2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 6 वर्ष की अवधि या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक निर्धारित किया गया है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होने के लिए पात्र होता है, किंतु वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य रोजगार का पात्र नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित विभिन्न अधिनियमों (रेगुलेटिंग एक्ट्स एवं चार्टर अधिनियमों) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के माध्यम से बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इसी अधिनियम के तहत कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना की गई जिसमें मुख्य न्यायाधीश सहित कुल चार न्यायाधीश थे।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनीतिक और वाणिज्यिक कार्यों को पृथक कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) की स्थापना की गई जो कंपनी के नागरिक, सैन्य और राजस्व संबंधी मामलों की देखरेख करता था, और इस प्रकार द्वैध शासन प्रणाली (Double Government) की शुरुआत हुई।
3. चार्टर अधिनियम, 1833 द्वारा बंगाल के गवर्नर-जनरल को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बना दिया गया और देश की शासन प्रणाली में पहली बार 'खुली प्रतियोगिता प्रणाली' (Open Competition System) के आधार पर सिविल सेवकों के चयन का विधिवत प्रयास किया गया, जिसे निदेशक कोर्ट (Court of Directors) के कड़े विरोध के कारण तुरंत निष्प्रभावी कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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