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Indian Polity
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा की विभिन्न समितियों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान सभा द्वारा कुल 22 प्रमुख और छोटी समितियों का गठन किया गया था, जिनमें प्रक्रिया नियम समिति (Rules of Procedure Committee) के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि प्रांतीय संविधान समिति (Provincial Constitution Committee) की अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी।
- 2. प्रारूप समिति (Drafting Committee), जिसे संविधान का मसविदा तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व सौंपा गया था, का गठन 29 अगस्त 1946 को किया गया था और इसमें अध्यक्ष सहित कुल सात सदस्य शामिल थे।
- 3. संविधान सभा के शुरुआती चरणों में रियासतों (Princely States) के प्रतिनिधि सभा में शामिल नहीं हुए थे, किंतु बाद में 28 अप्रैल 1947 को प्रस्तुत दूसरे चरण के प्रतिवेदन के बाद अधिकांश रियासतों के प्रतिनिधियों ने संविधान सभा की बैठकों में भाग लेना शुरू कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान सभा ने अपने कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई समितियों का गठन किया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद प्रक्रिया नियम समिति, संचालन समिति और वित्त एवं कर्मचारी समिति के अध्यक्ष थे, जबकि सरदार वल्लभभाई पटेल प्रांतीय संविधान समिति और मौलिक अधिकार एवं अल्पसंख्यकों से संबंधित सलाहकार समिति के अध्यक्ष थे। कथन 2 गलत है: प्रारूप समिति (Drafting Committee) का गठन 29 अगस्त **1947** को हुआ था, न कि 1946 को। इसके अध्यक्ष डॉ. बी. आर. अंबेडकर थे और इसमें कुल 7 सदस्य थे। कथन 3 गलत है: रियासतों के प्रतिनिधि प्रारंभ में संविधान सभा से दूर रहे थे, क्योंकि वे अपनी संप्रभुता बनाए रखना चाहते थे, किंतु 28 अप्रैल 1947 को जब संविधान सभा का तृतीय चरण (Third Session) प्रारंभ हुआ, तब तक छह राज्यों (बड़ौदा, मैसूर, त्रावणकोर, बीकानेर, जयपुर और रीवा) के प्रतिनिधि सभा में शामिल हो चुके थे, न कि दूसरे चरण में। विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था देख सकते हैं।
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भारतीय संविधान में महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा घोषित राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में चुनौती (Judicial Review) नहीं दी जा सकती है, किंतु इस अलोकतांत्रिक प्रावधान को बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया।
2. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा के लिए मंत्रिमंडल (Cabinet) की लिखित सिफारिश का होना आवश्यक है, न कि केवल प्रधानमंत्री की मौखिक सलाह।
3. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल अधिकारों का स्वतः निलंबन केवल तभी हो सकता है जब आपातकाल की उद्घोषणा 'युद्ध' या 'बाह्य आक्रमण' के आधार पर की गई हो, 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्यों की पदावधि उनके पद ग्रहण करने की तिथि से छह वर्ष की अवधि या पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) होती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के लिए यह आयु सीमा बासठ वर्ष निर्धारित की गई है।
2. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से केवल 'कदाचार' (Misbehavior) के आधार पर ही हटाया जा सकता है, और कदाचार के इस आरोप की जांच उच्चतम न्यायालय द्वारा की जाती है, जिसके द्वारा दी गई सलाह राष्ट्रपति पर पूर्ण रूप से बाध्यकारी होती है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी सदस्य को हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है, भले ही उनकी नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें निलंबित करने का अधिकार केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल को प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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