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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनसे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 19(1)(g) भारत के सभी नागरिकों को कोई भी वृत्ति, व्यापार या कारोबार करने का अधिकार देता है, किंतु राज्य को इस अधिकार पर 'व्यापक लोक हित' (General Public Interest) में युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने तथा किसी व्यापार या कारोबार के पूर्णतः या भागतः राज्य द्वारा राजकीय स्वामित्व (State Monopoly) स्थापित करने के लिए कानून बनाने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है।
- 2. अनुच्छेद 21 के अंतर्गत दिए गए 'प्राण और दैहिक स्वतंत्रता के संरक्षण' के दायरे में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णयों के माध्यम से 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) को एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, और यह अधिकार पूर्ण एवं असीमित है, जिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा या लोक व्यवस्था के आधार पर भी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है।
- 3. अनुच्छेद 32 के तहत 'संवैधानिक उपचारों का अधिकार' स्वयं में एक मूल अधिकार है, जिसके अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus), परमादेश (Mandamus), प्रतिषेध (Prohibition), अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto) और उत्प्रेषण (Certiorari) रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और संसद विधि द्वारा किसी अन्य न्यायालय को भी अपनी स्थानीय अधिकारिता के भीतर इन रिटों को जारी करने की शक्ति प्रदान कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 19(6) के अनुसार, अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत प्राप्त व्यापार और कारोबार की स्वतंत्रता पर राज्य को 'व्यापक लोक हित' में युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने की शक्ति है। इसके साथ ही राज्य को किसी व्यापार, व्यवसाय, उद्योग या सेवा को पूर्ण या आंशिक रूप से अपने नियंत्रण में लेने (State Monopoly) का भी अधिकार है।
कथन 2 गलत है: 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) को सर्वोच्च न्यायालय ने 'पुट्टस्वामी वाद (2017)' में अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार घोषित किया है, किंतु यह अधिकार पूर्ण (Absolute) नहीं है। इस पर राष्ट्रीय सुरक्षा, लोक व्यवस्था और अपराध की रोकथाम जैसे वैध आधारों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करता है, और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को भी यह शक्ति प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 32 के खंड (3) के अनुसार संसद कानून बनाकर किसी अन्य न्यायालय को भी अपनी अधिकारिता के भीतर इन रिटों को जारी करने की शक्ति दे सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
कथन 2 गलत है: 'निजता का अधिकार' (Right to Privacy) को सर्वोच्च न्यायालय ने 'पुट्टस्वामी वाद (2017)' में अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार घोषित किया है, किंतु यह अधिकार पूर्ण (Absolute) नहीं है। इस पर राष्ट्रीय सुरक्षा, लोक व्यवस्था और अपराध की रोकथाम जैसे वैध आधारों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
कथन 3 सही है: अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करता है, और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों को भी यह शक्ति प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 32 के खंड (3) के अनुसार संसद कानून बनाकर किसी अन्य न्यायालय को भी अपनी अधिकारिता के भीतर इन रिटों को जारी करने की शक्ति दे सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि किसी राज्य के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, तथा इनमें से किसी भी आयोग के आधे से अधिक सदस्यों के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि उन्होंने नियुक्ति की तिथि से ठीक पहले भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम से कम दस वर्षों तक पद धारण किया हो।
2. संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत लोक सेवा आयोग के किसी भी सदस्य या अध्यक्ष को केवल कदाचार के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा उसके पद से हटाया जा सकता है, और राष्ट्रपति के आदेश के लिए सर्वोच्च न्यायालय की संस्तुति आवश्यक होती है, बशर्ते राष्ट्रपति द्वारा ऐसा मामला जाँच के लिए उच्चतम न्यायालय को भेजा गया हो और न्यायालय ने अपनी जाँच के पश्चात हटाने की सलाह दी हो।
3. अनुच्छेद 321 के अनुसार, संसद या किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाई गई विधियों के माध्यम से क्रमशः संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यों के दायरे को बढ़ाया जा सकता है, किंतु राज्य लोक सेवा आयोग के कृत्यों के दायरे को किसी भी परिस्थिति में राज्यपाल के अनुमोदन से संसद द्वारा विस्तारित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान में 'दलबदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) किस अनुसूची में है?
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