त्वरित लिंक्स
Indian Polity
1 views
भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं की विधायी शक्तियों से संबंधित कुल 18 कार्यात्मक विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।
- 2. अधिनियम के अनुसार नगरपालिकाओं के तीन प्रकार (नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम) का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु 10 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए केवल 'नगर निगम' का गठन ही एकमात्र विकल्प है।
- 3. नगरपालिकाओं के सभी पदों के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन वार्डों की प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे जनता द्वारा होता है, किंतु इसके अतिरिक्त राज्य विधानमंडल विधि द्वारा संसद या राज्य विधानसभा के सदस्यों और लोकसभा/राज्यसभा सदस्यों को नगरपालिका की बैठकों में विशेष मताधिकार के साथ पदेन सदस्य के रूप में नामित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में नया भाग IX-A (अनुच्छेद 243-P से 243-ZG) और बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें नगरपालिकाओं के दायरे में आने वाले 18 कार्यात्मक विषय शामिल हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि 3 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए 'नगर निगम' (Municipal Corporation) का गठन किया जाता है, न कि केवल 10 लाख, और 10 लाख की जनसंख्या महानगर (Metropolitan Area) की जिला योजना समिति के गठन के संदर्भ में प्रासंगिक है। कथन 3 गलत है क्योंकि संसद और राज्य विधानमंडल के सदस्यों को नगरपालिका में प्रतिनिधित्व तो दिया जा सकता है, किंतु उन्हें नगरपालिकाओं की बैठकों में 'मतदान का अधिकार' (Right to Vote) प्राप्त नहीं होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
→
प्रकृति में सबसे सशक्त बल है?
→
संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'विशिष्ट दर्जा' प्राप्त राज्यों के प्रावधानों से संबंधित है?
→
भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत नगरपालिकाओं की संरचना, वार्ड कमेटियों के गठन तथा जिला एवं महानगर योजना समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-S के अनुसार, तीस लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए एक महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee) का गठन किया जाएगा, जो उस महानगर क्षेत्र के लिए विकास योजना तैयार करेगी, और इस समिति के कुल सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई सदस्य महानगर क्षेत्र में निर्वाचित नगरपालिका के पार्षदों और नगर निगमों के अध्यक्षों द्वारा अपने में से ही चुने जाएंगे।
2. अनुच्छेद 243-Q के प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य में संक्रमणकालीन क्षेत्र के लिए नगर पंचायत, लघु नगरीय क्षेत्र के लिए नगरपालिका परिषद और वृहत्तर नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाएगा, किंतु राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा किसी शहरी क्षेत्र को औद्योगिक नगरी घोषित कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप उस क्षेत्र के लिए नगरपालिका का गठन करना संसद की पूर्व अनुमति से अनिवार्य हो जाता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 243-S के अंतर्गत ही तीन लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले नगरपालिका क्षेत्र के प्रादेशिक क्षेत्र के भीतर एक या अधिक वार्डों को मिलाकर 'वार्ड समितियों' (Ward Committees) के गठन का प्रावधान किया गया है, जिसके गठन और संरचना से संबंधित नियम राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान की प्रस्तावना में 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्शों को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है, जबकि 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरित होकर शामिल किया गया है।
2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते यह संशोधन संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचाए।
3. बेरूबारी यूनियन बाद (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है, इसलिए विधायिका इसमें संशोधन करने की शक्ति नहीं रखती है, और इस स्थिति को आज भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्णतः अपरिवर्तित रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 74वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में 'भाग IX-क' जोड़ा गया जिसमें अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा इसके अंतर्गत नगरपालिकाओं के तीन प्रकार (नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम) के गठन का प्रावधान किया गया है।
2. इस संशोधन के तहत प्रत्येक नगरपालिका में महिलाओं के लिए कुल विनिर्मित सीटों का कम से कम एक-तिहाई (33%) स्थान आरक्षित होना अनिवार्य किया गया है, किंतु यह आरक्षण केवल प्रत्यक्ष रूप से चुने जाने वाले सदस्यों तक ही सीमित है, अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर महिलाओं के लिए ऐसा कोई संवैधानिक आरक्षण अनिवार्य नहीं है।
3. नगरपालिकाओं के वित्तीय संसाधनों की समीक्षा और उनके बीच करों के बँटवारे की सिफारिश करने के लिए प्रत्येक राज्य में एक 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) के गठन का प्रावधान अनुच्छेद 243-Y के अंतर्गत किया गया है, जो पंचायतों और नगरपालिकाओं दोनों के वित्तीय मामलों की संस्तुति राज्यपाल को सौंपता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.