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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार) के अंतर्गत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों (अनुच्छेद 25-28) तथा उनसे संबंधित न्यायिक दृष्टांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रत्येक व्यक्ति को अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्राप्त है, किंतु यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य तथा इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन है, और इसके तहत राज्य को किसी भी धार्मिक आचरण से जुड़ी आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक या अन्य किसी लौकिक क्रियाकलाप का विनियमन या निर्बंधन करने का पूर्ण अधिकार है।
- 2. अनुच्छेद 26 प्रत्येक धार्मिक संप्रदाय या उसके किसी अनुभाग को धार्मिक और पूर्त प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण करने, अपने धर्म के विषयों में कार्यों का प्रबंधन करने, तथा ऐसी संपत्ति के अर्जन, स्वामित्व और प्रशासन का अधिकार प्रदान करता है, और यह अधिकार पूर्णतः निरपेक्ष (Absolute) है, जिसे किसी भी विधि द्वारा राज्य के नियंत्रण में नहीं लाया जा सकता है।
- 3. अनुच्छेद 27 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को ऐसे करों का भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है जिनकी आय किसी विशिष्ट धर्म या धार्मिक संप्रदाय की अभिवृद्धि या पोषण के लिए विशेष रूप से व्यय की जाती है, जिसका अर्थ यह है कि राज्य द्वारा किसी धार्मिक उद्देश्य के प्रोत्साहन के लिए वसूला जाने वाला शुल्क (Fee) या कर पूरी तरह से असंवैधानिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता (سد/سदाचार), स्वास्थ्य और भाग III के अन्य प्रावधानों के अधीन है। इसके साथ ही अनुच्छेद 25(2)(a) के अनुसार राज्य को किसी भी धार्मिक आचरण से जुड़े आर्थिक, वित्तीय, राजनीतिक या अन्य लौकिक (Secular) क्रियाकलापों का विनियमन या निर्बंधन करने की शक्ति प्राप्त है। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक संप्रदायों को अपनी संपत्ति के प्रशासन का अधिकार प्राप्त है, किंतु यह अधिकार भी 'सार्वजनिक व्यवस्था, सदाचार और स्वास्थ्य' के अधीन है, और संपत्ति के प्रशासन के नियमन के लिए राज्य द्वारा विधियाँ बनाई जा सकती हैं; यह अधिकार निरपेक्ष नहीं है। कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 27 यह प्रतिषेध करता है कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे कर (Tax) के भुगतान के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा जिसकी आय किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए व्यय की जाती है, किंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि राज्य 'शुल्क' (Fee) नहीं वसूल सकता। राज्य धार्मिक संस्थाओं के प्रशासन को विनियमित करने या धार्मिक संस्थानों से मिलने वाली सेवाओं के बदले प्रशासनिक खर्च के रूप में शुल्क (Fee) आरोपित कर सकता है, शुल्क और कर में यह संवैधानिक अंतर होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल का अध्ययन करें।
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, 'रेगुलेटिंग एक्ट, 1773' और 'पिट्स इंडिया एक्ट, 1784' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पद नाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, तथा इसी अधिनियम के तहत कलकत्ता में एक सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) की स्थापना की गई जिसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के द्वारा कंपनी के व्यापारिक और राजनीतिक कार्यों को पृथक् कर दिया गया; व्यापारिक मामलों के प्रबंधन के लिए 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' (Board of Control) और राजनीतिक मामलों के लिए 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' (Court of Directors) की स्थापना की गई।
3. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के अंतर्गत ही पहली बार ब्रिटिश सरकार ने कंपनी के कर्मचारियों द्वारा निजी व्यापार करने तथा भारतीयों से उपहार व घूस लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के भाग III (मूल अधिकार - अनुच्छेद 12-35) के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों और उनके न्यायिक निर्णयों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द के व्यापक दायरे में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अलावा अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम तथा रूढ़ि या प्रथा (Custom or Usage) को भी शामिल किया गया है, यदि वे भाग III के प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं तो उन्हें शून्य घोषित किया जा सकता है।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'ऐडीएम जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला' (1976) के ऐतिहासिक निर्णय में यह प्रतिपादित किया था कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा संवैधानिक रूप से स्पष्ट कर दिया गया।
3. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत संवैधानिक उपचारों के अधिकार को डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 'संविधान का हृदय और आत्मा' कहा था, तथा सर्वोच्च न्यायालय ने 'चंद्र कुमार मामले' (1997) में यह निर्णय दिया कि न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे संसद द्वारा भी किसी सांविधिक न्यायाधिकरण (Tribunal) को प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अधिकारिता, शक्तियों और प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 141 के अनुसार उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित किया गया विधि भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर सभी न्यायालयों पर आबद्धकर (Binding) होता है, किंतु स्वयं उच्चतम न्यायालय अपने पूर्ववर्ती निर्णयों या आदेशों से पूर्णतः बाध्य नहीं होता है और अपने निर्णयों का पुनरावलोकन (Review) कर सकता है।
2. अनुच्छेद 142 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए ऐसा डिक्री या आदेश पारित करने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है जो उसके समक्ष लंबित किसी वाद या विषय में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक हो, और संसद द्वारा बनाई गई किसी भी विधि के असंगत होने पर भी सर्वोच्च न्यायालय का ऐसा आदेश पूरे भारत में प्रवर्तनीय होता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 145 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को राष्ट्रपति के अनुमोदन से संसद द्वारा बनाई गई विधियों के अधीन, न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया के विनियमन के लिए नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है, तथा संविधान के किसी निर्वाचन या व्याख्या से संबंधित मामलों (अनुच्छेद 143 के परामर्श को छोड़कर) की सुनवाई करने वाली संविधान पीठ (Constitution Bench) में न्यायाधीशों की न्यूनतम संख्या सात होना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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वर्तमान में भारतीय संविधान में कुल कितने मौलिक कर्तव्य हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य विधानमंडल (विधानसभा और विधान परिषद) की संरचना, शक्तियों और विधायी प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 169 के अनुसार संसद किसी राज्य में विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए विधि बना सकती है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से इस आशय का संकल्प पारित कर दे।
2. राज्य विधान परिषद में कुल सदस्यों की संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, और किसी भी स्थिति में विधान परिषद में सदस्यों की न्यूनतम संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए (अपवादस्वरूप जम्मू-कश्मीर का इतिहास छोड़ दें)।
3. धन विधेयक (Money Bill) केवल विधान परिषद में ही पुनः स्थापित किया जा सकता है, और यदि विधान परिषद धन विधेयक को 14 दिनों के भीतर वापस नहीं करती है, तो उसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है, तथा विधान परिषद के पास धन विधेयक में संशोधन करने की पूर्ण शक्ति होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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