त्वरित लिंक्स
Indian Polity
20 views
भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 द्वारा यह उपबंधित किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की घोषणा को किसी भी न्यायालय में न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा, जिसे बाद में 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया।
- 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति संपूर्ण देश में या उसके किसी विशिष्ट भाग में एक साथ राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर सकता है, तथा देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग आधारों पर एक साथ एकाधिक राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणाएँ भी प्रख्यापित कर सकता है।
- 3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा उसकी घोषणा की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत (Special Majority) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, जिसे मूल संविधान में दो महीने रखा गया था और बाद में 44वें संशोधन द्वारा इसे घटाकर एक महीना किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भारतीय संविधान के आपातकालीन उपबंधों और उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों का परीक्षण निम्नलिखित तर्कों के आधार पर किया जाता है:
1. कथन 1 सही है: 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के माध्यम से यह जोड़ा गया था कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 352 के तहत की गई राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को न्यायपालिका में चुनौती नहीं दी जा सकती। हालांकि, जनता पार्टी सरकार द्वारा लाए गए 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इस प्रावधान को निरस्त कर दिया गया और आपातकाल की न्यायिक समीक्षा को पुनर्जीवित किया गया।
2. कथन 2 सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने राष्ट्रपति को यह शक्ति दी कि वह संपूर्ण देश या उसके किसी हिस्से में राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर सकता है और विभिन्न आधारों पर एक साथ कई उद्घोषणाएँ भी कर सकता है।
3. कथन 3 सही है: मूल संविधान में राष्ट्रीय आपातकाल के अनुमोदन की समयावधि दो महीने थी, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा घटाकर एक महीना कर दिया गया। इसके अलावा, इसके अनुमोदन के लिए संसद के दोनों सदनों का विशेष बहुमत आवश्यक होता है।
अधिक जानकारी और विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
1. कथन 1 सही है: 38वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1975 के माध्यम से यह जोड़ा गया था कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 352 के तहत की गई राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को न्यायपालिका में चुनौती नहीं दी जा सकती। हालांकि, जनता पार्टी सरकार द्वारा लाए गए 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इस प्रावधान को निरस्त कर दिया गया और आपातकाल की न्यायिक समीक्षा को पुनर्जीवित किया गया।
2. कथन 2 सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने राष्ट्रपति को यह शक्ति दी कि वह संपूर्ण देश या उसके किसी हिस्से में राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर सकता है और विभिन्न आधारों पर एक साथ कई उद्घोषणाएँ भी कर सकता है।
3. कथन 3 सही है: मूल संविधान में राष्ट्रीय आपातकाल के अनुमोदन की समयावधि दो महीने थी, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा घटाकर एक महीना कर दिया गया। इसके अलावा, इसके अनुमोदन के लिए संसद के दोनों सदनों का विशेष बहुमत आवश्यक होता है।
अधिक जानकारी और विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
Related Questions
→
खाद्य श्रृंखला में सबसे ज्यादा संख्या किसकी होती है?
→
भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और वित्तीय विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 117(1) के अंतर्गत ऐसा वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-I), जिसमें अनुच्छेद 110 में उल्लिखित विशिष्ट मामले शामिल होते हैं, केवल लोकसभा में ही पुनःस्थापित किया जा सकता है और इसे पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक होती है, किंतु इसके पारित होने की प्रक्रिया साधारण विधेयक के समान ही दोनों सदनों में समान शक्तियों के साथ होती है।
2. अनुच्छेद 117(3) के तहत आने वाले वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-II), जो केवल भारत की संचित निधि से व्यय आकर्षित करते हैं, को संसद के किसी भी सदन में पुनःस्थापित किया जा सकता है, किंतु राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना इस पर विचार नहीं किया जा सकता है।
3. दोनों सदनों के बीच विधायी गतिरोध की स्थिति में संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत बुलाई जाने वाली संयुक्त बैठक का प्रावधान धन विधेयक (Money Bill) और संविधान संशोधन विधेयकों के साथ-साथ वित्तीय विधेयकों (Category-I और Category-II दोनों) के लिए भी पूरी तरह से लागू होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I (अनुच्छेद 1-4) के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार 'भारत' अर्थात 'इंडिया' राज्यों का संघ (Union of States) होगा, न कि राज्यों का फेडरेशन (Federation of States), क्योंकि यह व्यवस्था इस तथ्य को दर्शाती है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच हुए किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने (Secession) का कोई अधिकार प्राप्त है।
2. अनुच्छेद 3 के तहत संसद को किसी राज्य के क्षेत्रफल, सीमा या नाम में परिवर्तन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रयोजन के लिए राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास भेजा गया विचार या मत राष्ट्रपति या संसद पर किसी भी स्थिति में बाध्यकारी नहीं होता है, भले ही राज्य विधानमंडल ने निश्चित समयावधि के भीतर अपना मत प्रेषित कर दिया हो।
3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'बेरूबाड़ी यूनियन वाद' (1960) में दिए गए परामर्श के विपरीत, वर्ष 1969 में उच्चतम न्यायालय ने अपने एक अन्य निर्णय में यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय क्षेत्र के किसी हिस्से को किसी विदेशी देश को सौंपने (Cession of Territory) के लिए संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसे कार्यपालिका के कार्यकारी आदेश (Executive Action) द्वारा ही संपन्न किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया किस देश के संविधान से प्रेरित है?
→
भारतीय संविधान के भाग-IV के अंतर्गत वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP) और उनके विशिष्ट अनुच्छेदों के क्रियान्वयन एवं न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 43 के अंतर्गत राज्य, उपयुक्त विधान या आर्थिक संगठन द्वारा या किसी अन्य रीति से, कृषि के, उद्योग के या अन्य प्रकार के सभी श्रमिकों को काम, निर्वाह मजदूरी, शिष्ट जीवन स्तर और अवकाश तथा सामाजिक और सांस्कृतिक अवसरों की सुलभ कराने का प्रयास करेगा, तथा विशेष रूप से राज्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
2. संविधान के अनुच्छेद 45 के अंतर्गत मूलतः 14 वर्ष की आयु पूरी करने तक सभी बालकों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान था, किंतु 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2001 द्वारा इस अनुच्छेद की विषय-वस्तु को परिवर्तित कर इसे 'प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा' (Early childhood care and education) से संबंधित बना दिया गया, जिसे अब 6 वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए उपबंधित किया गया है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' और उसके पश्चात के कई निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि यद्यपि नीति निर्देशक तत्व मूल अधिकारों से सीधे तौर पर श्रेष्ठ नहीं हैं, किंतु यदि संसद अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में निर्दिष्ट सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनुच्छेद 31C के तहत कोई कानून बनाती है, तो उसे इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के अधिकारों का उल्लंघन करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.