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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के प्रावधानों और ऐतिहासिक राज्यों के पुनर्गठन आयोगों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत का वर्णन 'राज्यों का संघ' (Union of States) के रूप में किया गया है, न कि 'राज्यों का परिसंघ' (Federation of States), क्योंकि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार है।
  2. 2. भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग की जाँच के लिए वर्ष 1948 में गठित 'धर आयोग' (Linguistic Provinces Commission) और वर्ष 1949 में गठित 'जेवीपी समिति' (JVP Committee) दोनों ने ही प्रशासनिक सुविधा को भाषाई आधार की तुलना में अधिक प्राथमिकता देते हुए भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग को अस्वीकार कर दिया था।
  3. 3. वर्ष 1953 में न्यायमूर्ति फज़ल अली की अध्यक्षता में गठित 'राज्य पुनर्गठन आयोग' ने अपनी रिपोर्ट में भाषा को राज्यों के पुनर्गठन का एकमात्र और सर्वोपरि आधार स्वीकार किया, तथा मूल रूप से उसने देश में 16 राज्यों और 3 संघ राज्य क्षेत्रों के गठन की संस्तुति की थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 1 में 'भारत, अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ होगा' कहा गया है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार 'राज्यों का संघ' शब्दावली का दो कारणों से चयन किया गया था—पहला, भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी आपसी समझौते का परिणाम नहीं है; और दूसरा, किसी भी राज्य को संघ से अलग होने (Secession) का अधिकार नहीं है। कथन 2 सही है: जून 1948 में गठित एस.के. धर आयोग और दिसंबर 1948 में गठित जेवीपी समिति (जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और पट्टाभि सीतारमैया) दोनों ने ही भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन का विरोध किया और प्रशासनिक सुविधा, भौगोलिक तथा आर्थिक कारको को प्राथमिकता दी। कथन 3 गलत है: फज़ल अली आयोग (1953) ने राज्यों के पुनर्गठन में 'भाषा के आधार पर राज्यों' की बात को तो स्वीकार किया था, किंतु 'एक राज्य-एक भाषा' के सिद्धांत को खारिज कर दिया था। इसके अलावा, आयोग ने अपनी मूल रिपोर्ट में 16 राज्यों और 3 संघ राज्य क्षेत्रों के बजाय **14 राज्यों और 6 संघ राज्य क्षेत्रों** के गठन की संस्तुति की थी। भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए इस पोर्टल का संदर्भ लें।
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