त्वरित लिंक्स
Indian Polity
1 views
भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग एक अखिल भारतीय निकाय है जो संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का संचालन करता है, किंतु मूल संविधान में निर्वाचन आयोग को एक बहु-सदस्यीय (Multi-member) निकाय के रूप में स्थापित किया गया था जिसे बाद में 1989 में एक-सदस्यीय बनाया गया।
- 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत चुनाव प्रचार पर रोक (Silence Period) के प्रावधान के अंतर्गत मतदान समाप्त होने के लिए निर्धारित समय से ठीक पहले के 48 घंटों की अवधि के दौरान किसी भी सार्वजनिक सभा, जुलूस, या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से चुनाव प्रचार करने पर पूर्ण प्रतिबंध होता है।
- 3. निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को हटाने की प्रक्रिया और उनके वेतन-भत्ते सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के पूर्णतः समान होते हैं, तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत और राष्ट्रपति की संस्वीकृति अनिवार्य होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि मूल संविधान में निर्वाचन आयोग को एक-सदस्यीय निकाय (केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त) के रूप में स्थापित किया गया था। इसे पहली बार 16 अक्टूबर 1989 को राष्ट्रपति द्वारा दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति करके बहु-सदस्यीय बनाया गया था। कथन 2 सही है; जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के अनुसार मतदान समाप्त होने के समय से ठीक पहले के 48 घंटों की अवधि 'साइंस पीरियड' होती है जिसमें जनसभाओं और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर चुनाव प्रचार प्रतिबंधित रहता है। कथन 3 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, और उनके वेतन-भत्ते उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीशों के समान होते हैं, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान नहीं (मुख्य निर्वाचन आयुक्त के वेतन-भत्ते सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होते हैं)। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर पढ़ सकते हैं।
Related Questions
→
प्रथम वित्त आयोग कब गठित हुआ?
→
भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं के गठन, वित्तीय शक्तियों और उनके संरचनात्मक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-B के तहत प्रत्येक राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर पर पंचायतों का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या बीस लाख से अधिक नहीं है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करने की छूट दी गई है।
2. अनुच्छेद 243-I के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक राज्य का राज्यपाल, इस अधिनियम के प्रारंभ होने के एक वर्ष के भीतर और तत्पश्चात हर पाँच वर्ष की समाप्ति पर, पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए एक वित्त आयोग का गठन करेगा।
3. अनुच्छेद 243-D के अंतर्गत पंचायतों के सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए कुल सीटों के कम से कम एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जानी अनिवार्य हैं, और यह आरक्षण अनुसूचित जातियों तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीटों की कुल संख्या पर भी लागू होता है, साथ ही कुछ राज्यों ने इसे बढ़ाकर 50% कर दिया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और अंतर-राज्यीय परिषद् के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 249 के अनुसार, यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद को पूरे देश या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर विधि बनाने की शक्ति मिल जाती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम दो वर्षों के लिए प्रवृत्त रहता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को 'अंतर-राज्यीय परिषद्' (Inter-State Council) की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, ऐसे विषयों पर सलाह देना जिनमें राज्यों के समान हित हों, तथा नीतिगत समन्वय पर विचार करना है, जिसके निर्णय न्यायालय के आदेश की तरह सभी पक्षों पर बाध्यकारी होते हैं।
3. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की संस्तुति के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद् को एक स्थायी निकाय के रूप में स्थापित किया गया था, और इस परिषद् की बैठकों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, जबकि सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके स्थायी सदस्य होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री की नियुक्ति से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति उसकी विधायी शक्ति का अभिन्न अंग है, और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के अनुसार राज्यपाल द्वारा अध्यादेश प्रख्यापित करने की संतुष्टि न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूर्णतः बाहर है तथा इसे किसी भी न्यायालय में दुर्भावना के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।
2. अनुच्छेद 164 के अनुसार राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री की सलाह पर की जाती है; इसके अतिरिक्त, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातियों के कल्याण के लिए भारसाधक एक पृथक् मंत्री का होना अनिवार्य किया गया है, जिसके पास बिहार राज्य का प्रभार भी अतिरिक्त रूप से होता है।
3. राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति (अनुच्छेद 161) के अंतर्गत उसे राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों से संबंधित विधियों के विरुद्ध किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलंबन, विराम या परिहार करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राज्यपाल को सेना के न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड को क्षमा करने तथा मृत्युदंड (Death Sentence) के मामलों में संपूर्ण क्षमादान देने की संवैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय संविधान के भाग I के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 'संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना' कर सके, जिसका संबंध मुख्य रूप से उन भू-भागों से है जो भारतीय संघ का हिस्सा नहीं हैं, जबकि अनुच्छेद 3 'भारतीय संघ के भीतर मौजूद राज्यों' के पुनर्गठन से संबंधित है।
2. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य के क्षेत्रफल को बढ़ाने, घटाने या उसके नाम में परिवर्तन करने वाला कोई भी विधेयक संसद के किसी भी सदन में राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Recommendation) के बिना ही पुनः स्थापित किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 4 के अनुसार, अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के तहत बनाए गए नए राज्यों के प्रवेश या राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित कानून संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए 'संविधान संशोधन' माने जाएंगे, जिसके लिए विशेष बहुमत का होना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.