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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों (DPSP - अनुच्छेद 36-51) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 44 में 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का उपबंध किया गया है, जिसे लागू करना राज्य का कर्तव्य है, और यह एकमात्र ऐसा नीति निर्देशक तत्व है जो संपूर्ण भारत के राज्यक्षेत्र में एक समान रूप से लागू हो चुका है।
- 2. संविधान के अनुच्छेद 45 के अंतर्गत प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा (Early Childhood Care and Education) का प्रावधान मूल संविधान में 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए किया गया था, जिसे बाद में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा संशोधित किया गया।
- 3. सर्वोच्च न्यायालय ने कई ऐतिहासिक निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि नीति निर्देशक तत्व और मौलिक अधिकार एक-दूसरे के पूरक हैं, तथा निर्देशक तत्वों को लागू करने के लिए मौलिक अधिकारों (विशेषकर अनुच्छेद 14 और 19) में संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते वह संविधान के मूल ढांचे (Basic Structure) का उल्लंघन न करे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 44 के तहत 'समान नागरिक संहिता' का प्रावधान नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत है, और यह देश भर में स्वचालित रूप से या एक समान रूप से लागू नहीं है (इसे लागू करने का अधिकार राज्यों और संसद पर निर्भर करता है, हालांकि गोवा में पुर्तगाली सिविल कोड के रूप में इसका आंशिक रूप लागू होना एक अलग वैधानिक इतिहास रखता है, किंतु यह कहना गलत है कि यह संपूर्ण भारत में लागू हो चुका है)। कथन 2 असत्य है क्योंकि मूल संविधान के अनुच्छेद 45 में '14 वर्ष की आयु पूरी करने तक सभी बालकों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने' का प्रावधान था, जिसे 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 (न कि 2003) द्वारा संशोधित करके 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख का प्रावधान बनाया गया, जबकि 6-14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा को अनुच्छेद 21A के तहत मूल अधिकार बनाया गया। कथन 3 पूरी तरह सत्य है; मिनर्वा मिल वाद (1980) और केशवानंद भारती वाद जैसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्थापित किया कि मौलिक अधिकार और नीति निर्देशक तत्व एक रथ के दो पहियों के समान हैं और दोनों में संतुलन संविधान की मूल विशेषता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था को पढ़ें।
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1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में नया भाग IX-A जोड़ा गया है, जिसमें अनुच्छेद 243P से 243ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई है जिसमें नगरपालिकाओं की शक्तियों और उत्तरदायित्वों से संबंधित 18 कार्यकारी विषय दिए गए हैं।
2. नगरपालिकाओं के सभी तीनों स्तरों (नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम) के सभी सदस्यों का चुनाव क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष रूप से होता है, और इस अधिनियम में यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक नगरपालिका में अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में होना चाहिए, तथा महिलाओं के लिए कुल सीटों का कम से कम एक-तिहाई (33%) हिस्सा आरक्षित रहेगा।
3. प्रत्येक नगरपालिका की समयावधि उसकी प्रथम बैठक के लिए नियत तारीख से पाँच वर्ष की होती है, किंतु यदि किसी नगरपालिका का विघटन छह महीने से कम की शेष अवधि के लिए होता है, तो ऐसी स्थिति में उस रिक्त पद को भरने के लिए नए चुनाव कराना अनिवार्य नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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