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Indian Polity
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की प्रस्तावना में 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' के आदर्शों को फ्रांसीसी क्रांति (1789) से लिया गया है, जबकि 'सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय' के आदर्श को रूसी क्रांति (1917) से प्रेरित होकर शामिल किया गया है।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है और इसमें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते यह संशोधन संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) को क्षति न पहुँचाए।
- 3. बेरूबारी यूनियन बाद (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है, इसलिए विधायिका इसमें संशोधन करने की शक्ति नहीं रखती है, और इस स्थिति को आज भी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्णतः अपरिवर्तित रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि भारतीय संविधान की प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति से तथा न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श 1917 की रूसी क्रांति से लिए गए हैं। कथन 2 सही है क्योंकि 'केशवानंद भारती मामले' (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व के 'बेरूबारी बाद' के निर्णय को बदलते हुए यह माना कि प्रस्तावना संविधान का भाग है और इसमें अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है बशर्ते इससे मूल ढांचा प्रभावित न हो। कथन 3 गलत है क्योंकि बेरूबारी बाद के प्रस्तावना गैर-भाग होने के सिद्धांत को केशवानंद भारती बाद में खारिज कर दिया गया था और एल.सी. गोलकनाथ तथा केशवानंद भारती मामलों में प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना गया है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) और केंद्र-राज्यीय संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, उन पर सलाह देना तथा संघ और राज्यों के सामान्य हित के विषयों पर विचार-विमर्श करना है।
2. वर्ष 1990 में सरकारी आयोग (Sarkaria Commission) की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद् को एक स्थायी निकाय के रूप में स्थापित किया गया था, जिसकी बैठकों की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा संघ राज्यक्षेत्रों के प्रशासक या मुख्यमंत्री शामिल होते हैं।
3. अंतर-राज्यीय परिषद् द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय या संस्तुति केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों के लिए कानूनी रूप से पूर्णतः बाध्यकारी (Binding) होती है, और किसी भी राज्य सरकार के पास इसके निर्णयों को मानने से इनकार करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) रिट का शाब्दिक अर्थ क्या है?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 और शहरी स्थानीय शासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में 'भाग IX-A' जोड़ा गया तथा अनुच्छेद 243-ZD के अंतर्गत प्रत्येक राज्य में 'जिला योजना समिति' (District Planning Committee) के गठन का प्रावधान किया गया है, जो जिले के लिए विकास योजनाएं तैयार करने का कार्य करती है।
2. महानगर योजना समिति (Metropolitan Planning Committee - अनुच्छेद 243-ZE) के सदस्यों में से कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्य उस महानगर क्षेत्र के भीतर की नगरपालिकाओं और पंचायतों के निर्वाचित सदस्यों में से ही होने चाहिए, और इन सदस्यों का अनुपात उस क्षेत्र में नगरपालिकाओं और पंचायतों की जनसंख्या के अनुपात के अनुरूप होना चाहिए।
3. इस संशोधन के माध्यम से यह अनिवार्य किया गया है कि प्रत्येक नगरपालिका का कार्यकाल उसके पहली बैठक के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष का होगा, और यदि किसी नगरपालिका का विघटन समय से पूर्व हो जाता है, तो विघटन की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राज्यपाल (Governor) की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
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